राजगीर में भूमि विवाद के 4 मामलों की सुनवाई, एसडीओ ने सभी का किया निष्पादन

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राजगीर एसडीओ सूर्य प्रकाश गुप्ता भूमि विवाद की सुनवाई करते हुए

राजगीर अनुमंडल कार्यालय में भू-समाधान के तहत 4 भूमि विवादों की सुनवाई हुई, जिनमें दुकान किराया, समरसेबल बोरिंग से सिंचाई और भूमि अधिग्रहण मुआवजे से जुड़े मामले शामिल थे. एसडीओ ने सभी पक्षों को नियम पालन और आपसी सौहार्द की हिदायत दी.

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Rajgir Land Dispute Hearing : राजगीर अनुमंडल कार्यालय में गुरुवार को अनुमंडल पदाधिकारी सूर्य प्रकाश गुप्ता ने भू-समाधान के तहत भूमि विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई की. इस दौरान कुल चार मामलों में दोनों पक्षों को सुनने के बाद संबंधित मामलों का निष्पादन किया गया. एसडीओ ने सभी पक्षों को आपसी विवाद समाप्त कर नियम एवं न्यायालय के आदेश का पालन करने की हिदायत दी.

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दुकान के बकाया किराये के भुगतान का निर्देश

सिलाव के दिलीप कुमार तमोली ने शिकायत की कि उन्होंने नगर पंचायत से एक दुकान ली थी, जिसे संचालन के लिए किराये पर प्रवीण कुमार तमोली को दिया गया था.

आरोप है कि प्रवीण कुमार तमोली द्वारा दुकान का बकाया किराया भुगतान नहीं किया जा रहा है. सुनवाई के बाद एसडीओ ने एक माह के भीतर बकाया किराया भुगतान करने का निर्देश दिया.

सहोदर भाइयों के बीच समरसेबल बोरिंग से सिंचाई विवाद

दूसरे मामले में नवीन कुमार वर्मा और ओमप्रकाश कुमार वर्मा दोनों सहोदर भाइयों के बीच अपनी ही बोरिंग से सिंचाई को लेकर विवाद था. दोनों सहोदर भाइयों के बीच बंटवारे में एक ही समरसेबल मोटर से सिंचाई करने का अधिकार तय हुआ था.

आरोप था कि बड़े भाई द्वारा छोटे भाई को सिंचाई सुविधा से वंचित किया जा रहा है. एसडीओ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोनों भाइयों को बोरिंग से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

रैयती भूमि विवाद में कोर्ट आदेश की प्रतीक्षा की सलाह

भगवानपुर निवासी पारो चौधरी और विशेश्वर चौधरी के बीच रैयती भूमि विवाद का मामला भी सामने आया. उक्त जमीन को लेकर न्यायालय में टाइटल सूट लंबित है. एसडीओ ने दोनों पक्षों को न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा करने और विवाद से दूर रहने को कहा.

भूमि अधिग्रहण मुआवजे में भेदभाव के आरोप की जांच

चौथे मामले में धीरज दास ने वीरायतन पर उनकी जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि अन्य लोगों को 10-10 लाख रुपये दिए गए, जबकि उन्हें मात्र 10 हजार रुपये मिले. मामले में एसडीओ ने संबंधित पक्षों को सुनते हुए नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया.

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