10 हजार लाइटों के बाद भी शहर में कायम है अंधेरा

Published at :29 Jul 2017 4:47 AM (IST)
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10 हजार लाइटों के बाद भी शहर में कायम है अंधेरा

कुव्यवस्था. पितृपक्ष में खुलेगी लापरवाही की कलई ! गया में देश व विदेश से पिंडदानी व तीर्थयात्री पहुंचते हैं. साथ ही गया से ही बोधगया के लिए भी तीर्थयात्री आते-जाते हैं. इतना महत्वपूर्ण शहर होने के बाद भी यहां लाइट की व्यवस्था पूरी निगम की कलई खोलती नजर आ रही है. शहर में जगह-जगह विभिन्न […]

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कुव्यवस्था. पितृपक्ष में खुलेगी लापरवाही की कलई !

गया में देश व विदेश से पिंडदानी व तीर्थयात्री पहुंचते हैं. साथ ही गया से ही बोधगया के लिए भी तीर्थयात्री आते-जाते हैं. इतना महत्वपूर्ण शहर होने के बाद भी यहां लाइट की व्यवस्था पूरी निगम की कलई खोलती नजर आ रही है. शहर में जगह-जगह विभिन्न तरह की लाइटें लगायी गयी हैं. इनकी संख्या करीब 10 हजार है. इनमें सोडियम, एलइडी, सीएफएल व हाइ मास्ट लाइटें मुख्य रूप से शामिल हैं. निगम इनके रखरखाव के नाम पर 60 लाख रुपये सालाना खर्च भी करता है.
इन सबके बावजूद शाम होते ही शहर में अंधेरा कायम होने लगता है.
गया : नगर निगम व अन्य दो एजेंसियों के माध्यम से शहरी क्षेत्र में 10 हजार से अधिक लाइटें लगायी गयी हैं. बावजूद इसके शहर के कई इलाके अंधेरे में डूबे रहते हैं. वहीं, शहर के कई मुहल्ले अंधेरे में डूबे रहने को अभिशप्त हैं
.
नगर निगम के 50.56 वर्ग किमी. क्षेत्रफल वाले शहर में अब तक लगी लाइटें काफी कम पड़ रही हैं. शहर के कई मुख्य मार्ग व लिंक रोड पर शाम होते ही अंधेरा छा जाता है. इसमें मेडिकल वाली रोड, गया कॉलेज रोड, जयप्रकाश झरना से खलिस पार्क के बीच की सड़क आदि शामिल हैं. गौरतलब है कि जयप्रकाश झरना से खलिस पार्क जाने वाले रोड में प्रमंडलीय आयुक्त का आवास भी है. अंधेरे का फायदा उठाकर लोगों के साथ छिनतई, लूट व महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार का मामला भी सामने आते रहता है.
अपराधी भी लाइट न होने का फायदा उठाने में कोई कोर-कसर नहीं
छोड़ते. अंधेरे के कारण रात में
हादसों की आशंका ज्यादा ही बढ़ जाती है.
जल्द सुधरेगी
लाइटों की व्यवस्था
निगम के सभी वार्डों में लाइट व्यवस्था सुधारने के लिए संबंधित अधिकारी को निर्देश दे दिया गया है. ब्रेडा एजेंसी के अधिकारी ने एक सप्ताह में लाइट सुधारने का आश्वासन दिया है. जिन जगहों पर लाइट की कमी है,वहां जल्द ही निगम से खरीदारी कर लाइटें लगायी जायेगी. पितृपक्ष से पहले लाइटिंग व्यवस्था सुधार ली जायेगी.
वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, मेयर
क्यों, तीन संस्थाओं से
लगायी गयीं लाइटें
शहर में ब्रेडा के माध्यम से विभिन्न जगहों पर 100 लाइटें लगाने की स्वीकृति निगम बोर्ड से सात जनवरी 2015 को मिली. इसके साथ ही बोर्ड की स्वीकृति पर ही बुडको से 403 लाइटें निगम क्षेत्र में लगायी गयी है. दोनों ही एजेंसी बिहार सरकार की है. रखरखाव में हो रही परेशानी को देखते हुए निगम ने अन्य लाइटें टेंडर निकाल कर खरीदारी की. इसके साथ ही निगम के माध्यम से लगायी गयी लाइटों की मरम्मती की जिम्मेवारी नगर निगम अपने माध्यम से संभाल रहा है.
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