लाखों खर्च कर खरीदे लैपटॉप, अब राजगीर नगर परिषद में बने शो-पीस? पार्षद बोले- काम का नहीं

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राजगीर नगर परिषद द्वारा दिया गया लैपटॉप

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Rajgir Municipal Council Laptop : राजगीर नगर परिषद ने डिजिटल व्यवस्था मजबूत करने के लिए पार्षदों को लैपटॉप दिए, लेकिन अब ये सिर्फ शो-पीस बनकर रह गए हैं. कई पार्षदों को लैपटॉप चलाना तक नहीं आता, जिससे योजनाओं के डिजिटल क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं. जानिए क्या है पूरी कहानी.

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Rajgir Municipal Council Laptop : राजगीर नगर परिषद में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सभापति, उपसभापति और सभी 32 वार्ड पार्षदों को लैपटॉप उपलब्ध कराये गये हैं. लेकिन इन संसाधनों के नियमित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कई जनप्रतिनिधियों को लैपटॉप चलाने में परेशानी होने की बात सामने आयी है, जिससे डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होता दिख रहा है.

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माउस चलाने से लेकर ईमेल तक में परेशानी

नगर परिषद से जुड़े लोगों के अनुसार, कुछ पार्षद लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन कई जनप्रतिनिधियों के लिए कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी भी चुनौती बनी हुई है. लैपटॉप ऑन-ऑफ करने, माउस चलाने, इंटरनेट इस्तेमाल करने और ईमेल भेजने जैसी शुरुआती डिजिटल जरूरतों के लिए भी प्रशिक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

आधिकारिक पत्राचार को डिजिटल बनाने की थी योजना

नगर परिषद के स्तर पर सभापति, उपसभापति और 32 वार्ड पार्षदों के आधिकारिक पत्राचार को डिजिटल माध्यम से करने की योजना थी. वार्डों के विकास कार्यों के प्रस्ताव, फंड की मांग, समस्याएं और शिकायतें ईमेल या निर्धारित सरकारी पोर्टल के माध्यम से भेजने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना था.

नोटिस और बैठक की जानकारी भी ऑनलाइन भेजने की जरूरत

नगर परिषद की ओर से जारी नोटिस, बैठक की सूचना, एजेंडा और बोर्ड या अस्थायी सशक्त समिति की बैठकों में पारित प्रस्तावों को भी जनप्रतिनिधियों के आधिकारिक ईमेल पर नियमित रूप से भेजने की व्यवस्था जरूरी बतायी जा रही है. इससे कागजी पत्राचार कम करने के साथ कामकाज में तेजी लाने में मदद मिल सकती है.

सिर्फ लैपटॉप देने से डिजिटल व्यवस्था सफल नहीं होगी

जानकारों के अनुसार, जनप्रतिनिधियों को लैपटॉप उपलब्ध कराना डिजिटल व्यवस्था की शुरुआत भर है. इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब पार्षदों को उसके इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जाए. बुनियादी डिजिटल साक्षरता के बिना महंगे उपकरण भी लंबे समय तक उपयोग से बाहर रह सकते हैं.

पार्षदों को दिया जाना चाहिए था बुनियादी प्रशिक्षण

पार्षदों के लिए प्रशिक्षण में लैपटॉप का संचालन, इंटरनेट का इस्तेमाल, ईमेल भेजना, दस्तावेज तैयार करना, सरकारी पोर्टल पर लॉगिन और ऑनलाइन आवेदन या पत्राचार जैसी जानकारी शामिल होनी चाहिए. इसके लिए कोडिंग जैसी उन्नत जानकारी से ज्यादा जरूरी बुनियादी डिजिटल कौशल विकसित करना है.

सक्रिय इस्तेमाल की नियमित मॉनिटरिंग भी जरूरी

डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक पार्षद के लैपटॉप के इस्तेमाल की नियमित निगरानी की व्यवस्था भी जरूरी है. यह देखा जा सकता है कि कितने पार्षद सरकारी पोर्टल का इस्तेमाल कर रहे हैं, कितने डिजिटल पत्राचार किए जा रहे हैं और कितने विकास प्रस्ताव ऑनलाइन भेजे जा रहे हैं.

मासिक समीक्षा से पता चल सकती है जमीनी स्थिति

पार्षदों के डिजिटल कामकाज की मासिक समीक्षा की व्यवस्था होने से नगर परिषद को यह पता चल सकता है कि उपलब्ध कराये गये संसाधनों का कितना उपयोग हो रहा है. बेहतर प्रदर्शन करने वाले जनप्रतिनिधियों को प्रोत्साहित करने से दूसरे पार्षदों को भी डिजिटल माध्यम अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है.

कुछ पार्षदों ने इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग बात कही

वार्ड पार्षद महेन्द्र यादव ने बताया कि वे लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं. वहीं वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि लैपटॉप उनके लिए काम का नहीं है और इससे कोई काम नहीं होता. उन्होंने लैपटॉप लौटाने की बात भी कही है.

कई पार्षद बोले- घर की शोभा बनकर रह गया लैपटॉप

अनीता सिन्हा, सुनिता देवी, राजबल्लभ पासवान समेत अन्य पार्षदों ने भी लैपटॉप के उपयोग को लेकर असंतोष जताया. उनके अनुसार, उपलब्ध कराया गया लैपटॉप घर की शोभा की वस्तु बनकर रह गया है. पार्षदों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं नगर परिषद की डिजिटल व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं.

डिजिटल संसाधन को कामकाज से जोड़ने की जरूरत

नगर परिषद में डिजिटल व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब लैपटॉप का इस्तेमाल वास्तविक कामकाज में हो. आधिकारिक ईमेल, सरकारी पोर्टल, ऑनलाइन प्रस्ताव और डिजिटल पत्राचार को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के साथ पार्षदों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा.

प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग से सुधर सकती है व्यवस्था

राजगीर नगर परिषद के सामने अब चुनौती सिर्फ डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कराने की है. प्रशिक्षण, आधिकारिक डिजिटल सिस्टम, नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही की व्यवस्था लागू होने पर इन संसाधनों का इस्तेमाल नगर परिषद के कामकाज को तेज करने में किया जा सकता है.

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