अधिकारियों-कर्मचारियों से वसूला गया पांच लाख रुपये का जुर्माना
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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लोक सेवा अधिकार अधिनियम के मामलों को पेंडिंग रखना पड़ा भारी 7, 03, 500 लाख का लगाया गया जुर्माना, अब तक 11,534 मामले हुए दर्ज भभुआ नगर : लोक सेवा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आनेवाली सेवाओं का निबटारा निर्धारित समयावधि में नहीं करने के मामले में सरकारी सेवकों से लगभग पांच लाख रुपये का जुर्माना […]
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लोक सेवा अधिकार अधिनियम के मामलों को पेंडिंग रखना पड़ा भारी
7, 03, 500 लाख का लगाया गया जुर्माना, अब तक 11,534 मामले हुए दर्ज
भभुआ नगर : लोक सेवा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आनेवाली सेवाओं का निबटारा निर्धारित समयावधि में नहीं करने के मामले में सरकारी सेवकों से लगभग पांच लाख रुपये का जुर्माना वसूल किया गया है. सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले में 24 अधिकारियों व कर्मचारियों को चिह्नित किया है.
उल्लेखनीय है कि लोक सेवा अधिकार अधिनियम आमलोगों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कुछ चुनी हुई लोक सेवाएं उपलब्ध कराने को सुनिश्चित करनेवाला कानून है. इसके अंतर्गत राज्य सरकार ने फिलहाल 10 विभागों से जुड़ी 50 सेवाओं को सूचीबद्ध किया है, जिसमें राशनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जाति, चरित्र और आमदनी से संबंधित प्रमाणपत्र दिये जाने जैसी सेवाएं प्रमुख हैं. इस अधिनियम का सबसे खास प्रावधान यह है कि निर्धारित किये गये समय में आवेदकों को लोक सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों को दंडित करने का भी प्रावधान है. इसके अंतर्गत ढाई सौ रुपये से लेकर अधिकतम पांच हजार रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है.
जरूरत पड़ने पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है.नौ बिचौलिये अब तक हुए गिरफ्तार: बिचौलियों के प्रभाव को आरटीपीएस काउंटर से समाप्त करने के लिए जिले के वरीय उपसमाहर्ता प्रत्येक शनिवार को आरटीपीएस काउंटरों की जांच करते हैं, जिसमें अब तक कुल 1590 बार विभिन्न कार्यालयों की जांच की जा चुकी है, जिसमें नौ बिचौलियों को भी गिरफ्तार किया गया है.
जिलास्तर पर लोक सेवा अधिकार अधिनियम के मामलों को निर्धारित समयावधि में पूरा नहीं करने के मामले में कुल सात लाख तीन हजार पांच सौ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है.
11446 मामलों की सुनवाई पूरी: जिले में लोक सेवा अधिकार अधिनियम के तहत 17 मार्च 2013 से लेकर 31 जुलाई 2017 तक कुल 11534 अपील दर्ज की जा चुकी हैं, जिसमें कुल 11446 मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है. इन मामलों को पेंडिंग रखने पर कई प्रखंड विकास पदाधिकारियों, सीओ, राजस्वकर्मी और पंचायत सचिव आदि पर जुर्माना लगाया गया है. साथ ही अन्य मामलों में सुनवाई जारी है, जिसका फैसला आने के बाद संबंधित अनुमंडल के एसडीओ जुर्माने की राशि तय करेंगे.
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