जेल में बंद कैदी से भी करा दी मनरेगा में मजदूरी

Updated at : 09 Aug 2017 6:12 AM (IST)
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जेल में बंद कैदी से भी करा दी मनरेगा में मजदूरी

फर्जीवाड़ा. फर्जी जॉबकार्ड बनाकर निकाल ली गयी सरकारी राशि ग्रामीणों ने कहा, मुखिया जी एक मजदूर के दो जॉबकार्ड बनाये बक्सर : जिले में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में जेल में बंद कैदियों के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाकर भुगतान उठाने का मामला सामने आया है. अाधिकारिक सूत्रों के अनुसार जिले के […]

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फर्जीवाड़ा. फर्जी जॉबकार्ड बनाकर निकाल ली गयी सरकारी राशि

ग्रामीणों ने कहा, मुखिया जी एक मजदूर के दो जॉबकार्ड बनाये
बक्सर : जिले में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में जेल में बंद कैदियों के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाकर भुगतान उठाने का मामला सामने आया है. अाधिकारिक सूत्रों के अनुसार जिले के चौसा प्रखंड की पवनी ग्राम पंचायत के रेकॉर्ड की जांच के दौरान यह बात सामने आयी है. सूत्रों ने बताया कि महुआरी गांव में हुई एक हत्या के मामले में जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर कमलेश राम के नाम से जॉब कार्ड बनाकर भुगतान उठा लिया गया है. कुछ समय पूर्व पवनी पंचायत में बडे पैमाने पर मनरेगा में अनियमितता की शिकायतें केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय तक पहुंची थी, जिस पर राष्ट्रीय पर्यवेक्षक रूपेश कुमार ने जांच शुरू की,
तो कई गड़बड़ियां सामने मिलीं. पवनी पंचायत के 1250 जॉब कार्डधारियों की जांच की गयी थी. इनमें से अधिकांश ऐसे लोग हैं, जिन्हें कभी काम नहीं मिला. कई लोगों को काम मिला, तो जॉब कार्ड नहीं है. कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने काम किया, लेकिन पैसे नहीं मिले. लाजिमी है कि जब जेल में बंद कैदी से मनरेगा की मजदूरी करायी जा सकती है, तो जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हो सकता है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि जांच किसी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले ही बंद हो गयी.
लाखों के फर्जी काम को मिला आदर्श इनाम : चौसा प्रखंड की पवनी पंचायत में मनरेगा योजना के तहत हुए कार्यों को देखते हुए पंचायत को घोषणा कर आदर्श पंचायत बना दिया गया. पंचायत के विभिन्न गांवों के लोगों की शिकायतें हैं कि मनरेगा में काम कराने बावजूद सालों बीतने पर भी अबतक मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है. कई लोगों का दो-दो जॉबकार्ड बना दिया गया है. जिसमें एक जॉबकार्ड को वर्तमान मुखिया पति ने अपने पास रखा है. उनके बैंक पासबुक व एटीएम भी मुखिया ने जब्त कर लिए हैं. मनरेगा मजदूरों को कुछ रुपये देकर उनसे निकासी फाॅर्म पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि उनके नाम पर रुपये उनके फर्जी हस्ताक्षर से निकाल लिए गये हैं. 100 दिन काम करनेवालों के हाथ महज 100 रुपये मजदूरी मिले हैं. ग्रामीणों ने स्थानीय मुखिया के विरुद्ध आंदोलन का मूड बनाया है.
छह वर्षों से है जेल में बंद, फिर भी मजदूरी : पवनी पंचायत के महुआरी गांव के रहनेवाले कमलेश राम गांव के ही अजय राम की हत्या के मामले में जेल में बंद है. उसे फरवरी, 2011 में ही बक्सर सेंट्रल जेल भेजा गया था, लेकिन उसके नाम पर मनरेगा के जॉब कार्ड बनाकर फर्जी तरीके से राशि निकाली जा रही है. इसी गांव के मनरेगा मजदूर मनेजर राम ने बताया कि वर्ष, 2013 में जांच के लिए एक टीम आयी थी, जिसे मामले की जानकारी दी गयी. लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके कुछ दिनों बाद एक फर्जी जांच टीम ने गांववालों से जांच के नाम पर उनके पासबुक मांग ली और लेकर फरार हो गयी. इसके बाद अबतक जांच होती रह गयी.
जांच के बाद होगी प्राथमिकी होगी राशि की वसूली
मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों की साप्ताहिक जांच होती रहती है. फिर भी इस तरह के फर्जीवाड़े से इनकार नहीं किया जा सकता है. जांच के बाद दोषियों पर एफआइअार दर्ज की जायेगी. राशि वसूली की कार्रवाई होगी.
मो मोबिन अली अंसारी ,डीडीसी,बक्सर
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