गोरखधंधा : हाथ-पैर टूटा नहीं और बन गयी इंज्यूरी

Published at :29 Apr 2015 4:34 AM (IST)
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गोरखधंधा : हाथ-पैर टूटा नहीं और बन गयी इंज्यूरी

मारपीट के मामलों में फर्जी जख्म प्रतिवेदन (इंज्यूरी रिपोर्ट) बनाने का गोरखधंधा पिछले दो वर्ष से चल रहा था. दो गुटों में बगैर किसी मारपीट के भी शार्प कट का इंज्यूरी बन जाता था. पुलिस ऐसे मामलों से बेहद परेशान थी. निदरेष लोगों को सजा होने की संभावना रहती थी. मामला जब एसपी शफीउल हक […]

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मारपीट के मामलों में फर्जी जख्म प्रतिवेदन (इंज्यूरी रिपोर्ट) बनाने का गोरखधंधा पिछले दो वर्ष से चल रहा था. दो गुटों में बगैर किसी मारपीट के भी शार्प कट का इंज्यूरी बन जाता था.
पुलिस ऐसे मामलों से बेहद परेशान थी. निदरेष लोगों को सजा होने की संभावना रहती थी. मामला जब एसपी शफीउल हक संज्ञान में आया तो उन्होंने छापेमारी करायी. एक एक्सरे के संचालक को पकड़ा गया. उसने पूछताछ के दौरान कई सनसनी खेज खुलासा किया है, जिसे सुन कर पुलिस अधिकारी हैरत में है.
बगहा : यदि दो गुटों में विवाद है. एक गुट कमजोर पड़ रहा और वह अगर चाहता है कि विरोधी को बगैर किसी मारपीट की सजा हो जाये तो उसके लिए लवली एक्सरे सेंटर का दरवाजा खुला है. सिर्फ अस्पताल के ओपीडी और इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक को मैनेज करने की जरूरत है.
अगर चिकित्सक ने जख्मी को एक्सरे कराने के लिए भेज दिया तो पक्का है कि उसका जख्म प्रतिवेदन ग्रिभीएस मिलेगा. क्योंकि यहां उस तरह की तकनीक का इस्तेमाल होता है. बगहा बाजार के लबली जांच घर के संचालक रमन किशोर ने पुलिसिया पूछताछ के दौरान इस तरह के सनसनीखेज खुलासा किया है. करीब चार घंटे के पूछताछ में रमन किशोर से कई अन्य रोचक जानकारियों भी पुलिस को दी है, जिस के आधार पर पुलिस साक्ष्य संकलित कर रही है. इस गोरखधंधे के लपेटे में कई अन्य लोगों के आने की भी संभावना है.
एसपी ने बताया कि यह बेहद ही शर्मनाक एवं गंभीर अपराध है. इसमें लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जायेगा. जिले में अभियान चला कर ऐसे जख्म प्रतिवेदनों का सत्यापन कराया जायेगा. ताकि सच्चई सामने आये. उन्होंने बताया कि पहले से ही पुलिस को इस तरह के गोरखधंधे की भनक मिली थी. लेकिन कुछ साक्ष्य नहीं मिल रहे थे, जिस आधार पर कार्रवाई की जाये. अनुसूचित जाति अनुसूचित जन जाति थाने के पुलिस अवर निरीक्षक अरुण कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस ने इस गोरखधंधे का खुलासा किया.
मामूली चोट कैसे बने गंभीर!
दो गुटों में मारपीट हो गयी. दोनों गुटों को मामूली चोट आयी. घायल अस्पताल आये. अस्पताल से थाने को ओडी गयी. थाने से पुलिस पदाधिकारी आये. घायलों का बयान दर्ज किया. उस वक्त घायलों की स्थिति देखी. थाने गये और प्राथमिकी दर्ज हो गयी. पुलिस पदाधिकारी ने जो देखा , वैसी धाराओं में कांड दर्ज हुआ. लेकिन जब करीब एक माह बाद इंज्यूरी रिपोर्ट मिला तो मामला बदल गया.
मसलन, इंज्यूरी रिपोर्ट के मुताबिक किसी एक घायल पर जानलेवा हमला, जिसमें उसके माथे की हड्डी चटक गयी या फिर हाथ – पैर टूट गया. इस तरह के जख्म प्रतिवेदन के बाद स्वाभाविक है कि प्राथमिकी के धाराओं में परिवर्तन होगा. यहां कांड के अनुसंधानक एवं पर्यवेक्षण पदाधिकारी दोनों के लिए ही सरदर्द. हालांकि कानून विद बताते हैं कि ऐसे जख्म प्रतिवेदनों में पुलिस मेडिकल बोर्ड गठित करने के लिए न्यायालय में अर्जी दे सकती है. न्यायालय के आदेश से मेडिकल बोर्ड गठित होगा. फिर आगे की कार्रवाई होगी.
क्या था मामला
वाल्मीकिनगर के भुरहरवा गांव के दोड़ा राम के एक्सरे प्लेट से इस मामले का खुलासा हुआ. 18 अप्रैल को ये जख्मी हालत में आये थे. कांड संख्या 16/15 में जख्म प्रतिवेदन. तीन अलग-अलग एक्सरे कराने के लिए लिपिक देवेंद्र प्रसाद बोले थे. जब एक्सरे प्लेट आया तो उपाधीक्षक ने आपत्ति की थी.
हाथ तेरा और रिपोर्ट मेरा
लवली एक्सरे में पहले से लोगों के टूटे फुटे हाथ एवं छाती समेत अन्य जगहों के पुराने एक्सरे रखे हुए है. जब भी कोई मारपीट की इंज्यूरी लेने वाला व्यक्ति पहुंचता है तो उससे रकम की अवैध वसूली कर ली जाती है और इस एवज में मन वांछित एक्सरे प्लेट थमा दिया जाता है.
बोले एसपी
फर्जी एक्सरे रिपोर्ट देने के आरोप में लवली जांच घर के संचालक रमन किशोर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पूछताछ के दौरान मिले साक्ष्य के आधार पर जांच-पड़ताल की जा रही है.
शफीउल हक, एसपी बगहा
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