जीवनशैली में सुधार से ही मधुमेह को भगा सकते दूर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Nov 2017 4:19 AM (IST)
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विश्व मधुमेह दिवस . आइएमए कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन आज की भागदौड़ की जिंदगी में तनाव, शारीरिक श्रम की कमी खान-पान में अनियमितता के कारण होता है मधुमेह दरभंगा : आज के भागदौड़ भरे अनियमित जीवन शैली के कारण मधुमेह लोगों को अपने गिरफ्त में ले रही है मधुमेह को धीमी मौत भी कहा […]
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विश्व मधुमेह दिवस . आइएमए कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन
आज की भागदौड़ की जिंदगी में तनाव, शारीरिक श्रम की कमी
खान-पान में अनियमितता के कारण होता है मधुमेह
दरभंगा : आज के भागदौड़ भरे अनियमित जीवन शैली के कारण मधुमेह लोगों को अपने गिरफ्त में ले रही है मधुमेह को धीमी मौत भी कहा जाता है. उक्त बातें अल्लपट्टी स्थित आइएमए कार्यालय में विश्व मधुमेह दिवस पर आयोजित परिचर्चा में डॉ एके मेहता ने यह जानकारी दी. डॉ मेहता ने कहा कि जीवनशैली में सुधार से ही मधुमेह को दूर भगा सकते हैं. उन्होंने बताया कि यह ऐसी बीमारी है जो एक बार किसीको हो जाये तो उसे जीवन भर नहीं छोड़ती. कहा कि मधुमेह के कारण रोगियों को आंख, किडनी और लीवर की बीमारी आम है. पहले यह बीमारी 40 की उम्र के बाद होती थी लेकिन, आजकल बच्चों में भी इसका होना चिंता का कारण है.
कहा कि इस बीमारी के बाद पैंक्रियाज में इंसुलिन का पहुंचना कम हो जाता है और खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है. इस स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है. मधुमेह हो जाने पर शरीर को भोजन से एनर्जी बनाने में कठिनाई होती है. मधुमेह के बावत बताते हुये कहा कि अपने ग्लूकोज स्तर को जांचें और भोजन से पहले यह 100 और भोजन के बाद 125 से ज्यादा है तो सतर्क हो जाना चाहिए. हर तीन महीने पर एचबीएवनसी टेस्ट कराते रहें ताकि, आपके शरीर में शुगर के वास्तविक स्तर का पता चलता रहे. उसी के अनुरूप आप डॉक्टर से परामर्श कर दवाइयां लें. मधुमेह के लक्षण के बारे में चिकित्सकों ने कहा कि इसमें रोगी को ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब लगना, आंखों की रौशनी कम होना, कोई भी चोट या जख्म देरी से भरना, हाथों एवं पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म, बार-बार फोड़े-फुंसियां निकलना, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन आदि प्रमुख लक्षण हैं.
इस मौके पर डॉ शीला साहू ने बताया कि अधिक उम्र में गर्भाधारण करने पर मधुमेह की स्थिति बन जाती है. इसका उपचार मधुमेह की ही तरह होता है. इसमें गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन बढ़ जाता है. इसके कारण प्रशव में प्रसूता को कठिनाई का सामना करना पड़ता है. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ अमिताभ सिन्हा व संचालन डॉ शुशील कुमार ने किया. मौके पर डॉ आमोद झा, डॉ एससी सिन्हा, डॉ इंतेखाब आलम, डॉ नीरज कुमार, डॉ आरके पाठक आदि मौजूद थे.
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