करोड़ों की लागत से बना फोरलेन हाईवे बना ‘खलिहान’, बीच सड़क पर मक्का सुखाने से मंडरा रहा बड़े हादसे का खतरा

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फोरलेन पर इसी तरह से सिखाया जा रहा मक्का

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Four Lane Highway: कटिहार जिले के मनिहारी अनुमंडल क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बनी नवनिर्मित फोरलेन सड़क इन दिनों किसानों के लिए फसल सुखाने का मैदान बन चुकी है. हाईवे की एक लेन पर मक्के के दानों और ढेरों का अवैध कब्जा होने के कारण तेज रफ्तार वाहनों के फिसलने और भीषण सड़क दुर्घटना होने का जोखिम चरम पर पहुंच गया है.

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कटिहार के अमदाबाद से मनोज कुमार की रिपोर्ट

Four Lane Highway: कटिहार जिले के मनिहारी अनुमंडल अंतर्गत नारायणपुर और आसपास के इलाकों से गुजरने वाली नवनिर्मित फोरलेन सड़क पर इन दिनों घोर लापरवाही का नजारा देखने को मिल रहा है. सीमांचल में इस बार हुई मक्के की बंपर पैदावार के बाद स्थानीय किसानों ने खेतों या सुरक्षित खलिहानों के बजाय सीधे इस करोड़ों की लागत वाले चमचमाते हाईवे को ही अपना निजी खलिहान बना लिया है. फोरलेन के एक बड़े हिस्से पर सरेआम मक्के की थ्रेशिंग (दौनी) करने और फसल को सुखाने का काम धड़ल्ले से जारी है, जिससे यहाँ से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों की जान हर वक्त आफत में फंसी रहती है.

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वन-वे ट्रैफिक के बीच 1 किलोमीटर तक सड़क पर फैला है मक्का

हाईवे पर जारी इस अतिक्रमण और उससे उत्पन्न होने वाले ट्रेफिक संकट का सिलसिलेवार विवरण निम्नलिखित है:

  • एक ही लेन पर दोनों ओर का परिचालन: भौगोलिक स्थिति के अनुसार, नारायणपुर से पूर्व और मिर्जापुर के बीच अभी फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य पूरी तरह मुकम्मल (कंप्लीट) नहीं हुआ है. इस तकनीकी वजह से हाईवे के एक तरफ की सड़क को बंद रखा गया है और चालू हिस्से पर ही दोनों दिशाओं (आने-जाने) के वाहनों का परिचालन वन-वे के रूप में कराया जा रहा है.
  • हाईवे बना अनाज यार्ड: इस बेहद संवेदनशील और संकरे रूट के बावजूद, किसानों ने नारायणपुर के समीप चालू फोरलेन रोड पर करीब 1 किलोमीटर की दूरी तक एक पूरी साइड में मक्के को फैलाकर सुखाना शुरू कर दिया है. नारायणपुर से लेकर मनसाही थाना क्षेत्र के मरंगी तक कई किलोमीटर के दायरे में हाईवे को पूरी तरह खलिहान का रूप दे दिया गया है.

तेज रफ्तार वाहनों के लिए ‘स्लिप ज़ोन’ साबित हो रहे मक्के के दाने

जानलेवा साबित हो सकती है लापरवाही: स्थानीय राहगीरों और वाहन चालकों का कहना है कि नए फोरलेन हाईवे पर गाड़ियां अमूमन 80 से 100 किमी प्रति घंटे की अत्यंत तीव्र गति से गुजरती हैं. ऐसे में जब गाड़ियां अचानक ब्रेक लगाती हैं, तो सड़क पर बिखरे मक्के के गोल और चिकने दानों के कारण टायर पूरी तरह अपनी ग्रिप खो देते हैं और वाहन के पलटने या अनियंत्रित होकर टकराने की आशंका शत-प्रतिशत बढ़ जाती है. इसके अलावा, चिलचिलाती धूप में सड़क पर मक्का पलट रहे मजदूर और किसान भी तेज रफ्तार भारी वाहनों की सीधी जद (लपेटे) में रहते हैं.

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और स्थानीय प्रशासन मौन

कार्रवाई की पुरजोर मांग:

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन की घोर उदासीनता है. मुख्य मार्ग और व्यस्ततम आर्थिक कॉरिडोर पर सरेआम हफ्तों से हो रहे इस अवैध अतिक्रमण को लेकर संबंधित विभाग ने पूरी तरह से आंखें मूंद रखी हैं.

सड़क से गुजरने वाले यात्रियों का आरोप है कि प्रशासनिक अमला शायद किसी बड़ी और अप्रिय मानवीय दुर्घटना का इंतजार कर रहा है. बुद्धिजीवियों और वाहन चालकों ने कटिहार जिला प्रशासन और मनिहारी अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) से पुरजोर मांग की है कि इस लाइफ-थ्रेटनिंग (जानलेवा) लापरवाही पर तुरंत संज्ञान लिया जाए. हाईवे पर पेट्रोलिंग टीम भेजकर अवैध रूप से फसल सुखा रहे लोगों को वहां से हटाया जाए और सुरक्षित यातायात बहाल कराया जाए, ताकि बेकसूर मुसाफिरों को अकाल मौत का ग्रास बनने से बचाया जा सके.

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