मौलिक, तथ्यपरक और भाषिक रूप से शुद्ध लेखन ही साहित्य की पहचान

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लोकार्पण समारोह में विचार व्यक्त करते प्रो.भीम नाथ झा व मंचासीन विभागीय प्राध्यापक | Prabhat Khabar Network

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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी मैथिली विभाग में प्रो. अरुण कुमार कर्ण की पुस्तक 'अनुशीलन' का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया. इस अवसर पर साहित्यकारों और शिक्षकों ने पुस्तक की विषयवस्तु और साहित्यिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की.

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Darbhanga News: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (लनामिवि) के पीजी मैथिली विभाग एवं विद्यापति पीठ की ओर से गुरुवार को विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार कर्ण की पुस्तक 'अनुशीलन' का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम में साहित्यकारों और शिक्षकों ने पुस्तक की विषयवस्तु तथा साहित्यिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की.

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उत्कृष्ट लेखन के लिए अध्ययन और चिंतन जरूरी

समारोह की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार डॉ. भीमनाथ झा ने कहा कि पीजी मैथिली विभाग प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की सशक्त परंपरा का केंद्र रहा है. यहां से निकले अनेक विद्यार्थी आज मैथिली भाषा और साहित्य के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर हैं.

उन्होंने कहा कि लेखन सदैव मौलिक, तथ्यपरक और गंभीर चिंतन पर आधारित होना चाहिए. लेखक के विचार उसकी बौद्धिक साधना का परिचायक होते हैं. उत्कृष्ट लेखन के लिए निरंतर अध्ययन, मनन और मंथन आवश्यक है. उन्होंने विद्यार्थियों से केवल परीक्षा और नौकरी तक सीमित न रहकर मैथिली भाषा एवं साहित्य के संरक्षण और विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. साथ ही वाक्य-विन्यास और भाषिक शुद्धता को श्रेष्ठ लेखन की आधारशिला बताया.

पुस्तक की समीक्षात्मक दृष्टि की सराहना

पुस्तक पर चर्चा करते हुए प्रो. रमण झा ने समीक्षा विधा को साहित्य की महत्वपूर्ण विधा बताया. डॉ. अरविंद कुमार सिंह झा ने 'अनुशीलन' को गंभीर आलोचनात्मक और नवदृष्टि से संपन्न कृति बताया. वहीं प्रो. रमेश झा ने पुस्तक की सराहना करते हुए प्रो. अरुण कुमार कर्ण से भविष्य में भी ऐसी उत्कृष्ट कृतियों के सृजन की अपेक्षा जताई.

बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में राजनाथ पंडित, शिवम कुमार झा, मनोज कुमार पंडित, अंबालिका कुमारी, शीला कुमारी, मनीष कुमार, नेहा कुमारी, मिथिलेश कुमार सहनी, राहुल राज गुप्ता, पवन कुमार महतो, प्रवीण कुमार, प्रियंका कुमारी सहित अनेक शोधार्थी उपस्थित रहे. इसके अलावा अपर्णा कुमारी, आदित्य आनंद, देव आनंद, नीक्कू कुमार और नरेश पंडित भी कार्यक्रम में मौजूद थे.

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुरेश पासवान ने किया, जबकि पुस्तक के लेखक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार कर्ण ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया.


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