दो बार हारीं, तीसरी बार जीतीं, बच्चे की परवरिश के साथ मोबाइल से पढ़कर मनप्रीत बनीं बिहार पुलिस सिपाही
बिहार पुलिस में चयन के बाद पुलिस की वर्दी में मनप्रीत कौर | Prabhat Khabar Network
घर संभालने और बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी के बावजूद, मनप्रीत कौर ने अपने बचपन के सपने को पूरा किया. सीमित संसाधनों और दो बार की असफलता के बाद भी, उन्होंने हार नहीं मानी और बिहार पुलिस में सिपाही बनकर मिसाल कायम की.
Manpreet Kaur Bihar Police: शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ीं तो वक्त कम हो गया, लेकिन मनप्रीत कौर का सपना छोटा नहीं हुआ. एक तरफ घर संभालने और बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी थी, दूसरी तरफ बिहार पुलिस में जाने का बचपन का सपना. न महंगी कोचिंग थी, न पढ़ाई के लिए अलग कमरा और न ही तैयारी के लिए पर्याप्त संसाधन. फिर भी मनप्रीत ने हार नहीं मानी.
आपके शहर में
घर के काम और बेटे की देखभाल के बाद बचे समय में मोबाइल और यू-ट्यूब को अपना गुरु बनाया. लिखित परीक्षा की तैयारी की और गांव के मैदान में शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए पसीना बहाया. दो बार असफलता मिली, लेकिन तीसरी कोशिश में मेहनत रंग लाई. मनप्रीत का बिहार पुलिस में सिपाही पद पर चयन हो गया.
अब बरहट प्रखंड की यह बेटी रोहतास जिले के डेहरी स्थित सीआरपीएफ कैंप में प्रशिक्षण ले रही हैं. आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच हासिल की गयी यह सफलता इलाके की उन बेटियों के लिए भी मिसाल बन गयी है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को बीच में छोड़ देती हैं.
मजदूरी के लिए बिहार से पंजाब गया था परिवार
मनप्रीत कौर का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था. वह मांझी समुदाय से आती हैं. उनके माता-पिता को वर्ष 1988 में मजदूरी करने के लिए बिहार छोड़कर पंजाब जाना पड़ा था.
मनप्रीत की शुरुआती पढ़ाई लक्ष्मीपुर थाना क्षेत्र के दीघरा गांव में हुई. बाद में वह माता-पिता के साथ पंजाब चली गयीं. वहीं रहकर उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.
आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन पढ़ाई के साथ मनप्रीत के मन में पुलिस की वर्दी पहनने का सपना बचपन से ही बना रहा.
शादी और बच्चे की जिम्मेदारी के बीच जारी रखी तैयारी
ग्रेजुएशन के बाद मनप्रीत की शादी बरहट प्रखंड के भूदानपुरी मुसहरी निवासी पिंटू मांझी से हुई. शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं. कुछ समय बाद वह एक बेटे की मां बनीं.
बच्चे की परवरिश और घर-परिवार की जिम्मेदारी के बीच प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए समय निकालना आसान नहीं था. लेकिन मनप्रीत ने अपने सपने को जिम्मेदारियों के आगे खत्म नहीं होने दिया.
वह बताती हैं कि पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए उनके पास कोचिंग की सुविधा नहीं थी. ऐसे में उन्होंने मोबाइल और यू-ट्यूब का सहारा लिया. घर के काम और बच्चे की देखभाल पूरी करने के बाद मिलने वाले समय में वह पढ़ाई करती थीं.
गांव का मैदान बना तैयारी का ग्राउंड
मनप्रीत की तैयारी सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रही. बिहार पुलिस की भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा भी महत्वपूर्ण थी. इसके लिए उन्होंने गांव के मैदान को ही अपना अभ्यास स्थल बना लिया.
वह नियमित रूप से दौड़ और शारीरिक दक्षता से जुड़े अभ्यास करती रहीं. दिनचर्या में घर की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई और शारीरिक तैयारी को जगह देना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने लगातार इसे जारी रखा.
यही अनुशासन उनकी सफलता की राह में सबसे बड़ा सहारा बना.
दो बार मिली असफलता, तीसरी कोशिश में बदली किस्मत
मनप्रीत के लिए सफलता की राह सीधी नहीं रही. उन्हें दो बार निराशा का सामना करना पड़ा.
एक बार वह शारीरिक दक्षता परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं. दूसरी कोशिश में लिखित प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद मेरिट में स्थान नहीं बना सकीं.
लगातार दो असफलताओं के बाद भी उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी. असफलता को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और फिर से परीक्षा की तैयारी में जुट गयीं.
तीसरी कोशिश में उनका चयन बिहार पुलिस में सिपाही पद पर हो गया. जिस वर्दी को पहनने का सपना उन्होंने बचपन में देखा था, वह सपना अब हकीकत बन चुका है.
अब डेहरी में चल रहा प्रशिक्षण
बिहार पुलिस में चयन के बाद मनप्रीत कौर का प्रशिक्षण वर्तमान में रोहतास जिले के डेहरी स्थित सीआरपीएफ कैंप में चल रहा है.
आर्थिक कठिनाइयों, सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों से निकलकर पुलिस की नौकरी तक पहुंचने की उनकी कहानी अब बरहट क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.
उनकी सफलता यह भी बताती है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए संसाधन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन लक्ष्य के प्रति निरंतरता और मेहनत भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है.
Manpreet Kaur Bihar Police: मांझी समाज की बेटियों को आगे बढ़ाना चाहती हैं
मनप्रीत का कहना है कि बचपन से ही पुलिस अधिकारी बनने का सपना था. अब वह अपने समाज में बदलाव लाने के साथ मांझी समुदाय की बेटियों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं.
उनका मानना है कि बेटियों को मौका और परिवार का सहयोग मिले तो वे सीमित संसाधनों में भी अपनी पहचान बना सकती हैं.
बरहट प्रखंड में मांझी समुदाय से बिहार पुलिस में सिपाही पद पर चयनित होने वाली वह इकलौती महिला बतायी जा रही हैं. उनकी कहानी सिर्फ नौकरी पाने की कहानी नहीं है, बल्कि परिवार, बच्चे और जिम्मेदारियों के बीच अपने सपने को जिंदा रखने और असफलताओं के बाद दोबारा खड़े होने की कहानी है.

Also Read: बाढ़ के खतरे को लेकर पटना से भागलपुर तक प्रशासन हाई अलर्ट, गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई टेंशन
Also Read: बिहार में देर रात 23 IAS अफसरों का तबादला, इन जिलों के DDC, SDO और नगर आयुक्त बदले गए
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए