करोड़ों का लोन लेकर डिफाॅल्टर होना बना गले की फांस

Updated at : 04 Jul 2019 9:12 AM (IST)
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करोड़ों का लोन लेकर डिफाॅल्टर होना बना गले की फांस

गया : अल्प समय में शहर के कारोबार में अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराने वाले व्यवसायी अखौरी गोपाल के आवास सहित कई ठिकानों पर मंगलवार को सीबीआइ व आइटी की टीम ने छापेमारी की थी. बुधवार को यह छापेमारी शहर में चर्चा का विषय बना रहा. लोगों के बीच इस बात की चर्चा होती रही […]

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गया : अल्प समय में शहर के कारोबार में अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराने वाले व्यवसायी अखौरी गोपाल के आवास सहित कई ठिकानों पर मंगलवार को सीबीआइ व आइटी की टीम ने छापेमारी की थी. बुधवार को यह छापेमारी शहर में चर्चा का विषय बना रहा. लोगों के बीच इस बात की चर्चा होती रही कि बैंकों से कारोबार के नाम पर लोन लेकर किस तरह से उसका दुरुपयोग किया जाता है, इसका उदाहरण तो अपने ही शहर में मौजूद है.

लोग इसकी पड़ताल करने में भी जुटे रहे कि इस मामले में किसी की गिरफ्तारी तो नहीं हुई है? वैसे, सीबीआइ द्वारा की गयी छापेमारी के मूल में यह बात सामने आ रही है कि कारोबार के नाम पर विभिन्न बैंकों से लिये गये कर्ज को निजी सुख-सुविधा में उपयोग किया गया और बैंकों को उनके रुपये नहीं चुकता किये गये.
साथ ही, बैंकों को अंधेरे में रख कर मनी लौंड्रिंग का भी खेल खेले जाने की खबर है. इसके अलावा इस सारे काम में शहर के एक सीए की भी भूमिका अहम बतायी जा रही है. सूत्रों का कहना है कि गुजरात में भी बड़े पैमाने पर चोरी-छिपे कारोबार इनके द्वारा किया जा रहा है, जिसका कहीं कोई लेख-जोखा प्रस्तुत नहीं किया गया है.
बैंकों से डिफाॅल्टर होने के बाद आये शक के घेरे में
गया एयरपोर्ट के पास पांच सितारा होटल बनाने के नाम पर बैंकों से लिया गये करोड़ों रुपये के कर्ज व करीब 10 वर्ष से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी होटल का निर्माण नहीं किये जाने और बैंकों को उनके पैसे भी नहीं लौटाने के कारण अखौरी गोपाल को डिफाॅल्टर घोषित कर दिया गया.
इसी कड़ी में एयरपोर्ट के पास स्थित रामानंदी मोटर के नाम से रहे भवन का बैंकों द्वारा अधिग्रहण कर उसे नीलाम कर दिया गया. इसके बाद भी कई बैंकों के रुपये चुकता करने में सुस्ती बरती जा रही थी.
बहरहाल, कारोबार के नाम पर बैंकों से करोड़ों रुपये का कर्ज लेकर उसे चुकता नहीं किये जाने के कारण डिफॉल्टरों की सूची में अखौरी गोपाल का नाम आ गया व बैंकों के रुपये को निजी व दूसरे कारोबार में समायोजित किये जाने की सूचना पर ही सीबीआइ व आइटी की छापेमारी हुई. अब विभिन्न ठिकानों से जब्त किये गये कागजात की जांच-पड़ताल के बाद ही मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है. फिलहाल इस छापेमारी से जुड़े अधिकारी कुछ भी बताने से परहेज कर रहे हैं व फिलहाल जांच-पड़ताल की बात कही जा रही है.
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