दरभंगा के ऐतिहासिक पोखरों पर संकट, प्रदूषण और अतिक्रमण के खिलाफ तेज हुई लड़ाई
बैठक में शामिल लोग| Prabhat Khabar Network
दरभंगा के ऐतिहासिक गंगासागर, दिग्घी और हराही पोखर को बचाने की मांग तेज हो गई है. बैठक में प्रदूषित पानी रोकने, अतिक्रमण हटाने, आरसीसी पिलर से सीमांकन और सौंदर्यीकरण से पहले गाद हटाने की मांग उठाई गई.
दरभंगा पोखर सौंदर्यीकरण: शहर के ऐतिहासिक गंगासागर, दिग्घी और हराही पोखर को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने की मांग तेज हो गई है. थोक मछली मंडी, गंगासागर में मत्स्यजीवी समाज के साथ तालाब बचाओ अभियान की बैठक हुई. बैठक में पोखरों के पानी में प्रदूषण, लगातार हो रहे अतिक्रमण और संरक्षण के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई. सहनी समाज ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे और तेज करने का अनुरोध किया.
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बैठक की अध्यक्षता राजेश सहनी ने की. इस दौरान तीनों ऐतिहासिक पोखरों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए. लोगों ने पोखरों के वास्तविक रकबे का चारों दिशाओं में सीमांकन कर उसे सार्वजनिक करने की मांग की.
आरसीसी पिलर और पेड़ लगाकर हो सीमांकन
बैठक में सुझाव दिया गया कि गंगासागर, दिग्घी और हराही पोखर की जमीन का पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा में स्पष्ट सीमांकन कराया जाए. सीमांकन को स्थायी बनाने के लिए पेड़ लगाए जाएं या आरसीसी पिलर गाड़े जाएं, ताकि भविष्य में पोखरों की जमीन पर अतिक्रमण की गुंजाइश कम हो सके.
लोगों ने कहा कि ऐतिहासिक जलाशयों को बचाने के लिए केवल अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है. उनकी सीमा को स्पष्ट और सार्वजनिक करना भी जरूरी है.
जहरीले पानी से प्रदूषित हो रहे पोखर, मछलियों के मरने का आरोप
बैठक में आरोप लगाया गया कि गंगासागर और दिग्घी पोखर में निजी अस्पतालों का प्रदूषित पानी गिराया जा रहा है. इससे पोखरों का पानी दूषित हो रहा है और मछलियों के मरने की समस्या सामने आ रही है. इस पर अविलंब रोक लगाने की मांग की गई.
बैठक में यह भी कहा गया कि गंगासागर पोखर में एक एजेंसी की ओर से पिछले 35-40 वर्षों से गंदा पानी गिराया जा रहा है. इस पानी में मोबिल और अन्य तरह के केमिकल होने की बात कही गई. एजेंसी पर प्लास्टिक कचरा भी पोखर में फेंकने का आरोप लगाया गया.
सर्विस सेंटर के पानी और गाद पर भी उठे सवाल
दिग्घी पोखर के किनारे स्थित वाहन सर्विस सेंटर से निकलने वाले प्रदूषित पानी के पोखर में जाने पर भी रोक लगाने की मांग की गई. बैठक में कहा गया कि दोनों सर्विस सेंटर से होने वाले प्रदूषण पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए.
तीनों पोखरों में करीब 5-6 फीट तक गाद जमा होने की बात भी सामने आई. लोगों ने कहा कि सौंदर्यीकरण से पहले पोखरों की गाद हटाई जाए. साथ ही बाहर से मिट्टी डालने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से जलाशयों का संरक्षण किया जाए.
अनार पोखर मामले में डीएम को पत्र
तालाब बचाओ अभियान ने डीएम को पत्र लिखकर सिधौली पंचायत के अनार पोखर पर कथित कब्जे और हकियत वाद संख्या 204/2021 में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया है. अभियान के अनुसार पोखर का रकबा 5 एकड़ 72 डिसमिल है और मामला लंबे समय से लंबित है.
पत्र में कहा गया है कि रिविजनल सर्वे के दौरान पोखर की जमीन को गैरकानूनी तरीके से निजी नाम पर दर्ज कराने का आरोप है. संबंधित जमाबंदी को 14 जनवरी 2014 को रद्द किए जाने के बाद निजी नाम हटाने की कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया था. इसके बाद वर्ष 2021 में हकियत वाद दायर हुआ.
मामले में करीब 32 बार हुई सुनवाई
तालाब बचाओ अभियान के अनुसार 12 जुलाई 2021 से 12 मई 2026 के बीच मामले की करीब 32 बार सुनवाई हुई, लेकिन आवश्यक तथ्य और दस्तावेज समय पर न्यायालय में उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण मामला लंबित है. अभियान ने डीएम से तत्काल रिसीवर बहाल करने और संबंधित सरकारी अधिवक्ता व सीओ को मामले में तेजी से कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है.
बैठक में रामबाबू सहनी, राज किशोर सहनी, बुधन सहनी, राकेश कुमार, मनोज कुमार सहनी, विमल कुमार सहनी, लालबाबू सहनी, रामचंद्र सहनी, चंदन कुमार, शिव कुमार सहनी, राजा सहनी, इंदिरा कुमारी, तसीम नवाब और नारायण जी चौधरी समेत अन्य लोग मौजूद थे.
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