सदर अस्पताल में दो घंटे तक फर्श पर तड़पती रही महिला
Updated at : 01 May 2017 1:05 AM (IST)
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लापरवाही. पीड़िता का वीडियो बनाने पर हरकत में आये डॉक्टर बक्सर : सदर अस्पताल के कर्मियों की लापरवाही कहें या फिर लाचारी. कारण चाहे जो भी हो. स्वास्थ्य कर्मियों की अनदेखी के कारण शनिवार की देर रात सदर अस्पताल में एक बार फिर मानवता तार-तार हो गयी. तभी तो सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के […]
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लापरवाही. पीड़िता का वीडियो बनाने पर हरकत में आये डॉक्टर
बक्सर : सदर अस्पताल के कर्मियों की लापरवाही कहें या फिर लाचारी. कारण चाहे जो भी हो. स्वास्थ्य कर्मियों की अनदेखी के कारण शनिवार की देर रात सदर अस्पताल में एक बार फिर मानवता तार-तार हो गयी. तभी तो सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के चंद कदम की दूरी पर अस्पताल परिसर में एक लावारिस महिला तड़प रही थी,
लेकिन किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित उस महिला को देखनेवाला कोई नहीं था. ओपीडी एवं दवाखाना की ओर जानेवाले हर लोग नजर बचाकर निकल रहे थे. लोग ऐसे चल रहे थे कि जमीन पर कोई नहीं है. जबकि महिला हर आने-जानेवाले की ओर मदद की नजर से देख रही थी. यह दशा अस्पताल प्रशासन से लेकर सरकार के दावे की पोल खोलने के लिये काफी थी.
इस महिला को इलाज की जरूरत थी, लेकिन इसे घुट-घुट कर मरने के लिए अस्पताल प्रशासन ने छोड़ दिया था. महिला माइनर ओटी के पास मुख्य बरामदे में फर्श पर पड़ी अपने इलाज की गुहार लगा रही थी, लेकिन इलाज से जिम्मेवार धरती के भगवान कहे जानेवाले डॉक्टरों को इसकी परवाह नहीं थी.
बेहोशी की हालत में ऑटोवाले ने पहुंचाया अस्पताल : महिला बेहोशी की हालत में अस्पताल के फर्श पर पड़ी थी. लोगों ने बताया कि किसी ऑटोवाले ने शहर के पीपी रोड के पास लावारिश पड़ी उक्त महिला को अस्पताल पहुंचाया था. महिला के बारे में रविवार को उसके परिजनों को पता चला. बताया जा रहा है कि महिला नालबन टोली की रहनेवाली है. उसकी तबीयत पिछले तीन महीने से खराब है.
लोगों ने बनाया वीडियो, तो मचा हड़कंप : दर्द से तड़प रही उक्त महिला का इलाज नहीं किया जा रहा था. वह थोड़ी देर के लिए होश में आती और अपने इलाज के लिए गुहार लगाती, लेकिन डॉक्टर से लेकर अस्पताल कर्मी तक उसकी बातों को अनसुना कर देते. इस बात से गुस्साए एक युवक ने महिला का फर्श पर लेटे तड़पते हुए वीडियो बना लिया. इतना देखते ही ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के होश उड़ गये. आनन-फानन में डॉक्टर ने महिला को उठाकर बेड पर ले गये, तब जाकर इलाज शुरू किया गया.
दवा के लिए लोगों ने दिये पैसे : सदर अस्पताल में आये अभिनव कुमार व बुची लाल यादव ने बताया कि यहां कोई व्यवस्था ही नहीं है. आने के साथ कहा जाता है रेफर करा लें. जानकारी के अनुसार उक्त महिला को डॉक्टर ने वार्ड में भरती तो कर लिया, लेकिन उसके लिए जो दवाएं लिखीं वो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं. लिहाजा एक सज्जन ने अपनी जेब से कुछ रुपये दिये, तब जाकर महिला का इलाज शुरू हुआ. होश में आने के बाद महिला ने बताया कि उसके बेटे उसकी मदद नहीं करते. उसका इलाज नहीं कराते हैं.
लावारिस मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं : सवाल ये है कि जब किसी ने वीडियो का डर दिखाया, तो महिला को वार्ड में भेज दिया गया, लेकिन यह स्थिति कब तक रहेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं था. यहां तो लावारिस मरीजों की देखभाल के लिये अब तक कोई विशेष व्यवस्था नहीं हो सकी.
आगे ऐसी गलती नहीं होगी
रात में डॉ अमलेश ड्यूटी पर थे. उनसे बात करने पर पता चला कि फूड पॉइजनिंग के छह मरीज आ गये थे. इसलिए महिला के इलाज में थोड़ी लापरवाही बरती गयी. सख्त निर्देश दे दिया गया है. हिदायत दी गयी है कि भविष्य में इस तरह की गलती नहीं होनी चाहिए.
डॉ ब्रजकुमार सिंह, सिविल सर्जन
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