जैविक खेती से मिट्टी और सेहत बचाने की पहल, बक्सर में किसानों को दिया गया प्रशिक्षण

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फोटो कैप्शन : लखनडिहरा और नुआंव पंचायत में जैविक खेती प्रशिक्षण में शामिल किसान | Prabhat Khabar Network

डुमरांव की दो पंचायतों में किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। रासायनिक खाद छोड़कर वर्मी कंपोस्ट और जैविक उत्पादों के उपयोग पर जोर दिया गया।

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Buxar News : रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी के प्रदूषण और घटती उर्वरता को कम करने के उद्देश्य से जैविक कॉरिडोर योजना के तहत डुमरांव प्रखंड में दो स्थानों पर जैविक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. पहला प्रशिक्षण लखनडिहरा पंचायत में रविदास बाबा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और दूसरा नुआंव पंचायत में दियरांचल एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की ओर से आयोजित किया गया.

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रासायनिक खाद से घट रही मिट्टी की उर्वरता

कार्यक्रम में सहायक तकनीकी प्रबंधक सह आईसीएस प्रबंधक विवेकानंद उपाध्याय ने किसानों को बताया कि यूरिया, डीएपी, एसएसपी, टीएसपी और पोटाश जैसे रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों के लगातार इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है. उन्होंने किसानों से जैविक खाद, जैविक टॉनिक, जैविक कीटनाशक और फफूंदनाशक तैयार कर खेतों में इस्तेमाल करने की अपील की.

जैविक उत्पादों से मिट्टी के साथ सेहत को भी मिलेगा लाभ

विवेकानंद उपाध्याय ने कहा कि जैविक उत्पादों के इस्तेमाल से मिट्टी की संरचना में सुधार होगा और कृषि उत्पादों के पोषक तत्वों की गुणवत्ता बेहतर होगी. इसका लाभ मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण और अन्य जीव-जंतुओं को भी मिलेगा.

वर्मी कंपोस्ट को बताया जैविक खेती का आधार

उन्होंने किसानों को बताया कि जैविक खेती का मूल आधार वर्मी कंपोस्ट है. जिन किसानों ने वर्मी पिट तैयार कर लिया है, वे उसमें गोबर, फसल अवशेष और केंचुआ डालकर कंपोस्ट तैयार करें. जिन किसानों के पास वर्मी पिट नहीं है, वे कृषि विभाग की योजना का लाभ लेकर इसका निर्माण करा सकते हैं.

जीवामृत से नीमास्त्र तक अपनाने की दी सलाह

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को घन जीवामृत, पीएसबी कल्चर, बीजामृत, जीवामृत, सहजन टॉनिक, उपलों से तैयार ह्यूमिक एसिड, दही स्प्रे, ट्राइकोडर्मा, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैव उत्पादों के इस्तेमाल की जानकारी दी गयी. किसानों को इनके उपयोग और जैविक खेती में होने वाले लाभ के बारे में भी बताया गया.

देशी गाय पालने पर दिया जोर

कृषि समन्वयक मृत्युंजय मिश्रा ने कहा कि जैविक खेती को प्रभावी ढंग से अपनाने के लिए कम से कम एक देशी नस्ल की गाय पालना उपयोगी है. इससे गोबर और गोमूत्र की मदद से कई तरह के जैविक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. उन्होंने किसानों को वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की विधि के साथ हरी खाद के रूप में मूंग और ढैंचा की खेती तथा कई देशी कृषि विधियों की जानकारी दी.

बड़ी संख्या में प्रशिक्षण में पहुंचे किसान

कार्यक्रम में कृषि समन्वयक श्याम जी यादव, किसान सलाहकार कन्हैया लाल श्रीवास्तव, विश्वामित्र सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे. प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने जैविक खेती से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली और रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने के उपायों को समझा.

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