बड़े बेटे ने दी मुखाग्नि. बनारस के मणि कर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

Published at :27 Mar 2016 3:52 AM (IST)
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बड़े बेटे ने दी मुखाग्नि. बनारस के मणि कर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

चौरसिया लॉज का कमरा नंबर 206 आज भी याद दिलाता है चौबे की गद्दा नहीं, कंबल पर सोते थे पूर्व सांसद लालमुनि बक्सर : बक्सर से चार बार सांसद रहे लालमुनि चौबे ने स्टेशन रोड स्थित चौरसिया लॉज का कमरा नंबर 206 को अपना आशियाना बनाया था. चुनाव के दौरान उनका जब भी आगमन होता […]

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चौरसिया लॉज का कमरा नंबर 206 आज भी याद दिलाता है चौबे की

गद्दा नहीं, कंबल पर सोते थे पूर्व सांसद लालमुनि
बक्सर : बक्सर से चार बार सांसद रहे लालमुनि चौबे ने स्टेशन रोड स्थित चौरसिया लॉज का कमरा नंबर 206 को अपना आशियाना बनाया था. चुनाव के दौरान उनका जब भी आगमन होता था वे उसी कमरे में रहते थे और अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ समय गुजारते थे. सुबह की दिनचर्या की शुरुआत ग्रीन टी से होती थी. चौरसिया लॉज के बाहर चाय की दुकान से वे गरम पानी मंगवाते थे और पुडि़या में रखा ग्रीन टी का पैकेट में पानी डाल कर उसका सेवन कर लेते थे. इसके बाद खान-पान का सामान्य सिलसिला चलता था.
कभी लिट्टी-चोखा, तो कभी खिचड़ी जो बेहद पसंद था वे कार्यकर्ताओं के साथ लेते थे. कार्यकर्ता जब ज्यादा हो जाते थे, तो कवलदह पोखरा में चूल्हा जल जाता था और मिट्टी का बड़ा हांडी मंगा कर उसमें ही खिचड़ी बन जाती थी. खिचड़ी के साथ आलू-बैगन और मिक्स सब्जी का चोखा और पापड़-आचार उनका प्रिय था. लिट्टी के साथ कुछ भी ले लेते थे. गुड़ और घी भी लिट्टी के साथ लेते थे. रेहू मछली के शौकीन थे और दूर से भी ढूंढ कर रेहू मछली मंगा लेते थे.
चाहे कितना भी महंगा हो. चौरसिया लॉज के मालिक स्व. गुप्ता प्रसाद चौरसिया से इनका गहरा लगाव था. कभी इनके घर से भी खाना बनकर आ जाता था. पूर्व सांसद स्व. चौबे का ड्राइवर प्रीतम उनके खाने की व्यवस्था करता था. चौरसिया लॉज के संस्थापक के करीबी रहे देव कुमार श्रीवास्तव और उनके बेटे अभिषेक कुमार ने बताया कि लालमुनि चौबे जब भी आते थे अपने बेड का गददा हटा देते थे और कंबल पर ही सोते थे. वे अकेले कभी नहीं खाते थे,
बल्कि उनके साथ कार्यकर्ता हो या फिर कोई साथी उनके साथ हमेशा खाता था. पहली मंजिल के उस कमरे में भगवान की तसवीरे लगी थीं, जिसकी पूजा अर्चना वे नियमित किया करते थे. आज भी वह तसवीरें उनके कमरे में हैं और उनकी यादें ताजी करती रहती हैं.
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