हाजीपुर में किसानों को सिखाई गयी प्राकृतिक खेती की तकनीक, विधायक बोले- कम लागत में बढ़ाएं उत्पादन

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फोटो | Prabhat Khabar Network

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पटेढ़ी बेलसर में जैविक और प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित। विधायक सिद्धार्थ पटेल ने किसानों को रासायनिक खाद छोड़ने की सलाह दी।

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Hajipur News : बेलसर प्रखंड क्षेत्र के बेलसर पंचायत अंतर्गत मानपुरा पंचायत भवन में मंगलवार को जैविक एवं प्राकृतिक खेती विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय विधायक सिद्धार्थ पटेल, जिला कृषि पदाधिकारी विकास कुमार, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी चंदेश्वर राय, बीडीओ प्रिया कुमारी, बीस सूत्री अध्यक्ष प्रेम कुमार निषाद और प्रखंड कृषि पदाधिकारी वीरेंद्र पासवान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.

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प्राकृतिक खेती से मिट्टी और पर्यावरण दोनों सुरक्षित

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक सिद्धार्थ पटेल ने कहा कि जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने से पर्यावरण संरक्षण के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी बनाए रखने में मदद मिलती है. उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद और उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और इसके दुष्प्रभाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है. ऐसे में स्वस्थ जीवन और बेहतर पर्यावरण के लिए किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की जरूरत है.

छोटे जोत वाले किसानों को संसाधनों के अनुरूप तकनीक अपनाने की सलाह

विधायक ने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों के पास छोटे जोत हैं. ऐसे में ड्रोन समेत कृषि विभाग की कई आधुनिक योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता है. किसानों को अपने उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप प्राकृतिक खेती की तकनीक अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन की दिशा में काम करना चाहिए. उन्होंने प्रशिक्षण में बतायी गयी तकनीकों को अपने खेतों में प्रयोग करने के लिए किसानों को प्रेरित किया.

मिट्टी जांच के बाद ही करें उर्वरक का इस्तेमाल

सिद्धार्थ पटेल ने किसानों को मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही खेतों में उर्वरक का प्रयोग करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायतें बढ़ रही हैं. ऐसे में रसायनों का इस्तेमाल कम कर सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है.

दो-तीन सीजन बाद दिखेगा प्राकृतिक खेती का असर

प्रशिक्षण के दौरान कृषि सखी ने किसानों को प्राकृतिक तरीके से तरल उर्वरक तैयार करने और खेतों में उसके प्रयोग की विधि बतायी. किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती का असर तुरंत दिखाई नहीं देता, बल्कि लगातार दो-तीन सीजन तक इसे अपनाने के बाद इसका स्पष्ट प्रभाव नजर आने लगता है. इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार के साथ खेती की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है.

बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद

कार्यक्रम में मुखिया मुकेश गुप्ता, आत्मा अध्यक्ष चंदेश्वर प्रसाद सिंह, किसान वीरेंद्र राय, मनोज कुमार सिंह, संजीत कुमार सिंह, ज्वाला पंडित, किसान सलाहकार चंदेश्वर आजाद समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे. अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से प्रशिक्षण में मिली जानकारी को खेती में अपनाने की अपील की.

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