भूजल स्तर खिसकने से सूख गये शहर के अधिकतर चापाकल

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पानी के दोहन के चलते बक्सर शहर का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है. शहर का तापमान लगातार एक माह से 44 डिग्री से पार बना हुआ है, जबकि शहर की स्थिति यह हो गयी है कि कई क्षेत्रों के हैंडपंप सूख गये हैं, तो कई नलकूप जवाब देने लगे हैं. शहरी इलाके की स्थिति दिन-प्रतिदिन भयावह होती जा रही है.

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पानी के दोहन के चलते बक्सर शहर का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है. शहर का तापमान लगातार एक माह से 44 डिग्री से पार बना हुआ है, जबकि शहर की स्थिति यह हो गयी है कि कई क्षेत्रों के हैंडपंप सूख गये हैं, तो कई नलकूप जवाब देने लगे हैं. शहरी इलाके की स्थिति दिन-प्रतिदिन भयावह होती जा रही है. शहर के वार्ड नंबर 34 की बुधनपुरवा महादलित पटवा बस्ती के चार चापाकल खराब होने के कारण पानी के लिए हाहाकार मचा है. इस महादलित बस्ती में चापाकल के भरोसे तकरीबन सात सौ घर हैं, मगर चार चापाकल खराब होने के कारण लोगों को दूसरी जगहों से पानी की व्यवस्था करना मजबूरी है. लोग दुूसरी जगहों से पानी लाकर इस्तेमाल कर रहे हैं. इस मुहल्ले के बलीराम, सबिता, लालती देवी आदि का कहना है कि जननायक कर्पूरी ठाकुर विधि महाविद्यालय के पास शंकर अखाड़ा से पानी लाना मजबूरी है. इनका कहना है कि पीने का पानी तो खरीदना भी पड़ रहा है. चार साल में एक से दो मीटर नीचे खिसका जल स्तर : पिछले चार वर्षों में एक से दो मीटर तक जल स्तर नीचे खिसका है. ऐसे में समस्या को दूर करने के लिए लोगों को ठोस कदम उठाने की जरूरत है. वहीं, शहर के ऐसे इलाके हैं जहां जलापूर्ति वाले पाइप फटे होने के कारण प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है. विभाग यह जानते हुए भी अंजान बना हुआ है. पेयजल संकट होने से शहरवासियों की परेशानियां बढ़ गयी हैं. शहर के कई इलाकों में लोग जल संकट से जूझ रहे हैं. कहीं पानी नहीं आ रहा है, तो कहीं पानी बर्बाद हो रहा है. साहब को नहीं पता है कितने सूखे हैं चापाकल : शहर में एक दर्जन से अधिक चापाकल गर्मी के कारण सूख गये हैं. इस कारण शहरवासी परेशान हैं, मगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमित कुमार को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि शहर में कुल कितने चापाकल लगे हैं. इनमें कितने चालू हालत में हैं और कितने खराब हैं. इस बाबत उन्होंने किसी प्रकार की जानकारी देने से इन्कार कर दिया.

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