वैशाली: एनबीपीडीसीएल द्वारा मानव बलों को हटाने के आदेश के खिलाफ बिदुपुर में गरजी इलेक्ट्रिक यूनियन; चक्का जाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी

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बैठक के दौरान कर्मी | Prabhat Khabar Network

NBPDCL के नए आदेश से 20 वर्षों से सेवा दे रहे बिजली कर्मियों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है. यूनियन ने आदेश वापस न लेने पर चक्का जाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है.

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Hajipur News: नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनबीपीडीसीएल) के अपर सचिव निरंजन देव महतो द्वारा जारी एक नए आदेश के विरोध में बिजली कर्मियों में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया है. इस तुगलकी फरमान के खिलाफ बिहार स्टेट इलेक्ट्रिक यूनियन संगठन की एक दिवसीय आपात बैठक रविवार को बिदुपुर स्टेशन रोड स्थित एक निजी हॉल में आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता ब्रजेश राय ने की, जिसमें संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सैकड़ों बिजली कर्मियों ने भाग लेकर विभागीय नीति का पुरजोर विरोध किया.

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20 वर्षों से सेवा दे रहे मानव बलों पर रोजगार का संकट

बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के उप महासचिव धर्मदेव सिंह ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि नए नियमों की आड़ लेकर बिजली विभाग में इलेक्ट्रीशियन, टेक्नीशियन और लाइनमैन के रूप में वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे संविदा व आउटसोर्स मानव बलों को बाहर का रास्ता दिखाने की सुनियोजित प्रक्रिया शुरू की जा रही है. उन्होंने रेखांकित किया कि इनमें से दर्जनों कर्मी पिछले करीब 20 वर्षों से निष्ठापूर्वक निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने में जुटे हैं. इतने लंबे कार्यानुभव के बावजूद उन्हें नियमित या समायोजित करने के बजाय अचानक नौकरी से बेदखल करने की साजिश रची जा रही है, जिससे सैकड़ों परिवारों के समक्ष भुखमरी और गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा.

दक्षिण बिहार में राहत, उत्तर बिहार के कर्मियों से सौतेला व्यवहार

यूनियन नेताओं ने विभागीय आदेश के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जारी किए गए पत्र का दायरा केवल उत्तर बिहार तक सीमित दिख रहा है, जबकि दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (एसबीपीडीसीएल) में कार्यरत मानव बलों पर इस तरह का कोई संकट नहीं है. नेताओं ने एक ही राज्य में दो अलग-अलग कंपनियों के कर्मियों के साथ हो रहे इस प्रकार के सौतेले और भेदभावपूर्ण व्यवहार पर सख्त एतराज जताया. संगठन ने पुरजोर मांग की है कि अपर सचिव द्वारा जारी इस विवादास्पद आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और वर्षों से कार्यरत सभी मानव बलों को स्थायी रूप से समायोजित करने की ठोस नीति बनाई जाए.

आदेश वापस न लेने पर चक्का जाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी

यूनियन ने विद्युत प्रबंधन और राज्य सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अनुभवी मानव बलों को हटाने की प्रक्रिया तुरंत नहीं रोकी गई, तो संगठन मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा. इसके विरोध में पूरे राज्य में चरणबद्ध आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसके तहत सड़कों पर उतरकर चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन किया जाएगा. इस आपात बैठक में मुख्य रूप से यूनियन के संरक्षक राज कुमार मिश्र, अंचल अध्यक्ष उमाशंकर साह, महताब लाल राय, राजा कुमार सहित बड़ी संख्या में बिजली कामगार और सदस्य मौजूद रहे.

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