जननी सुरक्षा योजना के रुपये बढ़ने से संस्थागत प्रसव में होगी बढ़ोतरी

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भभुआ सदर. वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री की ओर से नये वर्ष में गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार सहित अन्य जरूरतों के लिए घोषित छह हजार की राशि दिये जाने से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि वे लक्ष्य को प्राप्त कर पायेंगे. हालांकि, सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने आनेवाली महिलाओं को आदेश अनुरूप […]

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भभुआ सदर. वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री की ओर से नये वर्ष में गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार सहित अन्य जरूरतों के लिए घोषित छह हजार की राशि दिये जाने से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि वे लक्ष्य को प्राप्त कर पायेंगे.
हालांकि, सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने आनेवाली महिलाओं को आदेश अनुरूप छह हजार रुपये दिये जाने का विभागीय आदेश जिले में नहीं आया है, लेकिन सिविल सर्जन डॉ केवीपी सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ विवेक कुमार सिंह जैसे स्वास्थ्यविभाग के बड़े अफसरों का मानना है कि प्रधानमंत्री की घोषणा से मातृ-शिशु पंजीकरण व संस्थागत प्रसव के प्रतिशत में बढ़ोतरी होगी
प्रतिशत बढ़ाने में छूट रहा स्वास्थ्य महकमे का पसीना
गौरतलब है कि फिलहाल सरकारी की ओर से जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण प्रसूता को 14 सौ तो शहरी प्रसूता को एक हजार रुपये दिये जा रहे हैं. तमाम सुविधाओं और राशि दिये जाने के बावजूद स्वास्थ्य महकमा इस योजना को सौ फीसदी तो दूर 65 से ऊपर ले जाने में भी अफसरों के पसीने छूट रहे हैं. फिलहाल वर्ष 2016-17 के आंकड़ों पर गौर करें, तो जननी बाल सुरक्षा योजना के अंतर्गत 16640 महिलाओं का प्रसव हुआ, जबकि लक्ष्य 25696 महिलाओं को संस्थागत प्रसव का लाभ पहुंचाना था.
53 जिलों को ही मिल रहा छह हजार का लाभ
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ विवेक कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल गर्भवती को छह हजार रुपये की मदद अभी पूरे भारत के उच्च प्राथमिकता वाले 53 जिलों में ही उपलब्ध है. इसका राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रोजेक्ट इंप्लिमेंटेशन प्लान(पीआइपी) में ही प्रावधान था, लेकिन अब 2016-17 की पीआइपी जारी हो चुकी है. ऐसे में माना जा रहा है कि बजट में इस योजना के लिए मोटी रकम आवंटित होगी.
खाते में दो बार आयेगी योजना की राशि
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ विवेक कुमार ने बताया कि महिला के गर्भधारण के बाद सरकारी अस्पतालों में पंजीकरण कराते ही चार हजार की राशि उसके खाते में आ जायेगी. शेष रुपये सरकारी संस्था में प्रसव कराने के बाद मिलेगी. इससे माना जा रहा है कि महिलाओं में सरकारी या इससे अनुबंधित संस्थाओं में प्रसव कराने के प्रति रुझान बढ़ेगा.
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