बदहाली का आलम . अस्तित्व खो रही बेतिया राजघराने से जुड़ी धरोहर, आगे नहीं आ रहा कोई तारणहार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Feb 2016 1:27 AM (IST)
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नहीं संभाल पा रहे शहर के ऐतिहासिक धरोहरों को शहर की ऐतिहासिक धरोहर जिसकी शान कभी पूरे देश में थी. बेतिया राज का महल, दुर्गाबाग मंदिर, ऐतिहासिक हजारी पशु मेला ग्राउंड आदि. कहने को तो आज भी है लेकिन अब अपने अस्तित्व को खोते दिख रहे है. अतिक्रमणकारियों के बढ़ते कदम से ये ऐतिहासिक धरोहर […]
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नहीं संभाल पा रहे शहर के ऐतिहासिक धरोहरों को
शहर की ऐतिहासिक धरोहर जिसकी शान कभी पूरे देश में थी. बेतिया राज का महल, दुर्गाबाग मंदिर, ऐतिहासिक हजारी पशु मेला ग्राउंड आदि. कहने को तो आज भी है लेकिन अब अपने अस्तित्व को खोते दिख रहे है. अतिक्रमणकारियों के बढ़ते कदम से ये ऐतिहासिक धरोहर कुछ दिनों के बाद किताबों के पन्नों में यादें बन कर रह जायेगी. इन धरोहरों को संभालने की जिम्मेदारी लिये प्रशासन जितनी नाकाम है उतने आप और हम भी हैं.
बेतिया : पार्क, मॉल, शोरूम की चकाचौंध में शहर के ऐतिहासिक धरोहर धुंधली होती जा रही है. नतीजा यह धरोहर अब अपने अस्तित्व से ही जूझते दिख रही है़ जबकि इसे संभालने के लिए अफसरों और कर्मियों की पूरी फौज हैं.
फिर भी रोज इन धरोहरों के हिस्से पर अतिक्रमणकारी अपना पांव पसारने में लगे है. अतिक्रमणकारियों के पांव पसारने की नीति से बेतिया राज के कई धरोहर की जमीन अब सिमटने लगी है.
खासतौर पर बेतियाराज घराने से जुड़े जलाशयों इसमें शामिल है. वही राजा का महल परिसर भी इससे अछूता नहीं है.
बेतियाराज को करीब से जानने वाले बताते हैं कि बेतिया के राजा शिव भक्त थे. शहर में मुख्य द्वार से लेकर अंतिम छोर तक भगवान शंकर का देवालय बनवाया था. इसमें पूजन के लिए सभी देवालयों के समीप पोखरा भी खुदवाई थी. इसी कड़ी में सागर पोखरा, हरिवाटिका पोखरा व पिउनीबाग में जलाशय खुदे थे. इन जलाशयों का सीधा संपर्क राजमहल से था.
लेकिन आज ये सभी जलाशय अतिक्रमणकारियों के चपेट में है. पोखरा के चारों तरफ से अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा बहुमंजिलें इमारत खड़ी कर ली है. बेतिया राज महल जिस कैंपस में है आज वह पूरी तरह से बाजार में तब्दील हो गयी है. बेतिया राजड्योढ़ी में ही टेंपो, तांगा व बस पड़ाव भी बना दिये गये है.
अतिक्रमण की जद में हजारी मेला ग्रांउड
हजारी ग्राउंड पर कभी पशु मेला लगता था. दूर-दूर से व्यापारी यहां आया करते थे. यहां की शोभा देखते ही बनती थी, लेकिन अब यहां कब्जे का खेल चलता है. रोज नये आशियाने खड़े होते हैं. बाकी रही सही कसर नगर परिषद अपने कूड़े-कचरे को फेंक पूरा कर दे रही है.
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