वैशाली: गंगा-गंडक के उफान के बीच सितंबर के पहले हफ्ते में डूबने से 7 लोगों की मौत; डीएम वर्षा सिंह ने बाढ़ जनित मौत मानने से किया इनकार, उठे सवाल

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गंगा नदी में SDRF कि टीम फाइल फोटो | Prabhat Khabar Network

वैशाली जिले में बाढ़ का तांडव जारी है, जहां गंगा और गंडक के उफान से हालात बेकाबू हो गए हैं. बाढ़ के गहरे पानी में डूबने से अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने इन मौतों को सीधे तौर पर बाढ़ जनित मानने से इनकार कर दिया है.

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Hajipur News: वैशाली जिले में गंगा, गंडक और उनकी सहायक नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है. सितंबर महीने के शुरुआती महज सात दिनों के भीतर जिले के विभिन्न थाना एवं प्रखंड क्षेत्रों में बाढ़ के गहरे पानी में डूबने से सात लोगों की असामयिक मौत हो चुकी है. इस भीषण त्रासदी ने जहां एक तरफ पूरे जिले और पीड़ित परिवारों में गहरा मातम फैला दिया है, वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रबंधन के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा विरोधाभास खड़ा कर दिया है. निचले और दियारा इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल जाने के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है.

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3 से 6 सितंबर के बीच लगातार मौतों का सिलसिला

जिले में डूबने की घटनाओं की शुरुआत 3 सितंबर को हुई, जब बिदुपुर थाना क्षेत्र निवासी 41 वर्षीय दुधनाथ राय (पिता जयराम राय) बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए और डूबने से उनकी जान चली गई. इसके अगले दिन यानी 4 सितंबर को राघोपुर प्रखंड के फतेहपुर इलाके में मुकेश दास की 10 वर्षीय मासूम पुत्री प्रीति कुमारी तेज जलभराव का शिकार बन गई. 5 सितंबर का दिन जिले के लिए सबसे काला साबित हुआ, जब एक ही दिन में तीन लोगों की मौत हो गई. इनमें बहलूलपुर रुस्तमपुर निवासी 29 वर्षीय विनय कुमार (पिता डागर राय) तेज धारा में बह गए; सदर थाना क्षेत्र के सैदपुर रजौली निवासी 19 वर्षीय युवक आकाश कुमार (पिता रामनाथ राय) की मौत बिदुपुर के सैदपुर गणेश में हुई; जबकि राघोपुर पश्चिम निवासी 62 वर्षीया वृद्धा दनवा देवी (पति राम प्रसाद साह) की बाढ़ के पानी में समाने से मौत हो गई. वहीं 6 सितंबर को भी दो लोगों ने जान गंवाई, जिनमें शिव सागर सिंह के 40 वर्षीय पुत्र अवध सिंह और औद्योगिक थाना क्षेत्र के बड़ी बिशुनपुर निवासी सकलदीप पासवान के 30 वर्षीय पुत्र सन्नी कुमार शामिल हैं. सन्नी मजदूरी करने लोदीपुर गया था, जहां पैर फिसलने से वह गहरे पानी में चला गया.

डीएम के चौंकाने वाले बयान से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

एक ओर जहां पूरा जिला बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है और लगातार हो रही मौतों से आम जनता में भारी आक्रोश और खौफ का माहौल है, वहीं वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह का बयान काफी चौंकाने वाला सामने आया है. डीएम वर्षा सिंह ने इन मौतों को तकनीकी रूप से सीधे तौर पर बाढ़ जनित मौत मानने से इनकार कर दिया है. उन्होंने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि ये मौतें बाढ़ के कारण या किसी के घर में अचानक पानी घुस जाने अथवा समय पर प्रशासनिक रेस्क्यू न मिलने के कारण नहीं हुई हैं. प्रशासनिक रुख के अनुसार ये घटनाएं असावधानीवश गहरे पानी में जाने या पैर फिसलने का परिणाम हैं. हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब चारों ओर सड़कों और रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी पसरा है, तो इन मौतों को प्राकृतिक आपदा से अलग करके देखना जमीनी सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा है.

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