मोहनिया : चयनित वार्डों की अनदेखी कर अन्य वार्डों में नल का जल योजना का क्रियान्वयन

Updated at : 17 Jul 2018 12:45 AM (IST)
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मोहनिया : चयनित वार्डों की अनदेखी कर अन्य वार्डों में नल का जल योजना का क्रियान्वयन

मोहनिया सदर : प्रखंड में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के अंतर्गत चल रहे हर घर नल का जल योजना को कुबेर का खजाना समझ नियमों को ताक पर रख मनमाने ढंग से राशि का दुरुपयोग करनेवाले मुखियाओं, पंचायत सचिवों व वार्ड सदस्यों पर अब तलवार लटकती नजर आ रही है. उक्त लोगों ने सरकार की […]

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मोहनिया सदर : प्रखंड में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के अंतर्गत चल रहे हर घर नल का जल योजना को कुबेर का खजाना समझ नियमों को ताक पर रख मनमाने ढंग से राशि का दुरुपयोग करनेवाले मुखियाओं, पंचायत सचिवों व वार्ड सदस्यों पर अब तलवार लटकती नजर आ रही है.
उक्त लोगों ने सरकार की गाइडलाइन को नजर अंदाज करते हुए उन वार्डों में नल का जल योजना पर करोड़ों रुपये पानी की तरह खर्च कर दिया है, जिनका चयन प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा किया ही नहीं गया था. लेकिन, ऐसा करनेवालों के अब बुरे दिन आ चुके हैं.
क्योंकि, इस मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए नये बीडीओ अजय कुमार सिंह ने ऐसे मुखिया, पंचायत सचिव व वार्ड सदस्यों की सूची तैयार करने का आदेश जारी कर दिया है. जिन लोगों ने बिना चयनित वार्डों में राशि को खर्च कर दिया है, वैसे लोगों पर अब गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है. बहुत से पंचायत सचिवों के तो अभी से हाथ-पाव फुलना शुरू हो गये हैं.
छह करोड़ खर्च, फिर भी चार वार्डों में ही योजनाएं पूरी : सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि जिन 54 वार्डों में नल का जल योजना का कार्य शुरू किया गया है. उनमें से 17 वार्ड ही चयनित है. बाकी के 37 वार्ड ऐसे हैं जिनका चयन ही प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा नहीं किया गया है.
इसका नतीजा यह है कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर अब तक छह करोड़ तीन लाख 85 हजार 65 रुपये खर्च कर दिये गये. फिर भी सिर्फ चार वार्डों में ही योजनाएं पूर्ण बतायी जा रही है. इसके अलावे कुछ वार्डों में योजना पूर्ण भी है तो उसकी एमबी बुक नहीं है.
इस वजह से वह अपूर्ण ही मानी जायेगी. एमबी बुक नहीं होने के पीछे का एक सबसे बड़ा सच यह है कि लगाये गये नल जल की गुणवत्ता की जांच पीएचइडी के जेई को करना है और जेई तभी एमबी बुक करेंगे, जब गुणवत्तापूर्ण कार्य किया गया होगा. लेकिन, यहां तो संवेदक द्वारा घटिया से घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है. चाहे वह बोरिंग की गहराई हो. मोटर की क्वालिटी हो या फिर पाइपें.
जिन चयनित वार्डों में हो रहा कार्य : भिट्टी पंचायत का वार्ड 13, बेलौड़ी पंचायत का वार्ड नौ, भरखर पंचायत का वार्ड दो, अकोढ़ीमेला पंचायत का वार्ड छह, पानापुर पंचायत का वार्ड आठ, पांच व 13, मुजान पंचायत का वार्ड 11, बढुपर पंचायत का वार्ड तीन, डंडवास पंचायत का वार्ड दो, उसरी पंचायत का वार्ड 13, बम्हौरखास पंचायत का वार्ड आठ है.
पंचायतों में नल का जल योजना में खर्च
बोले बीपीआरओ
इस संबंध में बीपीआरओ कृष्णा नंदन पंडित ने बताया कि प्रखंड के 86 वार्डों का चयन किया गया था. इनमें से 14 वार्डों में ही नल का जल का कार्य शुरू किया गया है. 54 वार्डों में नल का जल का कार्य चल रहा है. इनमें से 17 वार्ड ही चयनित हैं. बीडीओ ने बिना चयनित वार्डों में कार्य कराने वाले मुखिया, पंचायत सचिव व वार्ड सदस्यों पर कार्रवाई के लिए सूची तैयार करने का आदेश दे दिया है. बहुत जल्द ही ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जायेगी.
चयनित 72 वार्डों में शुरू नहीं हुआ नल का जल योजना का काम
प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी द्वारा गाइडलाइन के अनुसार 18 पंचायतोंके 86 वार्डों का चयन किया था. इनमें से केवल 14 वार्डों में ही नल का जल योजना का कार्य चल रहा है.
शेष 72 चयनित वार्डों में अब तक कार्य शुरू ही नहीं कराया गया है. इस आंकड़े को देख कर आप खुद समझ सकते हैं कि प्रखंड में नल का जल योजना में किस तरह से कुछ मुखिया, पंचायत सचिव व वार्ड सदस्य अपनी मनमानी करते हुए सरकार की गाइडलाइन को चुनौती देते हुए प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं.
हालांकि, जिस तरह से प्रशासन ने इस मामले पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दिया है. उससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि गाइडलाइन की अनदेखी करने व प्रशासन को ठेंगा दिखाने वालों की अब खैर भी नहीं रहेगी.
यदि जिस तरह आज प्रखंड प्रशासन को कमर कसनी पड़ रही है. यदि शुरुआती दौर में ही उस समय के बीडीओ ने चयनित वार्डों की सूची के आधार पर नल जल योजना की शुरुआत करवाया होता, तो अब नये बीडीओ को यह दिन नहीं देखना पड़ता और छह करोड़ की राशि खर्च होने के बाद सिर्फ चार वार्डों में ही नल का जल योजना पूर्ण नहीं हुई होती.
बहुत से पंचायतों के ऐसे भी वार्ड हैं, जिनमें बोरिंग होने के छह माह बीत गये. फिर भी अब तक पाइप लाइन तक नहीं बिछायी गयी. इतना ही नहीं मुखिया, पंचायत सचिव व वार्ड से मिल कर नल जल का कार्य करानेवाले ठेकेदार योजना की मोटी रकम लेकर आराम से घूम रहे हैं.
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