दिव्यांग से 1.37 लाख की ठगी

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दिव्यांग धर्मेंद्र ने एजेंट रितिक को बस की किस्त के दिये थे रुपये बैंककर्मी पर कार्रवाई तो हुई नहीं, उल्टे दिव्यांग पर 1.98 लाख चुकाने का बढ़ाया दबाव दिव्यांग ने चार साल पहले बैंक में पांच लाख जमा कर खरीदी थी बस भभुआ सदर : सस्ता कर्ज देने का दावा करने वाले इंड सइंड बैंक […]

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दिव्यांग धर्मेंद्र ने एजेंट रितिक को बस की किस्त के दिये थे रुपये
बैंककर्मी पर कार्रवाई तो हुई नहीं, उल्टे दिव्यांग पर 1.98 लाख चुकाने का बढ़ाया दबाव
दिव्यांग ने चार साल पहले बैंक में पांच लाख जमा कर खरीदी थी बस
भभुआ सदर : सस्ता कर्ज देने का दावा करने वाले इंड सइंड बैंक के कलेक्शन एजेंट शहर के दिव्यांग व्यक्ति को एक लाख 37 हजार रुपये लेकर चंपत हो गया. लेकिन, बैंक द्वारा अपने कर्मी पर कार्रवाई न करते हुए दिव्यांग पर ही उल्टे कर्ज नहीं भरने पर एक लाख 98 हजार चुकाने का नोटिस भेज दिया गया. इतना ही नहीं जब दिव्यांग अपने परिवार के साथ गुहार लेकर इंडसइंड बैंक की डिहरी शाखा जाकर असिस्टेंट मैनेजर से मिला, तो उन्हें मैनेजर द्वारा अपने कलेक्शन एजेंट के घर का पता देकर उन्हें उसके घरवालों के पास दिये गये एक लाख 37 हजार मांगने भेज दिया गया.
गौरतलब है कि शहर के वार्ड संख्या तीन पटेल चौक निवासी और दिव्यांग धर्मेंद्र द्विवेदी ने चार साल पहले इंड सइंड बैंक की डिहरी शाखा से आजीविका हेतु पांच लाख रुपये जमा कर बस निकाली थी. बैंक द्वारा कर्ज चुकाने के लिए प्रतिमाह 27800 रुपये किश्त बांधा गया था, जिसे लेने बैंक का कलेक्शन एजेंट और डिहरी थाना क्षेत्र के भेड़िया निवासी रितिक कुमार भभुआ आता था. पिछले जून महीने में बकाया किश्त लेने पहुंचे रितिक कुमार को दिव्यांग धर्मेंद्र द्विवेदी द्वारा पिछले कुछ महीने का बकाया रहे एक लाख 37 हजार रुपये दिया गया था.
राशि बड़ी होने के चलते दिव्यांग की पत्नी द्वारा कलेक्शन एजेंट के पहचान पत्र पर एक लाख 37 हजार रुपये चुकाने का हस्ताक्षर करा लिया गया, लेकिन एजेंट द्वारा उक्त राशि को बैंक में जमा नहीं करते हुए वह गायब हो गया.
इधर, बैंक को जब कर्ज की बकाये किश्त नहीं मिली, तो उसने दिव्यांग को नोटिस भेजा. नोटिस पर जब दिव्यांग 24 सितंबर को इसका पता करने बैंक की डिहरी शाखा में पहुंचा, तो उसके होश उड़ गये क्योंकि उनके दिये एक लाख 37 हजार रुपये कलेक्शन एजेंट द्वारा बैंक में जमा ही नहीं किये गये थे. इस दौरान दिव्यांग द्वारा रुपये जमा करने का लाख प्रुफ बैंक के अधिकारियों को दिया गया. लेकिन बैंक के अधिकारी पैसा लेकर भागे अपने कर्मी पर कार्रवाई तो दूर उल्टे उन्हें कलेक्शन कर्मी के घर का पता दे दिया गया कि वह उसके घरवालों से मिले तो उनका पैसा वापस मिल सकता है.
इस पर जब दिव्यांग व्यक्ति द्वारा बैंक से अपने कर्मी पर कार्रवाई या एफआइआर दर्ज नहीं करने की शिकायत की गयी, तो बैंक के अधिकारियों द्वारा टका सा जवाब देकर दिव्यांग को वापस भेज दिया. इधर इस मामले में दिव्यांग की पत्नी ने कैमूर एसपी से सारी घटनाक्रम की जानकारी देते हुए उनसे मदद की गुहार लगायी गयी, तो एसपी हरप्रीत कौर ने मदद का भरोसा देते हुए उन्हें डिहरी थाना क्षेत्र का मामला बता उन्हें डिहरी थाना में केस दर्ज करने को कहा.
इस बाबत जब डिहरी स्थित इंडसइंड बैंक के असिस्टेंट मैनेजर प्रभाकर पाठक से पूछा गया, तो उन्होंने पहले तो इस मामले में दिव्यांग को ही दोषी ठहरा दिया और कहा कि बिना बैंक के कलेक्शन पर्ची के वगैर उन्हें रुपये नहीं चुकाने थे. फिर भी कार्य में अनियमितता पाये जाने पर कलेक्शन एजेंट रितिक कुमार को बैंक से हटा दिया गया है और ग्राहकों से धोखाधड़ी करने में उस पर कार्रवाई के लिए पुलिस को लिखा गया है.
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