गांव 1136,पर दमकल सिर्फ पांच

Updated at : 07 Mar 2017 3:44 AM (IST)
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गांव 1136,पर दमकल सिर्फ पांच

कुव्यवस्था. जिले में 11 प्रखंडों व 142 पंचायतों के लिए दमकल सेवा है नदारद बक्सर में एक बड़ी, एक छोटी दमकल व एक जीप के सहारे होता है काम बक्सर : गरमी का सीजन शुरू होने के साथ हर साल बक्सर जिले में अगलगी की घटना बढ़ जाती है. हर साल तकरीबन दो हजार से […]

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कुव्यवस्था. जिले में 11 प्रखंडों व 142 पंचायतों के लिए दमकल सेवा है नदारद

बक्सर में एक बड़ी, एक छोटी दमकल व एक जीप के सहारे होता है काम
बक्सर : गरमी का सीजन शुरू होने के साथ हर साल बक्सर जिले में अगलगी की घटना बढ़ जाती है. हर साल तकरीबन दो हजार से अधिक गरीबों का आशियाना आग की चपेट में जाता है. गरीबों के घर के चूल्हे से उठी चिनगारी पूरी बस्ती व गांव को चपेट में ले लेती है. अगलगी की भीषण घटनाओं से निबटने के लिए जिले में अग्निशमन व्यवस्था नाकाफी है. जिले में 11 प्रखंड, बक्सर व डुमरांव दो नगर निकाय, 142 पंचायत व 1136 गांव हैं. जिले की जनसंख्या 17 लाख पार कर गयी है, पर यहां दमकल की महज पांच गाड़ियां हैं. बता दें कि गरमी के दिनों में अगलगी की घटनाएं बढ़ जाती हैं. खास कर दियारे इलाके में अगलगी का प्रकोप सबसे ज्यादा रहता है.
इस समय दमकल की कमी खलती है. मार्च के अंतिम सप्ताह अथवा अप्रैल माह के आरंभ से जिले में अगलगी की घटनाओं की बाढ़ आ जाती है. फायरब्रिगेड ऑफिस को एक समय में एक साथ कई-कई जगहों से जब अगलगी की सूचनाएं मिलती हैं, तब प्राथमिकता तय करना मुश्किल हो जाता है कि पहले कहां जाएं. बड़ी घटना हो भी, तो निकट के घटनास्थल का चयन किया जाता है. या फिर एक साथ चार-पांच जगहों पर अगलगी हो और एक ही जगह तीन से चार दमकल गाड़ियों की जरूरत हो, तो एक-एक गाड़ी उन घटनास्थलों पर भेज कर सरकारी फर्ज पूरा कर लिया जाता है.
राख पर पानी डालने की विवशता
अनुमंडल स्तर पर दमकल गाड़ियों को तैनात किये जाने की वजह से समय पर वहां पहुंच पाना मुश्किल होता है. बक्सर अनुमंडल में राजपुर, इटाढ़ी, चौसा व बक्सर का एरिया आता है. मुख्यालय से इन प्रखंडों की दूरी 20 से 30 किलोमीटर है. समय पर सूचना मिलने के बाद भी दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर तब पहुंचती हैं, जब सब कुछ खाक हो चुका होता है.
कार्यबल का अभाव : बक्सर को आवंटित 03 दमकल गाड़ियों पर दो ही ड्राइवर हैं. दोनों अप्रशिक्षित. अब से पहले फायरमैन का काम भी होमगार्ड जवानों से लिया जाता था. बिहटा प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण देकर चार यंग फायरमैन को यहां तैनात किया गया है. इसके अलावा 01 प्रभारी पदाधिकारी यहां पदस्थापित हैं.
अप्रशिक्षित चालकों के भरोसे चल रहा अग्निशमन विभाग
फायरमैन के पास उपकरण नदारद
यहां प्रशिक्षित चार जवानों को तैनात तो कर दिया गया है, पर उनके पास फायर फाइटिंग के जरूरी उपकरण, सुविधाएं बिल्कुल ही नहीं हैं. अगलगी की घटना होने पर राहत एवं बचाव कार्य चलाने के लिए फायरमैन की खुद की सुरक्षा के लिए फायरप्रूफ जैकेट, ग्लव्स, हेलमेट, मास्क, बूट होनी चाहिए, जो नहीं है. इसके अलावा बचाव कार्य के लिए फायर मोनीटर, फ्लेम एरेस्टर, हाइडरेंट होश बॉक्स, फायर ब्रेक की प्वाइंट, इसके अलावा इलेक्ट्रिक शॉक, गैस की आग बुझाने के लिए अलग-अलग इक्वूपमेंट आवश्यक हैं. यह सब सुविधाएं यहां उपलब्ध नहीं हैं.
तीन के बदले एक यूनिट है कार्यरत
फायर ब्रिगेड विभाग में महज चार प्रशिक्षित फायरमैन की पोस्टिंग होने से समस्या है. इक्यूपमेंट का भी अभाव है. गरमी के दिनों में अगलगी की कई घटनाएं एकसाथ होती हैं. ऐसी स्थिति में बड़ी परेशानी होती है. जरूरतों को देखते हुए सभी 11 प्रखंडों के लिए कम-से-कम दो यानी 20 दमकल गाड़ियों का होना जरूरी है. एक गाड़ी पर छह लोगों के एक यूनिट की आवश्यकता है. इस लिहाज से तीन यूनिट कार्यबल की जरूरत है. रिक्त पदों को भरा जाना आवश्यक है.
पूर्णवासी साह,फायर स्टेशन ऑफिसर
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