जब पिंडदान करने गयाजी पहुंचीं महारानी अहिल्याबाई होल्कर, तब बदली विष्णुपद मंदिर की किस्मत, जानिए 600 कारीगरों ने 20 साल में कैसे रचा इतिहास

Updated:
विज्ञापन
Gayaji News

विष्णुपद मंदिर

Gayaji News: पितरों की मोक्षस्थली और सनातन आस्था के प्रमुख केंद्र गयाजी के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप महारानी अहिल्याबाई होल्कर की दूरदृष्टि और धार्मिक आस्था का परिणाम माना जाता है.

विज्ञापन

Gayaji News: (गया से नीरज कुमार की रिपोर्ट)
पितरों की मोक्षस्थली और सनातन आस्था के प्रमुख केंद्र गयाजी के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप महारानी अहिल्याबाई होल्कर की दूरदृष्टि और धार्मिक आस्था का परिणाम माना जाता है. इतिहास के अनुसार, पितरों के मोक्ष की कामना लेकर गयाजी पहुंचीं महारानी ने यहां जीर्ण-शीर्ण अवस्था में मौजूद विष्णुपद मंदिर को देखकर इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था. इसके बाद जयपुर से सैकड़ों कारीगर बुलाकर मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया गया, जो करीब दो दशक बाद पूरा हुआ.

पिंडदान के लिए आईं महारानी, मंदिर की हालत देख लिया बड़ा फैसला

इतिहासकारों के अनुसार, गयाजी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राचीन काल से रहा है. भगवान विष्णु के चरणचिह्नों वाले पवित्र स्थल पर स्थित विष्णुपद मंदिर 18वीं शताब्दी में महारानी अहिल्याबाई होल्कर के संरक्षण में नए स्वरूप में विकसित हुआ. कहा जाता है कि जब महारानी अपने पितरों के मोक्ष की कामना से गयाजी आईं, तब मंदिर काफी जर्जर अवस्था में था. तत्कालीन गयापाल तीर्थपुरोहित के आग्रह पर उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया और इसके लिए विशेष योजना तैयार कराई.

जयपुर से बुलाए गए 600 कारीगर, 20 साल तक चला निर्माण कार्य

विष्णुपद मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े जयपुर घराने के कारीगर परिवारों के वंशजों के अनुसार, महारानी अहिल्याबाई ने जयपुर से करीब 600 दक्ष शिल्पकारों को गयाजी बुलवाया था. लगभग 300 परिवारों के एक हजार से अधिक सदस्य इस अभियान का हिस्सा बने. इनमें 600 से अधिक कारीगर मंदिर निर्माण कार्य में जुटे रहे. वर्ष 1766 में शुरू हुआ यह कार्य करीब 20 वर्षों तक चला और वर्ष 1787 में लगभग 100 फीट ऊंचे भव्य विष्णुपद मंदिर का निर्माण पूरा हुआ.

सात पहाड़ों की जांच के बाद चुना गया था यह खास पत्थर

मंदिर निर्माण से पहले महारानी अहिल्याबाई ने जिले के कई पहाड़ों और वहां उपलब्ध पत्थरों की गुणवत्ता की जांच कराई थी. बथानी क्षेत्र के तिलासन, बजना, परजीत, तमड़ा, हंसराज, उरडिया और राल पहाड़ों के पत्थरों का परीक्षण किया गया. अंततः मजबूती और टिकाऊपन को देखते हुए पत्थरकट्टी क्षेत्र के काले ग्रेनाइट पत्थर का चयन किया गया. इसी पत्थर से आज का भव्य विष्णुपद मंदिर तैयार किया गया.

बिना मशीनों के बना था मंदिर, बैलगाड़ियों से ढोए गए विशाल पत्थर

उस दौर में आधुनिक मशीनों का कोई अस्तित्व नहीं था. कारीगर छेनी, हथौड़ी और लोहे के औजारों की मदद से विशाल चट्टानों को काटते थे. पत्थरों को बैलगाड़ियों और घोड़ा गाड़ियों के जरिए पत्थरकट्टी से विष्णुपद मंदिर तक लाया जाता था. मिट्टी के ढलान और लकड़ी के बेलनों की सहायता से भारी पत्थरों को मंदिर की ऊंचाई तक पहुंचाया जाता था. विशेष मसालों और पारंपरिक तकनीकों से इन पत्थरों को जोड़ा गया, जिससे यह संरचना आज भी मजबूती से खड़ी है.

कारीगरों के रहने-खाने से लेकर मेहनताना तक का रखा गया पूरा ध्यान

महारानी अहिल्याबाई ने मंदिर निर्माण में जुटे कारीगरों के लिए विशेष व्यवस्था कराई थी. टिकारी महाराज के सहयोग से अतरी प्रखंड के पत्थरकट्टी क्षेत्र में उनके रहने, खाने और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कई कारीगर परिवारों को उपहार स्वरूप वहीं स्थायी रूप से बसने की सुविधा भी दी गई.

