खराब नलकूपों के सहारे बेहतर उत्पादन की आस

Updated at : 22 Sep 2017 5:01 AM (IST)
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खराब नलकूपों के सहारे बेहतर उत्पादन की आस

अनदेखी. नलकूपों के खराब होने से किसानों की बढ़ी चिंता 14 करोड़ 50 लाख की राशि प्रशासनिक स्वीकृति के पेच में फंसी बक्सर : खराब नलकूपों के सहारे बेहतर उत्पादन की आस में कृषि विभाग बैठा हुआ है. नलकूपों को ठीक कराने के लिए स्वीकृत हुई 14 करोड़ 50 लाख की राशि प्रशासनिक स्वीकृति की […]

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अनदेखी. नलकूपों के खराब होने से किसानों की बढ़ी चिंता

14 करोड़ 50 लाख की राशि प्रशासनिक स्वीकृति के पेच में फंसी
बक्सर : खराब नलकूपों के सहारे बेहतर उत्पादन की आस में कृषि विभाग बैठा हुआ है. नलकूपों को ठीक कराने के लिए स्वीकृत हुई 14 करोड़ 50 लाख की राशि प्रशासनिक स्वीकृति की पेच में फंसी हुई है. हालांकि तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है. अब हाल यह है कि किसान निजी पंपसेट के सहारे फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं. जिले में अब तक वर्षापात भी काफी कम हुई है. ऐसे में नलकूप ही किसानों के फसल के लिए सहारा थे. वह भी प्रशासनिक स्वीकृति की पेच में फंसकर बेकार पड़े हुए हैं.
किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है. डीजल अनुदान का रवैया भी काफी सुस्त है. जिले में 344 छोटे-बड़े नलकूप हैं, जिसमें से 13 में अब तक बिजली नहीं पहुंची है. जबकि 83 नलकूप पूर्ण रूप से बेकार पड़े हैं. शेष जो नलकूप हैं, उसमें भी तकनीकी खराबी है. ऐसे में कृषि विभाग बेहतर उत्पादन का आस लगाये बैठा है. नलकूप ठीक नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गयी है. खरीफ फसल को सितंबर और अक्तूबर में पानी की ज्यादा आवश्यकता होती है.
151 नलकूप ही कर रहे कार्य
344 नलकूपों में से 151 नलकूप खराब हैं. जिनको ठीक करने के लिए 14 करोड़ 50 लाख की राशि का प्रस्ताव विभाग द्वारा भेजा गया था. तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है, फिर भी प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अब तक राशि का आवंटन नहीं हो पाया है. स्वीकृति के पेच में खराब पड़े ट्यूबवेल ठीक नहीं हो पा रहे हैं. ट्यूबवेल ठीक हो जाने से किसानों को काफी राहत मिलेगी.
बक्सर जिले में 344 छोटे-बड़े नलकूप लगे हैं
पुराना राजकीय नलकूप- 199
फेज-तीन के तीन नलकूप
फेज-आठ के 44 नलकूप
फेज-11- के 85 नलकूप
199 पुराने नलकूपों में 44 ही कार्यरत हैं
फेज-11 के 85 में से 67 कार्यरत हैं.
स्वीकृति मिल गयी है
लघु सिंचाई विभाग के ने बताया कि राशि स्वीकृति हो गयी है, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पायी है. जिस कारण नलकूपों को ठीक नहीं कराया जा सका है. प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के साथ ही खराब पड़े नलकूपों को ठीक करा लिया जायेगा. 20 प्रतिशत इलाका लघु सिंचाई से जुड़ा हुआ है.
लक्ष्मीकांत चौधरी,सहायक अभियंता,बक्सर
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