कटिहार: डीआरएम कार्यालय के पास बदहाल हुआ ओटी पाड़ा का चिल्ड्रन पार्क, झूले टूटे, झाड़ियों में तब्दील हुई लाखों की जमीन

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कटिहार रेलवे कॉलोनी का चिल्ड्रन पार्क रखरखाव की कमी के कारण पूरी तरह से बदहाल हो गया है. कभी बच्चों की किलकारियों से गूंजने वाला यह पार्क अब खंडहर बन चुका है. बच्चे खेलने से वंचित हैं और घरों में कैद रहने को मजबूर हैं.

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पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण रेल मंडलों में शुमार कटिहार में रेलवे कॉलोनी के बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं की पोल खुल रही है. कटिहार रेलवे कॉलोनी अंतर्गत मणिक पाड़ा (ओटी पाड़ा) स्थित चिल्ड्रन पार्क रखरखाव और प्रशासनिक अनदेखी के चलते पूरी तरह बदहाली के कगार पर पहुंच गया है. कभी बच्चों की किलकारियों और चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह पार्क आज खंडहर का रूप ले चुका है. पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले, फिसलपट्टी और अन्य खेल उपकरण टूट-फूट कर कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं, जिससे कॉलोनी के बच्चे खेलने की सुविधा से पूरी तरह वंचित हो गए हैं.

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झाड़ियों और घास-फूस ने घेरी लाखों की जमीन, खेलकूद ठप

स्थानीय लोगों के अनुसार, लाखों रुपये की सरकारी लागत से रेलवे कर्मचारियों के बच्चों के स्वस्थ मनोरंजन के लिए इस विशाल चिल्ड्रन पार्क का निर्माण कराया गया था. लेकिन वर्षों से नियमित मेंटेनेंस और सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण पार्क की पूरी जमीन पर बड़ी-बड़ी जंगली घास और कटीली झाड़ियां उग आई हैं. टूटे हुए लोहे के झूलों और तीखे किनारों के कारण बच्चों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है, जिसके चलते अभिभावक अपने बच्चों को वहां भेजने से कतराते हैं.

घरों में कैद नौनिहाल, शारीरिक व मानसिक विकास पर असर

पार्क की दुर्दशा का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव रेलवे कॉलोनी के सैकड़ों बच्चों के स्वास्थ्य और दिनचर्या पर पड़ रहा है. अभिभावकों का कहना है कि शाम के वक्त जब बच्चों को खुले वातावरण में खेलने, दौड़ने और शारीरिक गतिविधि की जरूरत होती है, तब वे बदहाल पार्क के अभाव में घरों के कमरों में मोबाइल और टीवी की स्क्रीन के आगे कैद रहने को विवश हैं. इससे बच्चों की फिटनेस और मानसिक स्फूर्ति दोनों प्रभावित हो रही है.

डीआरएम और वरीय अफसरों के नाक के नीचे अनदेखी

स्थानीय रेल कर्मचारियों ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि कटिहार मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कार्यालय सहित रेलवे के दर्जनों क्लास-वन और वरीय अधिकारी इसी शहर में बैठते हैं. डीआरएम मुख्यालय के इतने समीप स्थित रेलवे कॉलोनी के इस पार्क की ऐसी दयनीय स्थिति रेल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है. रेलकर्मियों ने बताया कि पार्क की मरम्मत, रंग-रोगन और सुरक्षा बाउंड्री को लेकर कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों को लिखित व मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन आज तक कोई ठोस सुध नहीं ली गई.

जीर्णोद्धार और नए झूले लगाने की उठी मांग

रेल कर्मियों, महिला संगठनों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने डीआरएम कटिहार से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है. लोगों ने अपील की है कि:

  • पार्क से अविलंब झाड़ियों और खरपतवार की सफाई कराई जाए.
  • टूटे हुए झूलों को हटाकर नए आधुनिक झूले, फिसलपट्टी और ओपन-जिम उपकरण स्थापित किए जाएं.
  • पार्क में नियमित प्रकाश (लाइटिंग), बेंच और सुरक्षा गार्ड/माली की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि कॉलोनी का यह पार्क दोबारा जीवंत हो सके.
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