नालंदा की छिपी विरासत को मिला नया मंच, ‘मेरा प्रखंड-मेरा गौरव’ में 9 प्रतिभागी सम्मानित

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अवॉर्ड देते अधिकारी

Nalanda Tourism : नालंदा जिले के ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से चलाए गए ‘मेरा प्रखंड, मेरा गौरव’ अभियान के तहत चयनित नौ प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया.

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Nalanda Tourism : (कंचन कुमार) नालंदा जिले के ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से चलाए गए ‘मेरा प्रखंड, मेरा गौरव’ अभियान के तहत चयनित नौ प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया.
बिहारशरीफ में आयोजित समारोह में उप विकास आयुक्त ने सभी विजेताओं को उत्कृष्ट फोटोग्राफी के लिए 10-10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि का चेक प्रदान किया. इस पहल का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ जिले की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है.

कैमरे में कैद हुई नालंदा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपने-अपने प्रखंडों के प्रमुख पर्यटन, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की आकर्षक तस्वीरें प्रस्तुत कीं. चयनित तस्वीरों में तेल्हारा यूनिवर्सिटी, आत्माधाम इस्लामपुर, मोरा तालाब, बड़गांव सूर्य मंदिर और अमावा स्टेट रेजिडेंसी जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया. अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की पहल से स्थानीय पर्यटन को नई गति मिलेगी.

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युवाओं की प्रतिभा से मिली पर्यटन स्थलों को नई पहचान

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि फोटोग्राफी केवल कला नहीं बल्कि विरासत को दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है. युवा प्रतिभाओं ने अपनी रचनात्मकता के जरिए जिले के कई ऐसे स्थलों को सामने लाया, जिनकी जानकारी सीमित लोगों तक ही थी.

तेल्हारा यूनिवर्सिटी की तस्वीर ने भी दिलाया सम्मान

एकंगरसराय स्थित प्राचीन तेल्हारा यूनिवर्सिटी की आकर्षक तस्वीर प्रस्तुत करने पर गौतम कुमार को सम्मानित किया गया. उनकी तस्वीर ने नालंदा की गौरवशाली शैक्षणिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया.

आत्माधाम इस्लामपुर की भव्यता ने जीता निर्णायकों का दिल

इस्लामपुर के प्रसिद्ध आत्माधाम की तस्वीर के लिए सतीश कुमार को पुरस्कार प्रदान किया गया. उनकी तस्वीर में स्थल की धार्मिक महत्ता और प्राकृतिक सौंदर्य का सुंदर समन्वय देखने को मिला.

मोरा तालाब की खूबसूरती को कैमरे में उतारने वाले बने विजेता

बिहारशरीफ के मोरा तालाब की मनमोहक तस्वीर के लिए मणिकांत को सम्मानित किया गया. उनकी प्रस्तुति ने तालाब की प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय महत्व को प्रभावी रूप से सामने रखा.

बड़गांव सूर्य मंदिर की विरासत को सामने लाए निकेत

प्राचीन बड़गांव सूर्य मंदिर की तस्वीर के लिए निकेत को सम्मान मिला. तस्वीर में मंदिर की स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया गया, जिसकी निर्णायकों ने सराहना की.

दरगाह हवनपुरा की तस्वीर के लिए मिला अवॉर्ड

रहुई प्रखंड स्थित मुगलकालीन दरगाह हवनपुरा की तस्वीर प्रस्तुत करने पर दीपक आनंद मांझी को सम्मानित किया गया. उनकी तस्वीर ने जिले की सांस्कृतिक विविधता और गंगा-जमुनी तहजीब को प्रभावी ढंग से दर्शाया.

बड़ी मस्जिद और बड़ी मठ गुरुधाम को भी मिली सराहना

नागरनौसा की ऐतिहासिक बड़ी मस्जिद की तस्वीर के लिए अनीस इकबाल को सम्मानित किया गया, जबकि परवलपुर स्थित श्री बड़ी मठ गुरुधाम की तस्वीर के लिए मेघा कुमारी को पुरस्कार मिला. दोनों प्रस्तुतियों को निर्णायकों ने उत्कृष्ट बताया.

250 साल पुराने राम जानकी मंदिर और अमावा स्टेट रेजिडेंसी बने केंद्र

हरनौत के नेहुसा गांव स्थित लगभग 250 वर्ष पुराने राम जानकी मंदिर की तस्वीर के लिए कुणाल कौशल तथा अस्थावां स्थित ब्रिटिशकालीन अमावा स्टेट रेजिडेंसी की तस्वीर के लिए यशपाल को सम्मानित किया गया. इन तस्वीरों ने जिले की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत को नई पहचान दिलाई.

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उप विकास आयुक्त ने कहा कि जिले की विरासत को दुनिया के सामने लाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी इस तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, ताकि नालंदा के ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान मिल सके.

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