विशिष्ट गीतकार थे गोपाल सिंह नेपाली

Updated at : 12 Aug 2017 5:16 AM (IST)
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विशिष्ट गीतकार थे गोपाल सिंह नेपाली

स्मृति. हिंदी साहित्य व फिल्म जगत में रही धाक जयंती समारोह भितिहरवा गांधी आश्रम में समारोह पूर्वक मनाई गई गीतों के राजकुमार की 106वीं जयंती शैलेंद्र प्रताप सिंह, ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, सविता सिंह नेपाली समेत तमाम सख्शियतों ने की शिरकत पंडित चुतुर्भुज को दिया गया नेपाली सम्मान बेतिया : गीतों के राजकुमार गोपाल सिंह नेपाली […]

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स्मृति. हिंदी साहित्य व फिल्म जगत में रही धाक

जयंती समारोह
भितिहरवा गांधी आश्रम में समारोह पूर्वक मनाई गई गीतों के राजकुमार की 106वीं जयंती
शैलेंद्र प्रताप सिंह, ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, सविता सिंह नेपाली समेत तमाम सख्शियतों ने की शिरकत
पंडित चुतुर्भुज को दिया गया नेपाली सम्मान
बेतिया : गीतों के राजकुमार गोपाल सिंह नेपाली की 106 वीं जयंती पर शुक्रवार को ऐतिहासिक भितिहरवा आश्रम में जयंती सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कविवर गोपाल सिंह नेपाली फाउण्डेशन व भितिहरवा आश्रम जीवन कौशल ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता शैलेंद्र प्रताप सिंह ने की. मुख्य वक्ता डा़ ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी ने कविवर गोपाल सिंह नेपाली की जन्मभूमि पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आगमन के सौ वर्ष पूरे होने की महता पर प्रकाश डाला.
उन्होंने कहा कि चंपारण की धरती ने हीं मोहन दास करमचंद्र गांधी को महात्मा गांधी की उपाधि दी. गांधी जी ने यहीं से सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की. जिसने भारत को गुलामी की दासता से मुक्त कर स्वतंत्रता का उपहार दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कलम की स्वाधीनता के लिए आजीवन संघर्षरत रहे गीतों के राजकुमार गोपाल सिंह नेपाली धारा के विपरीत चलकर हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता और फिल्म उद्योग में ऊंचा स्थान हासिल करने वाले छायावादोत्तर काल के विशिष्ट कवि और गीतकार थे. यह चंपारण ही नहीं पूरे बिहार के लिए गौरव की बात है. श्री सिंह ने इस दौरान भितिहरवा आश्रम जीवन कौशल ट्रस्ट की भावी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भितिहरवा इतना महत्वपूर्ण होने के बाद भी आज तक उपेक्षित है. कोई भी राजनेता राजनीतिक खतरे को देखते हुए यहां आना नही चाहता. उन्होंने भितिहरवा को राष्ट्रीय पटल पर लाने की बात कही. कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए डा़ सविता सिंह नेपाली ने बापू तूम बिन बगिया के तरुवर गीत सुनाया. इसअवसर पर नेपाली से जुड़े कई सम्मान भी जिले के साहित्यकारों को प्रदान किये गये. डा़ चतुर्भूज मिश्र एवं भूपेंद्र शेष को नेपाली सम्मान दिया गया. वहीं डा़ गोरख प्रसाद मस्ताना एवं नरेंद्र नाथ तिवारी को नेपाली गीत सम्मान से सम्मानित किया गया. संचालन मुकूंद मुरारी राम ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन भोट चतुर्वेदी ने किया. मौके पर राकेश राव सहित भारी संख्या में साहित्यकार एवं ट्रस्ट के सदस्य उपस्थित थे.
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