मनोवैज्ञानिकों से किशोर अपराध पर ली जायेगी राय
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 May 2016 11:52 PM (IST)
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किशोर न्याय अधिनियम में किया गया बदलाव बक्सर : किशोरों द्वारा किये जा रहे जघन्य अपराधों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम में व्यापक बदलाव करते हुए वैसे बालकों जिनके द्वारा 16 से 18 वर्ष के अंदर जघन्य अपराध कारित किये गये हों. ऐसे मामले जब किशोर […]
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किशोर न्याय अधिनियम में किया गया बदलाव
बक्सर : किशोरों द्वारा किये जा रहे जघन्य अपराधों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम में व्यापक बदलाव करते हुए वैसे बालकों जिनके द्वारा 16 से 18 वर्ष के अंदर जघन्य अपराध कारित किये गये हों. ऐसे मामले जब किशोर न्याय परिषद के समक्ष लाये जायेंगे, तो बोर्ड की ओर से मनोवैज्ञानिकों से सहायता लेकर इस बात का आंकलन करेगा कि जघन्य अपराध कारित करनेवाले बालक की मानसिक व शारीरिक क्षमता अपराध के समझने की है कि नहीं. नये अधिनियम के तहत बोर्ड को यह अधिकार दिया गया है
कि मनोवैज्ञानिकों से प्राप्त रिपोर्ट पर सम्यत विचारोंपरांत बोर्ड ऐसे जघन्य अपराधों के मामले जिनकी सजा समान्य कोर्ट में सात वर्ष से अधिक है, बाल न्यायालय में स्थानांतरित कर सामान्य लोगों की सुनवाई की तरह भेज देगा. जघन्य अपराध से संबंधि मामले दफा 14 के अनुसार तीन महीने के अंदर प्रारंभिक तौर पर पूरी कर लेना है़ विधि विवादित बालकों को समाज की मुख्य धारा में लाने सहित बालकों को पुनर्वासित करने के लिए नये कानून में कई अधिकार दिये गये हैं. विधि विवादित बालकों के संरक्षण व सुधार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का भी प्रावधान किया गया है. नया अधिनियम 15 जनवरी, 2016 से जिले मेें प्रभावी हो गया है. इस अधिनियम के तहत दस अध्याय में 112 धाराएं शामिल की गयी हैं. अब किशोरों की जगह बालक शब्द का प्रावधान किया गया है़ नये अधिनियम के प्रभावी होने के मुख्य कारणों के पीछे निर्भया कांड के दौरान तिहाड़ जेल बहुतैयत संख्या में बच्चों का पाया जाना भी बताया गया है. इस अधिनियम के तहत धारा तीन के अंतर्गत बालकों के संबंध में आदेश बनाये जायेंगे, जो कुल 16 सिद्धांत को नये कानून में धारा आठ की प्रबल शक्तियां बालकों को संरक्षित करनेवाले स्थानों का प्रत्येक माह निरीक्षण कर उसके सुधार के लिए सुझाव देना, नि:शुल्क विधि सहायता दिलाना और संबंधित जेलों की जांच करना आदि है.
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