Bihar Cabinet: 2500 बेड का होगा दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, खर्च होंगे 3115 करोड़ रुपये
दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भवन पुराना और जर्जर हो चुका है. इसी कारण नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसे 2500 बेडों का अस्पताल बनाने का निर्णय लिया गया है. वर्तमान में इस अस्पताल में 1030 बेड हैं.
दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) को उत्क्रमित करते हुए अब इसे 2500 बेडों का अस्पताल बनाया जायेगा. वर्तमान में इस अस्पताल में 1030 बेड हैं. राज्य सरकार डीएमसीएच के अस्पताल भवन के निर्माण पर 3115 करोड़ खर्च करेगी. यहां पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के साथ ही आवासीय परिसर का भी निर्माण होगा. साथ ही आधुनिक उपकरण भी लगाये जायेंगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने इसकी स्वीकृति दी.
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राज्य सरकार ने इसके पहले 569 करोड़ की लागत से 400 बेड की स्वीकृति दी है, जिसका निर्माण चल रहा है. डीएमसीएच में शेष 2100 बेड के नये भवन के निर्माण और मेडिकल उपकरणों के लिए 2546.41 करोड़ की राशि को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है. अस्पताल का भवन पुराना और जर्जर हो चुका है. कैबिनेट द्वारा मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत विधायकों और विधान पार्षदों को तीन करोड़ की जगह सलाना चार करोड़ की योजनाओं की अनुशंसा करने की स्वीकृति दी गयी. विधायकों की अनुशंसा इसी वित्तीय वर्ष से लागू कर दी गयी है.
कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव डाॅ एस सिद्धार्थ ने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा कुल 12 एजेंडों पर सहमति दी गयी. इसमें दरभंगा को दो बड़ी सौगात दी गयी है. उन्होंने बताया कि डीएमसीएच के विकास को लेकर 2500 बेड के पूरी तरह से नये भवन निर्माण के साथ उपकरणों और आवासीय परिसर की स्वीकृति दी गयी है. इससे पूरे उत्तर बिहार के साथ-साथ समीपवर्ती राज्य के अन्य जिलों से भी आने वाले मरीजों को सुविधाजनक एवं समुचित इलाज मिल सकेगा.
आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 के तहत दरभंगा शहर क्षेत्र से वर्षा जल निकासी के लिए कुल 245 करोड़ 20 लाख की योजना की स्वीकृति दी गयी है. वर्षा जल ड्रेनेज सिस्टम योजना का निर्माण कार्य बुडको द्वारा किया जायेगा.
इसी प्रकार से कैबिनेट द्वारा छपरा शहर से वर्षा जल निकासी के लिए खनुआ नाला के निर्माण की के लिए भी 29 करोड़ 95 लाख की जगह एनजीटी के आलोक में तैयार डीपीआर के डिजाइन ड्राइंग में बदलाव के बाद पुनरीक्षित प्राक्कलन की 51 करोड़ 20 लाख की योजना की स्वीकृति दी गयी.
कैबिनेट द्वारा कार्यपालिका नियमावली 1979 की प्रथम अनुसूची में क्रमांक 23 में अंकित विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग का नाम बदलकर अब विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग कर दिया गया है.
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कैबिनेट ने विधायक और विधान पार्षद विकस फंड की सीमा को तीन करोड़ सालाना से बढ़ाकर चार करोड़ रुपये कर दिया है. अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की मार्गदर्शिका में 2018-19 से प्रति विधानमंडल सदस्य को प्रति वर्ष तीन करोड़ की सीमा तक योजनाओं की अनुशंसा करने का प्रावधान है. निर्माण सामग्रियों के मूल्य में बढ़ोत्तरी के कारण तीन करोड़ की राशि से कार्य कराने में कठिनाई महसूस हो रही है. इसे देखते हुए कैबिनेट द्वारा मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रति विधानमंडल के सदस्य को प्रति वर्ष चार करोड़ की सीमा तक योजनाओं की अनुशंसा करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी. उन्होंने बताया कि सीएम क्षेत्र विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में 318 करोड़ की अतिरिक्त राशि दी गयी है.
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