डकैती और असुरक्षा ने उजाड़ दी कारीगरों की बस्ती

मंदिर निर्माण के बाद अधिकांश कारीगर परिवार पत्थरकट्टी में बस गए और पत्थरों से घरेलू उपयोग की वस्तुएं तथा मूर्तियां बनाकर जीवनयापन करने लगे. लेकिन 19वीं शताब्दी में क्षेत्र में बढ़ी डकैती और लूटपाट की घटनाओं के कारण 90 प्रतिशत से अधिक कारीगर परिवार वापस जयपुर लौट गए. हालांकि कुछ परिवार आज भी पत्थरकट्टी और गयाजी में रहकर अपने पूर्वजों की कला परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

कारीगरों को बचाने के लिए खोला गया प्रशिक्षण केंद्र, हजारों ने सीखी मूर्तिकला

कारीगरों के पलायन को रोकने के लिए सरकार ने पत्थरकट्टी में मूर्ति प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की थी. यहां जयपुर से आए अनुभवी शिल्पकारों ने विभिन्न वर्गों के लोगों को मूर्तिकला का प्रशिक्षण दिया. इस केंद्र से दो हजार से अधिक लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, हालांकि समय के साथ यह व्यवस्था भी बंद हो गई.

गयाजी प्रवास के दौरान तीर्थपुरोहितों के आतिथ्य में ठहरती थीं महारानी

इतिहासकारों के अनुसार, गयाजी प्रवास के दौरान महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्थानीय तीर्थपुरोहितों और धर्माधिकारियों के यहां ठहरती थीं. विष्णुपद मंदिर निर्माण में पंडा समाज की महत्वपूर्ण भूमिका थी, इसलिए उनके साथ महारानी का विशेष संबंध रहा. उनके प्रवास की अधिकांश व्यवस्थाएं भी इन्हीं परिवारों के सहयोग से संचालित होती थीं.

काशी से केदारनाथ तक बनवाईं धर्मस्थल

31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चोंडी गांव में जन्मीं महारानी अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की सबसे सम्मानित शासकों में गिनी जाती हैं. उन्होंने 1767 से 1795 तक मालवा राज्य का सफल नेतृत्व किया. उनके शासनकाल में काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण सहित अयोध्या, मथुरा, बद्रीनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम और गयाजी जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों का विकास हुआ. प्रजा की भलाई, न्याय व्यवस्था और सनातन धर्म के संरक्षण के लिए समर्पित उनका जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत माना जाता है. 13 अगस्त 1795 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके द्वारा निर्मित धार्मिक धरोहरें आज भी उनकी विरासत को जीवित रखे हुए हैं.

Also Read: अहिल्याबाई जयंती विशेष: 21 साल, 600 कारीगर और मिट्टी का रैंप, जानिए 18वीं सदी में कैसे बना था विश्व प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर

विज्ञापन
साक्षी कुमारी

लेखक के बारे में

By साक्षी कुमारी

साक्षी पत्रकारिता और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में उनकी विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. साक्षी सीवान की रहने वाली हैं. उन्होंने गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, जनसंचार और समाचार लेखन की बारीकियों का अध्ययन किया. स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद भी उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखी और वर्तमान में नौकरी के साथ-साथ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रही हैं.

पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप के दौरान फील्ड रिपोर्टिंग, समाचार संकलन और ग्राउंड रिपोर्टिंग की व्यावहारिक समझ विकसित की. इस दौरान उन्होंने समाचारों के विभिन्न पहलुओं को नजदीक से समझा और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से सीखा.

इसके बाद उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. जहां करीब तीन वर्षों तक डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहीं. इस दौरान उन्होंने राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण खबरों पर काम किया. News4Nation में कार्यरत रहते हुए उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की विस्तृत कवरेज की. चुनावी राजनीति, मतदाताओं के व्यवहार, राजनीतिक रणनीतियों और जमीनी मुद्दों को करीब से समझने का अवसर मिला. इस अनुभव ने उन्हें राजनीतिक खबरों को अधिक सटीकता, तथ्यों और विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करने की विशेषज्ञता प्रदान की.

वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति, प्रशासनिक गतिविधियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी समझ है, जिसके अनुरूप वह खबरों को इस प्रकार तैयार करती हैं कि वे पाठकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचें और खोज इंजन में बेहतर प्रदर्शन करें. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, उसकी त्वरित कवरेज और कम समय में सटीक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है.

साक्षी किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं. वह विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद ही खबरों को प्रकाशित करती हैं, जिससे उनकी रिपोर्टिंग में सटीकता और विश्वसनीयता बनी रहती है. न्यूजरूम में डेटा विश्लेषण, ट्रेंड मॉनिटरिंग और पाठकों की रुचि के आधार पर सर्वे एवं रिसर्च-आधारित खबरें तैयार करने में भी उन्हें बखूबी आता है.

निरंतर सीखने और बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ स्वयं को अपडेट रखने की उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक बेहतर डिजिटल पत्रकार बनने के लिए प्रेरित करती है. तथ्यपरक, निष्पक्ष और भरोसेमंद पत्रकारिता में विश्वास रखने वाली साक्षी पाठकों तक गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन