प्रदर्शनी में छलकी छात्रों की वैज्ञानिक दृष्टि
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Dec 2015 7:32 PM
प्रदर्शनी में छलकी छात्रों की वैज्ञानिक दृष्टिइंजीनियरिंग कॉलेज में मना वार्षिकोत्सवआर्ट गैलरी में छलका कला बोधफोटो संख्या-13 परिचय- कार्यक्रम का दीप जला उद्घाटन करते प्रमंडलीय आयुक्त आरके खंडेलवाल, आइजी अमित कुमार जैन व अन्य फोटो संख्या- 14परिचय- उपस्थित लोग फोटो संख्या- 15परिचय- छात्रों द्वारा बनाया गया मॉडल दरभंगा . दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का सातवां […]
प्रदर्शनी में छलकी छात्रों की वैज्ञानिक दृष्टिइंजीनियरिंग कॉलेज में मना वार्षिकोत्सवआर्ट गैलरी में छलका कला बोधफोटो संख्या-13 परिचय- कार्यक्रम का दीप जला उद्घाटन करते प्रमंडलीय आयुक्त आरके खंडेलवाल, आइजी अमित कुमार जैन व अन्य फोटो संख्या- 14परिचय- उपस्थित लोग फोटो संख्या- 15परिचय- छात्रों द्वारा बनाया गया मॉडल दरभंगा . दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का सातवां वार्षिकोत्सव कार्यक्रम बुधवार को कॉलेज परिसर में धूमधाम के साथ मनाया गया. इस अवसर पर आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का उद्घाटन मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दरभंगा के प्रमंडलीय आयुक्त आरके खंडेलवाल ने कहा कि छात्रों को उसी विषय की पढ़ाई करनी चाहिए जिससे उसे प्यार हो. वैसे पढ़ाई की जरूरत नहीं है जो उबाऊ हो. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में पढ़ाई पूरी कर अधिकारी या कर्मचारी जो बने उससे बड़ी बात है कि वो मानव जरूर बने. आज के युग में अधिकारियों मेंं मानवीय संवेदना होना आवश्यक है. वहीं उन्होंने कॉलेज के फैकल्टी मंेबर को इंगित करते हुए छात्रों से कहा कि आज गुरु-शिष्य परंपरा युग होती जा रही है. उसे लागू करने की जरूरत है. कॉलेज प्रशासन एवं हॉस्टल वार्डेन जबतक मिलकर छात्रों को सहयोग करने की सामंजस्यता नही ंहोगी तबतक बच्चों को अच्छे नागरिक बनाने में पूर्ण सफलता नहीं मिल सकती है. श्री खंडेलवाल ने बच्चों केा टेक्ट्सबुक के सहारे अधिकांश पढ़ाई करने एवं स्वाध्याय पर ध्यान देने की नसीहत दी. दरभंगा प्रमंडल के आइजी अमित जैन ने कहा कि जबतक छात्रों के सार्वजनिक क्षेत्रों में व्यक्तित्व विकसित नही ंहोगी, तबतक सफलता मिलना कठिन होगा. इसके लिए उन्होंने जूबान, जुगार और जुनून को आवश्यक बताया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लनामिवि के कुलपति प्रो साकेत कुशवाहा ने कहा कि दुनिया का कोई काम ऐसा नहीं है, जिसे मनुष्य नहीं कर सकता है. नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो… . दोहा को समझाते हुए कुलपति ने कहा कि अपने पढ़ाई के दौरान अपने गुरु से कुछ न कुछ विशेष काम जरूर सीख लेना चाहिए. विशेषता के लिए विषय चुन लें पूरा करने के लिए योजना बनावें तथा उसे कार्यान्वित करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी. स्पर्धाके दौड़ में जबतक कुछ न कुछ विशेषता आपमें नहीं होगी, तबतक मंजिल मिलना कठिन होगा. प्रो कुशवाहा ने कहा कि बच्चों को अपने माता-पिता के बातों को कभी भी अनुसूना नहीं करना चाहिए. उनकी कही बातों पर अपने गुरु से चर्चा कर उसे कार्यान्वित करें. वहीं गुरु को भी अपने छात्रों को ज्ञान देने में कमी नहीं करनी चाहिए. महाविद्यालय के संस्थापक वीसी झा ने कहा कि इसकी स्थापना उस जमाने में मैने किया था जब दरभंगा, मिथिला एवं कोशी प्रमंडल में एक भी अभियंत्रणा महाविद्यालय इस क्षेत्र में नहीं था और इस क्षेत्र के अधिकांश लोगों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी जो पढ़ाई के लिए बाहर जा पाते. उन्होंने कहा कि 76 संस्थानों को जन्म दिया और सभी चल रही है. उम्र अधिक होने के कारण कई संस्थान सरकार के हवाले कर चुका हूं. कॉलेज के प्रधानाचार्य असीम कुमार ठाकुर ने अपने कार्यकाल के दौरान किये गये कॉलेज के विकास की बात रखी एवं इसके गेट पर स्पीट ब्रेकर बनवाने व कॉलेज में साइंस टेक्नोलॉजी पार्क बनवाने की योजना पर चर्चा की. साथ ही उन्होंने आगत अतिथियों का मिथिला परंपरानुसार एवं मिथिला पेंटिंग भेंट करते हुए स्वागत किया. कार्यक्रम के दौरान कॉलज की पत्रिका ‘ग्रेविटी’ का लोकार्पण अतिथियों ने किया. वहीं धन्यवाद ज्ञापन परीक्षा नियंत्रक डॉ ठाकुर संजय कुमार ने किया. कार्यक्रम की शुरूआत छात्राओं की ओर से स्वागत गान एवं सरस्वती वंदना से की गयी. अतिथियों को इससे पूर्व छात्रों की ओर से शिक्षकों से प्रेरणा प्राप्त कर लगायी गयी आर्ट गैलरी एवं विज्ञान प्रदर्शनी का भी फीता काटकर उद्घाटन किया गया. इसमें नीतीश, कुणाल, अभिषेक, पंकज की ओर से बनायी गयी हाइड्रोलिक ब्रीज मॉडल तथा रविशंकर एवं नंदन के द्वारा बनाया गया वाटर लेवेल इंडिकेटर, अभिमन्यू, प्रिंस, राहुल के द्वारा बनाया गया हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट, सोनिका, नेहा, अनामिका का बनाया सस्पेंशन ब्रीज तथा स्वाति, ममता व अमृता का बनाया गया रोटेटिंग एंड लैंड सिफ्टिंग ब्रीज को काफी सराहा गया. मौके पर कॉलेज छात्रों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुई. गणपति वंदना आया बप्पा मोरया… से आरंभ इस कार्यक्रम में बाद में एक से एक आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति हुई. यह दौड़ देर शाम तक चलता रहा. इसमें दीपशिखा, महेश, आशीष, अनुपम, आसना सहित अन्य छात्र-छात्राओं की प्रस्तुति को दर्शन-श्रोताओं ने खूब सराहा. वहीं सौरभ के गाये मैथिली गीत ‘ स्वर्ग से सुंदर मिथिला धाम, मंडन, आयाची राजा जनक के गाम’को भी अतिथियों एवं दर्शकों ने काफी सराहा.
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