व्यवसाय पर पड़ा 40 फीसदी असर
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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नोटबंदी का असर. बाजार में नहीं लौट रही रौनक, बैंकों के पास मंडराते रहे लोग कर्ज लेकर खेती करने में जुटे हैं किसान जहानाबाद : 500 और 1000 के नोट पर वैन लगाने के 12 दिनों बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो पायी है. आठ नवंबर की रात लगाये गये वैन के बाद लोगों में […]
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नोटबंदी का असर. बाजार में नहीं लौट रही रौनक, बैंकों के पास मंडराते रहे लोग
कर्ज लेकर खेती करने में जुटे हैं किसान
जहानाबाद : 500 और 1000 के नोट पर वैन लगाने के 12 दिनों बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो पायी है. आठ नवंबर की रात लगाये गये वैन के बाद लोगों में जो अफरातफरी मची, उसपर तो काफी हद तक लगाम लगी, लेकिन शहर के बाजार से जो रौनक गायब हुई, वह अब तक नहीं लौटी है. प्राय: हरेक तरह का व्यवसाय नोटबंदी से प्रभावित है. शादी-विवाह की लग्न शुरू होने के बावजूद बाजार अभी गुलजार नहीं हुआ है. व्यापारियों को ग्राहकों का इंतजार है.
खासकर सर्राफा व्यापारी अपने ठप पड़े रोजगार को लेकर चिंतित हैं. इधर, रविवार रहने के बावजूद शहर एवं गांव के कई लोग बैंकों के आस-पास मंडराते रहे. कई लोग जानकारी के अभाव में पूर्व के रविवार की तरह इस रविवार को भी बैंक से नोट एक्सचेंज कराने, जमा या निकासी करने आये थे और बैंक के गेट पर खड़े होकर बैंक खुलने का इंतजार कर रहे थे, जब उन्हें बताया गया कि इस रविवार को बैंक बंद है, तो वे लौट गये.
कपड़ा, किराना व सर्राफा कारोबार पर असर : नोटबंदी का सर्वाधिक प्रभाव रेडिमेड, कपड़ा एवं किराना प्रतिष्ठान के अलावा आभूषण के कारोबार पर पड़ा है. तकरीबन 40 फीसदी तक व्यवसाय पर असर पड़ने से दुकानदारों के चेहरे पर चिंता की लकीरें झलक रही हैं. बाजार में अभी खुले रुपये की दरकार है. हालांकि कुछ दुकानदार नोटबंदी से अपने ऊपर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ने से खुश हैं. लेकिन नोट पर वैन लगाये जाने से प्रभावित होने वाले दुकानदारों की संख्या ज्यादा है.
बाजार में दो हजार रुपये के नये नोट आ जाने के सवाल पर व्यवसायी कहते हैं कि अभी खुदरा पैसे की कमी रहने से वे सामान नहीं दे पा रहे हैं. ज्यादातर ग्राहक अभी 500 एवं 1000 रुपये के प्रतिबंद्धित नोट ही लेकर आ रहे हैं, जिससे स्वीकार नहीं किया जा रहा है. जो जान-पहचान के ग्राहक हैं उन्हें बाद में रुपये देने की बात कहकर सामान की आपूर्ति की जा रही है.
कर्ज लेकर खेती कर रहें किसान : नोटबंदी के असर से किसान भी नहीं उबर पा रहे हैं. इन दिनों रबी फसल की खेती का समय है और धनकटनी भी शुरू है. एक तो कृषि मजदूरों की कमी है, ऊपर से खुदरे पैसे का अभाव रहने से किसान परेशान हैं. कृषि मजदूरों को मजदूरी में खुले रुपये की जरूरत होती है. ऐसे में किसान किसी दूसरे से 100 या 50 रुपये के नोट कर्ज लेकर काम चला रहे हैं. कर्ज के एवज में किसानों को ब्याज की राशि का भुगतान करना पड़ रहा है.
क्या कहते हैं व्यवसायी
नोटबंदी से उनके रेडिमेड प्रतिष्ठान पर करीब 40 प्रतिशत तक का असर पड़ा है. ग्राहक 500 और 1000 रुपये के नोट लेकर आ रहे हैं, जिस पर कपड़े देना उचित नहीं है.
कन्हैया कुमार, रेडिमेड व्यवसायी
शूटिंग-शर्टिंग एवं साड़ी की खरीदारी करने वाले ग्राहकों की संख्या में पहले की अपेक्षा काफी कमी आयी है. लग्न के बावजूद भी व्यवसाय मंद पड़ा हुआ है.
महेश कुमार पोद्दार, कपड़ा व्यापारी
500 और 1000 के पुराने नोट से सोना-चांदी नहीं मिल रहा है. पटना और दिल्ली के आभूषण के होल सेलर के द्वारा सोना नहीं दिया जा रहा है. बाजार में कम संख्या में आ रहे कस्टमर वैन किये गये नोट लेकर पहुंच रहे हैं, जिन्हें लौटा दिया जा रहा है.
महेश प्रसाद, आभूषण व्यापारी
नोटबंदी से कोई खास असर नहीं है, जो ग्राहक अभी वैन किये गये नोट लेकर आ रहे हैं, उन्हें सामान दिया जा रहा है. लेकिन यह तीस दिसंबर तक ही स्वीकार होगा. हां, खुदरा पैसे को लेकर थोड़ी परेशानी जरूर है.
जितेंद्र कुमार, किराना व्यापारी
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