आबादी नौ हजार, पढ़ने के लिए हाइस्कूल नहीं

Published at :08 Jan 2015 7:19 AM (IST)
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आबादी नौ हजार, पढ़ने के लिए हाइस्कूल नहीं

चक्की/बक्सर : लगभग नौ हजार की आबादीवाला प्रखंड का अरक पंचायत एक अदद हाइस्कूल के लिए तरस रहा है. हाइस्कूल के अभाव में यहां उच्च शिक्षा की स्थिति काफी खराब है. आठवीं क्लास तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद यहां के छात्र-छात्राओं को नौवीं तथा 10 वीं की शिक्षा ग्रहण करने के लिए आस-पड़ोस […]

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चक्की/बक्सर : लगभग नौ हजार की आबादीवाला प्रखंड का अरक पंचायत एक अदद हाइस्कूल के लिए तरस रहा है. हाइस्कूल के अभाव में यहां उच्च शिक्षा की स्थिति काफी खराब है.
आठवीं क्लास तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद यहां के छात्र-छात्राओं को नौवीं तथा 10 वीं की शिक्षा ग्रहण करने के लिए आस-पड़ोस के शहरों एवं गांवों की ओर रूख करना पड़ता है, जो उनके लिए काफी कठिन एवं आर्थिक कष्टवाला है. खासकर युवतियों के लिए घर की दहलीज से बाहर निकलकर आज भी हमारे ग्रामीण परिवेश में काफी मुश्किल भरा है.
नतिजन अधिकांश युवतियां अपने अभिभावकों के इच्छा शक्ति के अभाव में आठवीं क्लास तक की ही शिक्षा प्राप्त करने के बाद आगे की उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाती हैं तथा शादी-विवाह होने तक ये युवतियां अपने-अपने घरों के चहारदीवारी के अंदर एक तरह से कैद हो जाती हैं. वहीं, शिक्षा के प्रति जागरूक तथा कुछ कर दिखाने की लालसा पालनेवाले दूसरे छात्र-छात्राओं की बात की जाये, तो उनके समक्ष भी आठवीं पास के बाद की शिक्षा प्राप्त करने की कठिन चुनौती मुंह बाये खड़ी रहती है.
वे पड़ोस के चक्की, डुमरी एवं कठार के उच्च विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाने को विवश होते हैं. इसके अलावे उनके पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है. वहीं, प्रत्येक पंचायत में एक हाइस्कूल खोलने के सरकार के दावे सिर्फ खोखले साबित हो रहे हैं.
प्रारंभिक स्तर के हैं कुल आठ विद्यालय : पंचायत अंतर्गत पड़नेवाले अन्य विद्यालयों की बात की जाये, तो यहां कुल आठ प्रारंभिक स्तर के विद्यालय मौजूद हैं, जिनमें अरक में चार मध्य एवं तीन प्राथमिक, बेदौली में एक मध्य एवं हेनवा में एक प्राथमिक विद्यालय है. इन्हीं विद्यालयों की बदौलत यहां के बच्चे बुनियादी शिक्षा ग्रहण करते हैं. हालांकि स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा हाइस्कूल खुलवाने के लिए जिले के आला अधिकारियों से लिखित तौर पर बराबर पहल की जाती है, लेकिन उसका कोई सार्थक नतीजा नहीं निकल पाता है.
क्या कहते हैं स्थानीय जनप्रतिनिधि
जिला पार्षद सोनू सिंह ने बताया कि गांव
में हाइस्कूल खोलने के लिए शिक्षा विभाग का कई बार दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन विभाग की सुस्ती के चलते अब तक हाइस्कूल की स्थापना नहीं हो सकी.
अरक पंचायत मुखिया बृजराज सिंह ने बताया कि पंचायत की किसी भी मध्य विद्यालय को उत्क्रमित कर हाइस्कूल स्तर तक की पढ़ाई शुरू की जा सकती है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी से चलते यह अब तक संभव नहीं हो पा रहा है.
छात्र रिया कुमारी सिंह हाइस्कूल की कमी हम लोगों को काफी खलती है. इसके अभाव में आठवीं की बाद की पढ़ाई के लिए हमें आस-पास के गांवों में जाना पड़ता है, जो काफी मुश्किल भरा होता है.
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