नई रेफरल नीति के बीच जमुई सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर सवाल, आईसीयू और ऑक्सीजन प्लांट बंद
फोटो- आईसीयू रुम में लटका ताला | Prabhat Khabar Network
बिहार की नई रेफरल नीति सरकारी अस्पतालों को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. लेकिन जमुई सदर अस्पताल की अव्यवस्था, खासकर ICU सेवा का अब तक शुरू न होना और ऑक्सीजन प्लांट का बंद होना, इस नीति के उद्देश्यों पर सवाल खड़ा कर रहा है. गंभीर मरीजों के उपचार में आ रही चुनौतियों को समझना आवश्यक है.
Jamui News: जमुई. बिहार के सरकारी अस्पतालों में 15 अगस्त से लागू नई रेफरल नीति के तहत गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थान में भेजने से पहले जिला अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के माध्यम से प्राथमिक उपचार देकर उनकी स्थिति स्थिर करने पर जोर दिया गया है. इसके लिए जिला अस्पतालों में आईसीयू, ऑक्सीजन, दवा, जरूरी उपकरण और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं जमुई सदर अस्पताल में आईसीयू सेवा अब तक शुरू नहीं हो सकी है और ऑक्सीजन प्लांट भी करीब दो सप्ताह से तकनीकी खराबी के कारण बंद है.
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आईसीयू सेवा शुरू नहीं, गंभीर मरीजों के इलाज पर चुनौती
नई रेफरल व्यवस्था में मरीज को तभी उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर करने पर जोर है, जब संबंधित बीमारी या उसके जरूरी उपचार की सुविधा जिला अस्पताल में उपलब्ध न हो. गंभीर मरीज को रेफर करने से पहले प्राथमिक उपचार देकर उसकी स्थिति स्थिर करना भी जरूरी है. लेकिन जमुई सदर अस्पताल में आईसीयू सेवा अब तक शुरू नहीं हो सकी है. अस्पताल में करीब तीन वर्ष पहले स्वास्थ्य मंत्री द्वारा रिमोट के माध्यम से आईसीयू का उद्घाटन किया गया था, लेकिन इसके बाद भी सेवा शुरू नहीं हो पाई. गहन चिकित्सा निगरानी या वेंटिलेटर की जरूरत वाले मरीजों के मामले में यह स्थिति बड़ी व्यावहारिक चुनौती बन सकती है.
करीब दो सप्ताह से बंद है ऑक्सीजन प्लांट
सदर अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट भी करीब दो सप्ताह से बंद पड़ा है. फिलहाल ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों के लिए सिलेंडर पर निर्भरता बनी हुई है. इमरजेंसी, प्रसव, ऑपरेशन, सड़क दुर्घटना में घायल मरीज और गंभीर सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में प्लांट के लंबे समय तक बंद रहने से अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
चिकित्सकों और मानव संसाधन की कमी भी बड़ी बाधा
नई रेफरल नीति को प्रभावी बनाने के लिए केवल भवन और उपकरण पर्याप्त नहीं हैं. पर्याप्त चिकित्सक, विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मियों की भी जरूरत है.
जमुई सदर अस्पताल में चिकित्सकों और अन्य मानव संसाधन की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी वाले अस्पतालों में जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात विशेषज्ञों की सेवा लेने के निर्देश दिए गए हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन निर्देशों को जमुई में किस स्तर तक लागू किया जाता है.
भाव्या पोर्टल पर दर्ज होगी मरीज की पूरी उपचार यात्रा
नई रेफरल नीति में रेफरल प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मरीज की पूरी उपचार यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का प्रावधान किया गया है. ओपीडी, इमरजेंसी, जांच और उपचार से संबंधित जानकारी भाव्या पोर्टल पर दर्ज करनी होगी.
मरीज को रेफर करने का स्पष्ट और चिकित्सकीय रूप से उचित कारण भी दर्ज करना होगा. इसकी कंप्यूटरीकृत प्रति मरीज या उसके परिजन को उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज या उच्च चिकित्सा संस्थान भेजे जाने वाले मरीज के रेफरल का कारण निर्धारित प्रारूप में दर्ज कर विभागीय मुख्यालय को भी सूचना देनी होगी.
बिना उचित कारण रेफर करने पर कार्रवाई का प्रावधान
नई व्यवस्था का उद्देश्य जिला अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं के बावजूद सामान्य मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े अस्पतालों में भेजे जाने पर रोक लगाना है. बिना उचित चिकित्सकीय कारण मरीज को रेफर करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि जमुई सदर अस्पताल में आईसीयू और ऑक्सीजन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में यह सवाल भी उठता है कि संसाधनों की कमी के कारण होने वाले रेफरल को किस श्रेणी में रखा जाएगा. गंभीर मरीज को आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर रेफर करना पड़े तो इसे अनावश्यक रेफरल माना जाएगा या अस्पताल की संसाधन कमी को उचित कारण माना जायेगा, यह व्यवस्था के क्रियान्वयन के दौरान स्पष्ट होना जरूरी है.
सरकारी एंबुलेंस से ही भेजे जाएंगे रेफर मरीज
नई नीति के तहत उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किए जाने वाले मरीजों को सरकारी एंबुलेंस के माध्यम से भेजने का प्रावधान किया गया है. गंभीर मरीजों के लिए एएलएस या बीएलएस एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. इसका उद्देश्य रेफरल के दौरान भी मरीज को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि रास्ते में उसकी स्थिति बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके.
व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो नीति के उद्देश्य पर पड़ेगा असर
नई रेफरल नीति का मूल उद्देश्य जिला अस्पतालों को मजबूत बनाना और गंभीर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है. लेकिन इसके लिए आईसीयू, ऑक्सीजन, विशेषज्ञ चिकित्सक, दवा, जांच और पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता जरूरी है. जमुई सदर अस्पताल में आईसीयू सेवा शुरू नहीं होने, ऑक्सीजन प्लांट के करीब दो सप्ताह से बंद रहने और मानव संसाधन की कमी के बीच नई नीति का प्रभावी क्रियान्वयन बड़ी चुनौती है. अब स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन के सामने इन कमियों को जल्द दूर करने की चुनौती है.
कहते हैं उपाधीक्षक
Jamui News: सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. थनीष कुमार ने बताया कि मानव संसाधन की कमी के कारण आईसीयू सेवा शुरू नहीं हो सकी है. इसे लेकर विभाग को पत्राचार किया गया है. उन्होंने कहा कि मानव संसाधन उपलब्ध होते ही आईसीयू सेवा शुरू कर दी जायेगी. ऑक्सीजन प्लांट को लेकर उन्होंने बताया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण फिलहाल प्लांट बंद है. टेक्निशियन उपलब्ध कराने के लिए भी विभाग को पत्र लिखा गया है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही ऑक्सीजन प्लांट को दोबारा चालू कर दिया जायेगा.
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