बांग्लादेश की जेल में 11 साल से कैद दरभंगा निवासी सतीश चौधरी रिहा, सकुशल घर पहुंचे

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना/दरभंगा : बिहार के दरभंगा जिला के एक गरीब परिवार के और मानसिक रूप से बीमार बांग्लादेश की जेल में पिछले 11 साल से कैद सतीश चौधरी रिहा होकर शनिवार को सकुशल अपने घर पहुंचे. पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के नाडिया जिला अंतर्गत दर्शना गेदे बार्डर से सतीश को 12 सितंबर को बार्डर गार्ड्स बांग्लादेश ने सीमा सुरक्षा बल के हवाले किया. मानवाधिकार कार्यकता विशाल रंजन दफ्तुआर के प्रयासों से सतीश की रिहाई हो सकी.

छोटे भाई मुकेश चौधरी उन्हें ट्रेन से लेकर आज दरभंगा जिले के अशोक पेपर मिल थाना अंतर्गत तुलसीडीह मनोरथा गांव पहुंचे. तुलसीडीह मनोरथा गांव निवासी रामविलास चौधरी अपने पुत्र सतीश व अन्य सदस्यों के साथ 12 अप्रैल 2008 को काम की तलाश में पटना आये थे. 15 अप्रैल को काम के बाद जब वह अपने घर पहुंचे तो सतीश को वहां नहीं पाया. काफी तलाश करने पर भी जब सतीश नहीं मिला तो 8 मई को उन्होंने थाने में शिकायत दी.

परिजनों के अनुसार वर्ष 2012 में उन्हें बांग्लादेश रेड क्रास सोसायटी से सतीश के ढाका जेल में बंद होने की जानकारी मिली. मुकेश ने बताया था कि गत 28 जुलाई को बांग्लादेश स्थित भारतीय दूतावास से सतीश की तस्वीर वाट्सएप के जरिये भेजी गयी थी और फोन पर हमसे उनके बारे में पूछताछ की गयी थी. मुकेश ने आरोप लगाया कि इसके बाद कोई संपर्क नहीं किया गया. मुकेश ने कहा कि इसके बाद उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर से संपर्क साधा और उनके जरिये सतीश की रिहाई के प्रयास किये.

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