छह माह से नहीं आया एक भी फैसला
Updated at : 16 Feb 2017 4:53 AM (IST)
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अनदेखी. व्यवस्था के पेच में फंसे उपभोक्ता, नहीं मिल रहा न्याय अध्यक्ष के एफटीसी जज में चयनित होने के बाद बंद हुई कानूनी प्रक्रिया हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी सुस्त पड़ी है बिहार सरकार बक्सर : उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 का गठन भारत सरकार ने त्वरित गति से उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए […]
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अनदेखी. व्यवस्था के पेच में फंसे उपभोक्ता, नहीं मिल रहा न्याय
अध्यक्ष के एफटीसी जज में चयनित होने के बाद बंद हुई कानूनी प्रक्रिया
हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी सुस्त पड़ी है बिहार सरकार
बक्सर : उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 का गठन भारत सरकार ने त्वरित गति से उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए किया था. लेकिन फोरम के अध्यक्ष पद पर बहाली की जटिल प्रक्रिया के पेच से ऐसा नहीं हो पा रहा है. बक्सर के उपभोक्ता फोरम में पिछले 6 महीने से एक भी फैसला नहीं आ सका है. फोरम के सदस्यों एवं अध्यक्षों की बहाली की प्रक्रिया राज्य सरकार के जिम्मे है. सदस्यों की बहाली में राजनीतिक गलियारों की भूमिका भी शामिल रहती है. ऐसे में कोई भी पद रिक्त होने के बाद महीनों सालों तक ज्यों का त्यों खाली पड़ा रहता है. न्याय की आस में पीड़ित उपभोक्ता फोरम का चक्कर काटते रहते हैं. ऐसी परिस्थिति में बहादुरशाह जफर की नजम सटीक बैठती है कि ‘उम्रेदराज मांग कर लाये थे चार दिन दो आरजू में कट गये दो इंतजार में’.
हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी सुस्त पड़ी है सरकार: बिहार के मधेपुरा, जहानाबाद, बक्सर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सुपौल, बेगूसराय, कैमूर, सीतामढ़ी, नवादा, औरंगाबाद, भोजपुर, किशनगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, नालंदा, शेखपुरा, भागलपुर, वैशाली एवं पटना का जिला अदालत किसी न किसी रूप से प्रभावित है. इसको लेकर रिट माननीय उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया था. इस पर न्यायालय ने कमियों को दूर करने की सख्ती से आदेश दिया गया. साथ ही पटना जिला फोरम ने जहां 4 हजार से अधिक मामले लंबित हैं के अलावा उन जगहों पर और अधिक बेंच बनाने का आदेश दिया गया. जहां परिवादों की संख्या ज्यादा हो.
दीमक चाट गये लाखों के कंप्यूटर: जिला फोरम में कार्यों को त्वरित गति से निष्पादित करने के लिए करीब 6 वर्ष पूर्व 5 कंप्यूटर मिले थे. लेकिन चलाने के लिए किसी प्रशिक्षित व्यक्ति को नहीं भेजा गया. ऐसे में कुछ वर्षों तक कंप्यूटर चूहों का आवास बना है. फिर अधिक बदबू आने के चलते उसे सदस्य के कमरे से हटाकर बाहरी कमरे में रख दिया गया. अब वे बेशकीमती कंप्यूटर मालखाने के कबाड़ी का रूप ले चुके हैं तथा उन्हें दीमक चाट रहे हैं.
उपभोक्ता झेल रहे फजीहत: अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिन्हा नीरज ने बताया कि अधिनियम में 30 दिनों या अधिक से अधिक 45 दिनों के अंदर विपक्षी को अपना पक्ष रखने के लिए आदेशित किया गया है. लेकिन सदस्यों एवं अध्यक्ष की कमी के कारण महीनों से दाखिल मामले ज्यों के त्यों पड़े हुए हैं. जिससे न्याय पाने की जगह उपभोक्ताओं को अधिक परेशानियां उठानी पड़ रही है.
लगभग दो वर्षों से रिक्त है महिला सदस्य का पद
लंबित हैं 200 से अधिक मामले
सरकार के नकारात्मक रवैये के कारण जिला उपभोक्ता फोरम में 200 से अधिक मामले लंबित हो हैं. इसमें सर्वाधिक मामले विद्युत संबंधित हैं. कई मामले तो ऐसे हैं जिसमें उपभोक्ता को त्वरित न्याय की उम्मीद थी. ऐसे ही मामलों में स्टेशन रोड निवासी अरुण कुमार सिंह एवं मेन रोड के दीपू कुमार का है. जहां उन्हें विद्युत विभाग ने एक माह का बिजली बिल चार लाख रुपये का थमा दिया गया था. इसके अलावा बैंक, बीमा कंपनी, रेलवे आदि के कई महत्वपूर्ण मामले भी लंबित हैं.
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