जमुई में 4 साल से अधूरा था बच्चों का पुस्तकालय, निर्माण शुरू हुआ तो ग्रामीणों ने ईंट-सीमेंट पर उठाए सवाल
फोटो पुस्तकालय निर्माण कार्य में जुटे लोग और साइड में पड़ा ईटा | Prabhat Khabar Network
जमुई के बरहट में वर्षों से अधूरा पड़ा बच्चों का पुस्तकालय अब प्रशासन की पहल पर फिर से बन रहा है. हालांकि, निर्माण शुरू होते ही ग्रामीणों ने ईंट और सीमेंट की घटिया गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं, जिससे बच्चों के भविष्य की सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई है.
Barhat Library Building: जमुई के बरहट में जिस पुस्तकालय भवन में बच्चों को किताबों के बीच अपना भविष्य तलाशना था, वह वर्षों से अधूरा पड़ा था. भवन की छत पूरी नहीं हुई थी और निर्माण कार्य भी अधूरा था. योजना मद से 4 लाख 36 हजार रुपये की निकासी हो चुकी थी, लेकिन पुस्तकालय अब तक बच्चों को समर्पित नहीं हो सका था.
आपके शहर में
अब इस मामले में प्रशासन की सक्रियता के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया गया है. लेकिन काम शुरू होते ही एक नया सवाल खड़ा हो गया है. ग्रामीणों ने निर्माण में इस्तेमाल हो रही ईंट और सीमेंट की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
मामला बरहट प्रखंड की नूमर पंचायत के वार्ड संख्या 7 का है. यहां करीब 7 लाख 89 हजार रुपये की लागत से दो कमरे का चार समुदाय पुस्तकालय भवन बनाया जाना था. इसे वर्ष 2022-23 में ही पूरा कर बच्चों को सौंपने की योजना थी. लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी भवन अधूरा रह गया.
खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन
पुस्तकालय भवन के अधूरे रहने और योजना में कथित अनियमितता से जुड़ी खबर प्रभात खबर में 23 अगस्त को प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी. खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और अधूरे भवन का निर्माण जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया.
इसके बाद पंचायत सचिव सकलदेव पंडित की देखरेख में निर्माण कार्य शुरू कराया गया. लंबे समय से बंद पड़े निर्माण कार्य के दोबारा शुरू होने से उम्मीद जगी कि अब बच्चों को पुस्तकालय की सुविधा मिल सकेगी.
लेकिन निर्माण शुरू होते ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है.
निर्माण शुरू हुआ तो ईंट-सीमेंट की गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण में दो नंबर की ईंट और निम्न गुणवत्ता वाले सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है. उनका कहना है कि जब प्रशासन ने वर्षों से अधूरे पड़े भवन को पूरा कराने की पहल की है, तो निर्माण की गुणवत्ता पर भी विशेष निगरानी होनी चाहिए.
सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भवन बच्चों के लिए तैयार किया जा रहा है. यदि निर्माण जल्द पूरा करने के दबाव में गुणवत्ता से समझौता हुआ, तो आने वाले समय में भवन की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित हो सकता है.
ऐसे में ग्रामीण जानना चाहते हैं कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी.
7.89 लाख की योजना, 4.36 लाख की निकासी और वर्षों की देरी
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू योजना की लागत और निर्माण में हुई देरी है. दो कमरे के इस पुस्तकालय भवन के निर्माण पर करीब 7 लाख 89 हजार रुपये खर्च होने हैं. इसे वर्ष 2022-23 में ही पूरा किया जाना था.
इसके बावजूद भवन वर्षों तक अधूरा पड़ा रहा. इस दौरान योजना मद से 4 लाख 36 हजार रुपये की निकासी भी हो चुकी है.
अब प्रशासन के निर्देश के बाद निर्माण शुरू हुआ है. ऐसे में स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि बाकी निर्माण कार्य किस गुणवत्ता के साथ और कितनी तेजी से पूरा किया जाता है.
भवन तैयार नहीं, फिर लैपटॉप और इनवर्टर की खरीद कैसे हुई?
मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है. पुस्तकालय के लिए लैपटॉप, बैट्री और इनवर्टर की खरीद भी ग्रामीणों के बीच सवालों का विषय बनी हुई है.
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब पुस्तकालय भवन ही वर्षों तक तैयार नहीं था, तो इन डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल कहां और किस रूप में किया जा रहा था.
यही सवाल इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है. एक तरफ पुस्तकालय भवन का निर्माण अधूरा रहा, दूसरी तरफ योजना से राशि की निकासी हुई और पुस्तकालय से जुड़े डिजिटल सामान की खरीद भी हुई.
अब ग्रामीण चाहते हैं कि भवन निर्माण के साथ-साथ खरीदे गये संसाधनों के इस्तेमाल और उपलब्धता की भी स्थिति स्पष्ट की जाए.
बच्चों के पुस्तकालय का इंतजार अब कब होगा खत्म?
पुस्तकालय का उद्देश्य केवल एक भवन तैयार करना नहीं है. इसका मकसद बच्चों को पढ़ने के लिए बेहतर जगह और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है. लेकिन वर्षों से अधूरा भवन इस उद्देश्य को पूरा नहीं कर सका.
अब निर्माण शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों की उम्मीद फिर जगी है. वे चाहते हैं कि भवन जल्द पूरा हो, लेकिन जल्दबाजी में गुणवत्ता से समझौता न हो.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन के निर्देश के बाद शुरू हुआ यह निर्माण कार्य क्या तय मानकों के अनुरूप पूरा होगा और बच्चों को वास्तव में वह पुस्तकालय मिल पाएगा, जिसका इंतजार वर्ष 2022-23 से किया जा रहा है.
Barhat Library Building: क्या कहते हैं बीडीओ
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी अनिल कुमार मिस्त्री ने कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
उन्होंने कहा कि यदि निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत सही पाई गई, तो इसकी जांच कराई जाएगी. दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.
अब देखना यह है कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कब होती है और जांच में क्या सामने आता है. फिलहाल वर्षों से अधूरे पड़े पुस्तकालय भवन का निर्माण शुरू हो गया है, लेकिन इसके साथ ही गुणवत्ता और जवाबदेही का नया सवाल खड़ा हो गया है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए