देश सेवा को 95 सैन्य अधिकारी समर्पित

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गया : अफसर ट्रेनिंग एकेडमी (आेटीए) में शनिवार की सुबह 16वीं पासिंग आउट परेड व पिपिंग सेरेमनी संपन्न हुआ. इस दाैरान देश सेवा के लिए आेटीए ने 95 नये सैन्य अधिकारी काे समर्पित किया. इस दाैरान परेड ग्राउंड पर कैडेट्स काे संबाेधित करते हुए मुख्य अतिथि (मुख्य निरीक्षी अधिकारी) वियतनाम पिपुल्स आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल […]

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गया : अफसर ट्रेनिंग एकेडमी (आेटीए) में शनिवार की सुबह 16वीं पासिंग आउट परेड व पिपिंग सेरेमनी संपन्न हुआ. इस दाैरान देश सेवा के लिए आेटीए ने 95 नये सैन्य अधिकारी काे समर्पित किया.

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इस दाैरान परेड ग्राउंड पर कैडेट्स काे संबाेधित करते हुए मुख्य अतिथि (मुख्य निरीक्षी अधिकारी) वियतनाम पिपुल्स आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल न्गाें मिंह तिएन ने कैडेट्स के बेहतर ड्रिल प्रदर्शन के लिए बधाई दी. उन्हाेंने उनके गाैरवशाली भविष्य की कामना की आैर कहा कि देश सेवा के लिए सैन्य अधिकारी बन कर जा रहे कैडेट्स के माता-पिता व अभिभावक भी धन्यवाद के पात्र हैं, जिन्हाेंने अपने बच्चाें में देश प्रेम व समर्पण का जज्बा भरा.
उन्हाेंने कहा सैनिकाें काे अपने जीवन में सैन्य गुण व सद्भाव काे आत्मसात करना चाहिए. उन्होंने भारतीय सेना में दी जानेवाली ट्रेनिंग की सराहना की आैर कहा कि दुनिया में यहां बेहतर सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है. भारत के साथ वियतनाम के बेहतर संबंध हैं. वियतनाम के विकास में भारत की अहम भूमिका है. उन्हाेंने कहा आर्मी देश का बैक बाेन(रीढ़ की हड्डी) है.
पास आउट सैन्य अधिकारियों में तीन बक्सर, सीवान व सारण के
सीवान से डीएवी में 10वीं तक पढ़ाई के बाद पटना डीएवी से 11वीं व 12वीं की पढ़ाई की. यहीं से बीएससी की पढ़ाई पूरी कर इंडियन आर्मी के लिए परीक्षा दी आैर क्वालिफाइ हाेने के बाद टीइएस व मिलिट्री कॉलेज अॉफ इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी कर आज अफसर बना. मेरे पिता अशाेक कुमार सिन्हा सीवान सिविल काेर्ट में अधिवक्ता हैं. मां सीमा कुमारी घरेलू महिला हैं. एक छाेटा भाई है, जिसने स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली है.
तन्मय अशाेक,श्रीनगर मुहल्ला, सीवान
पिताजी अशाेक कुमार श्रीवास्तव आर्मी में ही नायब सूबेदार थे. उन्हाेंने मुझे देश सेवा के लिए प्रेरित किया. मेरी दाे आैर बहने हैं. इकलाैता बेटा हाेने के बाद भी इंडियन आर्मी काे ही चुना, इसलिए कि देशप्रेम से बड़ा कुछ भी नहीं. पिताजी के आर्मी में हाेने की वजह से हमेशा बाहर ही रहा. चार-पांच वर्षाें तक ही गांव में रहा हूं. अब गांव जाऊंगा. मां विभा देवी घरेलू महिला हैं. चाचा बक्सर काेर्ट में ही एडवाेकेट हैं.
अमन कुमार श्रीवास्तव, सिविल लाइन, राजपुर, सिमरी, बक्सर
चार साल का सपना आज साकार हुआ. लगन व कड़ी मेहनत के बल पर सफलता पायी. पिताजी धुरेंद्र मांझी नेवी से साेल्जर से रिटायर्ड हुए आैर फिलहाल दिल्ली मेट्राे में कार्यरत हैं. मेरी सफलता के पीछे पिताजी के साथ बड़े भाई अंकित कुमार का विशेष सहयाेग है. मां विद्यावती देवी ने भी काफी प्रेरित किया. देश सेवा का अवसर मिला है, हर माैके पर सफल हाेकर दिखाऊंगा.
अमित कुमार, लस्करीपुर, जनता बाजार, थाना-एकमा, सारण
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