परिवार नियोजन में ''अंतरा'' व ''छाया'' कारगर
Updated at : 07 Jun 2019 9:05 AM (IST)
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गया : गर्भ निरोधक साधनों के इस्तेमाल में गति लाने के लिए सरकार द्वारा दो नवीन गर्भ निरोधक अंतरा व छाया की शुरुआत की गयी है. सामुदायिक स्तर पर इसके अधिकतम इस्तेमाल को सुनिश्चित कराने के लिए दोनों नवीन साधनों को जिले के प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया है. इससे परिवार नियोजन […]
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गया : गर्भ निरोधक साधनों के इस्तेमाल में गति लाने के लिए सरकार द्वारा दो नवीन गर्भ निरोधक अंतरा व छाया की शुरुआत की गयी है. सामुदायिक स्तर पर इसके अधिकतम इस्तेमाल को सुनिश्चित कराने के लिए दोनों नवीन साधनों को जिले के प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया है.
इससे परिवार नियोजन साधनों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी के साथ लोगों का इसके प्रति रुझान भी देखा जा रहा है. जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि जिले में अंतरा व छाया की शुरुआत होने से महिलाओं द्वारा गर्भ निरोधक साधनों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी हुई है. प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक 8877 महिलाओं को अंतरा इंजेक्शन का कुल डोज प्राप्त हुआ है.
इसमें सर्वाधिक शेरघाटी ब्लॉक में महिलाओं ने अंतरा के प्रति रुझान दिखाया है. यहां 682 महिलाओं ने अंतरा का इंजेक्शन लगवाया है. वही अप्रैल 2019 में 1063 महिलाओं को अंतरा इंजेक्शन का कुल डोज भेजा गया. इसमें सर्वाधिक टेकारी ब्लॉक में महिलाओं ने अंतरा के प्रति रुझान दिखाया है. साथ ही सामुदायिक स्तर पर इसके विषय में अधिक से अधिक महिलाओं को जागरूक करने के लिए आशा व एएनएम को जिम्मेदारी दी गयी है.
प्रजनन दर में कमी है जरूरी : सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे-2016 के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.3 है. जिसका अर्थ है कि राज्य में प्रति महिला बच्चों की संख्या 3.3 है. इस लिहाज से राज्य के प्रजनन दर में कमी लाना जरुरी है. इसमें कमी आने से प्रजनन स्वास्थ्य बेहतर होगा व जनसंख्या स्थिरीकरण के साथ मातृ मृत्यु दर कम करने में प्रभावी साबित होगा.
गर्भ निरोधक का इस्तेमाल नसबंदी से आसान : नसबंदी की तुलना में गर्भ निरोधक साधनों का उपयोग आसान व एक हद तक कुल प्रजनन दर को नियंत्रित करने वाला भी होता है. इसे नव दंपती की जागरूकता व सही जानकारी के सहारे आसानी से सुनिश्चित किया जा सकता है. पहले बच्चे के जन्म के बाद दूसरे बच्चे में लगभग दो सालों का अंतराल माता के बेहतर स्वास्थ्य के साथ शिशु के उत्तम स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना जाता है. इस अंतराल में माता का शरीर दोबारा मां बनने के लिए तैयार होता है
क्या कहते हैं आंकड़े : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-चार के अनुसार, गया जिले में 16 से 49 साल के आयु वर्ग की 33.8 प्रतिशत महिलाएं ही किसी सामान्य या नवीन गर्भ निरोधक साधन का इस्तेमाल करती हैं. जबकि, केवल 0.5 प्रतिशत महिलाओं द्वारा ही किसी गर्भ निरोधक गोली का इस्तेमाल किया जा रहा है.
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