कैंपस- बालश्रम की मूल जड़ गरीबी : प्रसाद
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Nov 2015 8:11 PM
कैंपस- बालश्रम की मूल जड़ गरीबी : प्रसाद जनसंख्या दर में कमी कर लग सकता अंकुश दो दिनी सेमिनार के समापन पर जनभागीदारी पर जोरफोटो- 10 व 11परिचय- विवि के पीजी अर्थशास्त्र विभाग में सेमिनार के दूसरे दिन मंचस्थ विद्वतगण एवं उपस्थित लोग.दरभंगा : लनामिवि के प्रबंधन विभाग के सभागार में पीजी अर्थशास्त्र विभाग की […]
कैंपस- बालश्रम की मूल जड़ गरीबी : प्रसाद जनसंख्या दर में कमी कर लग सकता अंकुश दो दिनी सेमिनार के समापन पर जनभागीदारी पर जोरफोटो- 10 व 11परिचय- विवि के पीजी अर्थशास्त्र विभाग में सेमिनार के दूसरे दिन मंचस्थ विद्वतगण एवं उपस्थित लोग.दरभंगा : लनामिवि के प्रबंधन विभाग के सभागार में पीजी अर्थशास्त्र विभाग की ओर से चल रही यूजीसी संपोषित राष्ट्रीय दो दिवसीय सेमिनार के अंतिम दिन शनिवार को समापन समारोह आयोजित किया गया. मौके पर पटना के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेश मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. जगदीश प्रसाद ने बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि बालश्रम की जड़ गरीबी है. उच्च जनसंख्या दर के कारण ही बालश्रम है. उन्होंने कहा कि इसे समाज की सहभागिता से ही दूर करने में सफलता मिल सकती है. वे बिहार में बालश्रम उन्मूलन, विमुक्ति एवं पुनर्वास विषय पर बोल रहे थे. लनामिवि के पूर्व कुलपति डा. एसएम झा ने उच्च जनसंख्या वृद्धि दर को सामाजिक बुराई बताते हुए कहा कि इसके नियंत्रण से ही बालश्रम पर अंकुश लगाने में सफलता मिल सकती है. इसके लिए अभिभावकाें को अपने बच्चों के प्रति सुधार हेतु प्रवृति बदलनी होगी. विवि प्रबंधन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एलपी सिंह ने कहा कि स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के लिए सकारात्मक कदम उठाने की जरुरत है. क्योंकि 80 प्रतिशत बालश्रम ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जाता है. मिथिला शोध संस्थान के निदेशक प्रो. देवनारायण यादव ने कहा कि सबसे अधिक मजदूराें का पलायन मिथिलांचल से होता है. इसमे बाल श्रमिक भी शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र विषय के हजार वर्ष पूर्व की पांडुलीपियां है. उसपर अध्ययन और शोध करने पर बालश्रम के उन्मूलन और पुनर्वास से संबंधित जानकारी मिलने की संभावना है. पूर्व विधान पार्षद प्रो. तनवीर हसन ने कहा कि बालश्रम का कारण हमारे समाज में व्याप्त सामंती सेाच है जो आर्थिक विसंगति का परिणाम है. बालश्रम का कानून तो है लेकिन सकारात्मक परिणाम कम है. उन्होंने कहा कि यह सेमिनार बच्चों के अभिभावकों के बीच करनी चाहिए. समारोह की अध्यक्षता कर रहे विवि के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राम विनोद सिंह ने कहा कि वैश्विकरण से बालश्रम का समाधान से ज्यादा विसंगति होने की संभावना है. पूर्व विभागाध्यक्ष बनारसी यादव ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सेमिनार के संयोजक प्रो. राम भरत ठाकुर की सराहना की. इससे पूर्व चले तकनीकि सत्र प्रो. आरएन ठाकुर की अध्यक्षता में हुई. इसका संचालन प्रो. एचके मिश्रा ने की. इसमें 20 शोध पत्र प्रस्तुत किये गये. केएसआर कॉलेज समस्तीपुर के प्रो. सुवंश चौधरी, प्रो. बनारसी यादव, पूर्वश्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी रवींद्र नाथ शर्मा, सांख्यिकी पदाधिकारी डा. विजय कुमार गुप्ता, सहित अध्यक्ष एवं संयोजक आदि ने शोध पत्र पढ़ा.
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