सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी के खिलाफ छात्राएं हुईं मुखर

गया: सैनिटरी नैपकिन (पैड)पर केंद्र सरकार द्वारा 20 प्रतिशत जीएसटी लगाये जाने के विरोध में छात्राओं ने पुरजोर तरीके से आवाज उठानी शुरू कर दी है. इस मसले पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने मंगलवार की दोपहर बैठक कर विरोध की रणनीति बना केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को पोस्टकार्ड भेज कर आपत्ति जतायी. छात्राओं का […]
शेष महिलाएं पारंपरिक तौर-तरीकों से काम चलाती हैं. जीएसटी प्रभावी होने से सैनिटरी नैपकिन पहले की अपेक्षा अधिक महंगा हो जायेगा. ऐसे में महिलाएं उससे दूरी बनायेंगी और पारंपरिक तौर-तरीकों की ओर रुझान बढ़ेगा, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा. छात्राओं का कहना है कि गरीब घरों से ताल्लुक रखनेवाली लड़कियां मासिक धर्म के दौरान स्कूल जाना छोड़ देती हैं. इसकी वजह उनके अभिभावकों के पास नैपकिन खरीदने के लिए पैसे की कमी होती है. नैपकिन पर जीएसटी लागू रहा, तो वह उनकी पहुंच से और दूर हो जायेगा. नैपकिन महंगा हो जायेगा, जिसे खरीदना हर एक के वश की बात नहीं होगी. छात्राएं जैसे-तैसे अपना काम चलाने को विवश होंगी.
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