कटिहार में अब पेपरलेस होगी जमीन-मकान की रजिस्ट्री, मोबाइल पर मिलेगी डीड की डिजिटल कॉपी

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जिला निबंधन कार्यालय कटिहार

कटिहार जिले में जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया अब पूरी तरह से डिजिटल हो रही है. निबंधन विभाग जल्द ही पेपरलेस व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिससे प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी. रजिस्ट्री पूरी होते ही डीड की डिजिटल कॉपी सीधे क्रेता-विक्रेता के मोबाइल पर भेज दी जाएगी.

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कटिहार जिले में जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है. निबंधन विभाग इसी महीने से पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और पारदर्शी होने की उम्मीद है. सबसे बड़ी सुविधा यह होगी कि रजिस्ट्री पूरी होते ही डीड की डिजिटल कॉपी (पीडीएफ) का लिंक सीधे क्रेता और विक्रेता के मोबाइल पर भेज दिया जाएगा. इससे दस्तावेज की हार्ड कॉपी के लिए बार-बार निबंधन कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

ऑनलाइन होगी पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी. ई-निबंधन पोर्टल पर आवेदन भरते ही सॉफ्टवेयर स्वतः डीड का प्रारूप तैयार करेगा. संपत्ति का मूल्यांकन, स्टांप शुल्क की गणना, ई-स्टांप, ऑनलाइन भुगतान और स्लॉट बुकिंग जैसी सभी प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी होंगी. इससे समय की बचत होगी और मानवीय त्रुटियों के साथ अनावश्यक विलंब पर भी रोक लगेगी.

सर्विस प्रोवाइडर की भूमिका निभाएंगे दस्तावेज लेखक

जिला अवर निबंधन पदाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि बिहार स्टांप नियमावली-2026 के तहत वर्तमान में कार्यरत दस्तावेज लेखक, स्टांप विक्रेता और निबंधन कार्य से जुड़े अधिवक्ताओं को 'सर्विस प्रोवाइडर' के रूप में अनुज्ञप्ति दी जाएगी. ये सेवा प्रदाता ई-निबंधन पोर्टल पर आवेदन भरने, ई-फाइलिंग, ई-साइन, स्टांप शुल्क की गणना तथा अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं में पक्षकारों की सहायता करेंगे. जिला पदाधिकारी के स्तर से इन्हें लाइसेंस जारी किया जाएगा. ई-स्टांप सेवा प्रदाताओं को सरकार की ओर से निर्धारित क्रेडिट सीमा भी उपलब्ध कराई जाएगी.

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

नई व्यवस्था को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. स्थानीय दस्तावेज लेखकों का कहना है कि जिले के अधिकांश ग्रामीण अभी भी साधारण मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं. इंटरनेट, ई-मेल, व्हाट्सएप और ऑनलाइन आवेदन की सीमित जानकारी के कारण शुरुआती दौर में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. उनका मानना है कि इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान और तकनीकी सहायता जरूरी होगी.

पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त होगी व्यवस्था

जिला अवर निबंधन पदाधिकारी अजय कुमार ने कहा कि पेपरलेस निबंधन व्यवस्था का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है. उन्होंने बताया कि आधार आधारित पहचान सत्यापन, बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण और डिजिटल हस्ताक्षर को अनिवार्य किया गया है. इससे फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी की संभावना काफी हद तक समाप्त होगी. नई प्रणाली लागू होने के बाद अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगी, जिससे लोगों को कार्यालय के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

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सूरज कुमार गुप्ता

लेखक के बारे में

By सूरज कुमार गुप्ता

सूरज कुमार गुप्ता पिछले 25 वर्षों से प्रिंट मीडिया में एक्टिव है. वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत की. राजनीतिक व सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर पत्रकारिता करना इनकी रुचि में शामिल है. सामाजिक कार्यो में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2007 में इन्हें भारत सरकार की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था.

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