मेटल व स्टोन की राखी पहली पसंद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Aug 2017 3:44 AM (IST)
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त्याेहार . रक्षाबंधन की तैयारी में जुटीं बहनें दरभंगा : सावन पूर्णिमा के दिन होने वाले रक्षाबंधन पर्व को लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. बहनें अपने भाइयों के लिए बाजार से राखी की खरीद करने में जुटी है. बाजार भी खरीदारों की इच्छा के अनुसार तैयार है. दुकानें राखी से सज गयी है. […]
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त्याेहार . रक्षाबंधन की तैयारी में जुटीं बहनें
दरभंगा : सावन पूर्णिमा के दिन होने वाले रक्षाबंधन पर्व को लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. बहनें अपने भाइयों के लिए बाजार से राखी की खरीद करने में जुटी है. बाजार भी खरीदारों की इच्छा के अनुसार तैयार है. दुकानें राखी से सज गयी है. राखी की कीमत पांच रूपये से लेकर दो सौ रूपये तक है. दरभंगा टावर, लहेरियासराय टावर, हसनचक, कादिराबाद, बाकरगंज आदि बाजारों में राखी की दर्जनों मौसमी दुकाने खुल गयी है. इन दुकानों पर सुबह से देर शाम तक महिलाओं की भीड लगी रहती है.
चाइनीज राखी को मना कर रहीं महिलाएं: बाजार में इस बार नया ट्रेड चल निकला है. दुकानों पर पहुंचते ही महिलाएं पहले ही देशी राखी की मांग कर देती है. विश्वास होने पर ही राखी की खरीद की जाती है. कई दुकानदारों ने बताया कि दुकान पर आते ही महिलाएं कहती है कि चाईनीज राखी मत दिखाना. इक्का- दुक्का को छोड़ अधिकांश व्यवसायियों ने समय रहते ग्राहकों के मन को समझ लिया था. कई व्यापारियों ने बताया कि वे लोग कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे. इस कारण चाइनिज माल नहीं मंगाया. महिलाएं मेटल और स्टोन की राखियां ज्यादा पसंद कर रही है. इस तरह की राखियों की कीमत 20 रूपये से शुरू होती है. इन राखियों की अधिकतम कीमत 200 रुपये तक होती है. रूई और स्पंज की राखी को कम ही पसंद किया जा रहा है.
डाक से भेजी जा रही राखी: जिन बहनों के भाई दूर रहते हैं उन्हें वे डाक व कूरियर के माध्यम से राखी भेज रही हैं. इस बार पोस्ट आफिस ने राखी भेजने के लिए एक डिब्बे का प्रावधान किया है. 10 रूपये में राखी भेजने की व्यवस्था यहां है. प्रधान डाकघर ने अबतक अठारह सौ डिब्बे बेचे हैं. कूरियर महंगा होने के कारण डाकघर ही महिलाओं की पसंद बन रही है.
दुकान बढ़ने से लाभ घटा: कई दुकानदारों का कहना था कि अभी तक बाजार मंदा है. पूंजी ही उपर हो जाए तो वही बड़ी बात होगी. कारण पूछने पर बताया कि अब गली-गली में राखी बिकती है. लोगों को अब नजदीक में ही राखी मिल जाती है. राखी खरीदने अब गांव के लोग शहर नहीं आते. पहले छोटे- छोटे दूकानदार माल खरीदने के लिए आते थे. अब वे भी नहीं आते. बड़ी लाईन की गाड़ी हो जाने के कारण व्यवसायी सीधे कलकत्ता जाकर माल ले आते हैं. कलकत्ता से ही यहां राखी की सप्लाई होती है.
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