जमुई में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे प्रदीप साव
अंचल कार्यालय में अनशन पर बैठे लोग | Prabhat Khabar Network
जमुई के खैरा प्रखंड में सरकारी गैरमजरूआ जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने और घर तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदीप साव आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. उन पर पांच से छह एकड़ सरकारी जमीन पर दबंगों द्वारा कब्जा करने का आरोप है.
Khaira Jamui Encroachment: जमुई में सरकारी जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने और अपने घर तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर खैरा प्रखंड में मामला अब आमरण अनशन तक पहुंच गया है. खड़ाईच पंचायत के गरगोड़ गांव निवासी प्रदीप साव सोमवार को खैरा प्रखंड सह अंचल कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए. दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुए इस अनशन में उनके समर्थन में कई लोग भी मौके पर पहुंचे.
प्रदीप साव ने प्रशासन से सरकारी गैरमजरूआ जमीन से कथित कब्जा हटाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि गांव में बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन मौजूद है, लेकिन उस पर कथित रूप से दबंग लोगों ने कब्जा कर रखा है. उन्होंने कुछ लोगों पर कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी जमीन पर अपना दावा करने का भी आरोप लगाया है.
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. मामले में प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
पांच से छह एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
प्रदीप साव की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि गरगोड़ गांव में करीब पांच से छह एकड़ सरकारी गैरमजरूआ जमीन है. इस जमीन के कुछ हिस्सों पर कथित तौर पर अवैध कब्जा किया गया है.
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व अभिलेख और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए. उनका कहना है कि यदि जमीन सरकारी है, तो उसे अतिक्रमणमुक्त कराया जाना चाहिए.
अनशनकारियों की प्रमुख मांगों में खाता संख्या 279 और खेसरा संख्या 2865 समेत अन्य सरकारी गैरमजरूआ जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराना शामिल है. इसके अलावा प्रदीप साव के घर तक सड़क निर्माण कराने की मांग भी रखी गयी है.
सड़क नहीं होने से जुड़ी है दूसरी बड़ी मांग
इस मामले में सिर्फ जमीन का विवाद ही नहीं है. प्रदीप साव ने अपने घर तक सड़क निर्माण की मांग को भी प्रमुखता से उठाया है. उनका कहना है कि उनके घर तक आवागमन के लिए उचित सड़क की जरूरत है.
ग्रामीण इलाकों में सड़क की सुविधा सीधे तौर पर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी होती है. घर तक रास्ता नहीं होने की स्थिति में आने-जाने के साथ-साथ जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो सकती है. ऐसे में अनशनकारियों ने प्रशासन से इस मांग पर भी कार्रवाई की अपील की है.
अनशन की जानकारी मिलते ही पहुंची प्रशासनिक टीम
प्रदीप साव के आमरण अनशन पर बैठने की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल शुरू हुई. राजस्व पदाधिकारी, अंचल कार्यालय के कर्मी और अमीन मौके पर पहुंचे. खैरा थाना के पुलिस पदाधिकारी भी पुलिस बल के साथ अंचल कार्यालय पहुंचे.
अधिकारियों ने अनशनकारियों से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया. प्रशासन की ओर से मामले को लेकर बातचीत की गयी, लेकिन समाचार लिखे जाने तक प्रदीप साव का आमरण अनशन जारी था.
अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन जमीन से जुड़े आरोपों की जांच किस तरह आगे बढ़ाता है और सड़क निर्माण की मांग पर क्या कदम उठाता है.
Khaira Jamui Encroachment: जांच के बाद ही साफ होगी जमीन की वास्तविक स्थिति
सरकारी गैरमजरूआ जमीन पर कथित अतिक्रमण और फर्जी दस्तावेजों के आरोप गंभीर हैं. ऐसे मामलों में जमीन का रिकॉर्ड, खाता-खेसरा, राजस्व अभिलेख और मौके की स्थिति महत्वपूर्ण होती है. इसलिए प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और किसका दावा वैध है.
फिलहाल प्रदीप साव की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराये. साथ ही उनके घर तक सड़क निर्माण की दिशा में भी कार्रवाई की जाए.
समाचार लिखे जाने तक आमरण अनशन समाप्त नहीं हुआ था और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार था.
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