बिहार के शहरों में भी होगा जमीन सर्वे, हर मकान-फ्लैट का बनेगा अलग रिकॉर्ड, जानें मालिकों को क्या होगा फायदा
जमीन सर्वे की सांकेतिक तस्वीर
Bihar Bhumi Survey: बिहार में ग्रामीण जमीन सर्वे के बाद अब शहरों में भी विशेष भूमि सर्वे होगा. राज्य के 264 नगर निकायों में होने वाले इस सर्वे में फ्लैट मालिकों का जमीन में समानुपातिक हिस्सा भी दर्ज किया जाएगा. ड्रोन और जीपीएस से जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा.
Bihar Bhumi Survey: बिहार में ग्रामीण इलाकों का जमीन सर्वे पूरा होने के बाद अब शहरी क्षेत्रों में भी विशेष भूमि सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा. राज्य के सभी 264 नगर निकाय इसके दायरे में आएंगे. इस सर्वे की सबसे खास बात फ्लैट और बहुमंजिली इमारतों में रहने वाले लोगों से जुड़ी है. फ्लैट मालिकों के नाम जमीन के साथ उनके फ्लैट का वैधानिक और समानुपातिक मालिकाना हक भी दर्ज किया जाएगा.
सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी कर दिया गया है. सर्वे में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ नगर निकाय के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल होंगे.
264 नगर निकायों में शुरू होगा सर्वे
बंदोबस्त पदाधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वे पूरा होते ही शहरी क्षेत्रों में यह अभियान शुरू होगा. राज्य के सभी 264 नगर निकायों को इसमें शामिल किया जाएगा.
यह सर्वे पुराने रिकॉर्ड को अपडेट करने के साथ जमीन के मालिकाना हक को स्पष्ट करने के लिए किया जा रहा है. सर्वे का काम आधुनिक तकनीक से होगा. इसमें ड्रोन और जीपीएस की मदद ली जाएगी.
फ्लैट खरीदने वालों को क्या मिलेगा?
शहरी जमीन सर्वे में सिर्फ इमारत के नीचे की जमीन का रिकॉर्ड तैयार नहीं होगा. बहुमंजिली इमारतों में मौजूद अलग-अलग फ्लैटों का मालिकाना हक भी दर्ज किया जाएगा.
यानी जिस व्यक्ति के नाम फ्लैट है, उसके फ्लैट के साथ जमीन में उसका समानुपातिक स्वामित्व भी रिकॉर्ड में दर्ज होगा. इसके अलावा वैधानिक दखल की जानकारी भी दर्ज की जाएगी. इससे भविष्य में फ्लैट और जमीन को लेकर होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलेगी.
ड्रोन और जीपीएस से होगी जमीन की मैपिंग
शहरी भूमि सर्वे में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. ड्रोन और जीपीएस के जरिए जमीन की मैपिंग होगी. सर्वे पूरा होने के बाद रैयतों को लैंड पार्सल मैप उपलब्ध कराया जाएगा.
इसके बाद जमीन के रिकॉर्ड को लेकर किसी तरह की आपत्ति होने पर संबंधित व्यक्ति प्रपत्र-8 के जरिए आपत्ति दर्ज करा सकेगा. इससे रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया भी तय तरीके से आगे बढ़ेगी.
पटना में क्यों अहम है नया जमीन सर्वे?
पटना समेत कई शहरी क्षेत्रों में पुराना सर्वे रिकॉर्ड आज भी बड़ी समस्या है. पटना में 1959-65 का रिविजनल सर्वे पूरा नहीं हो सका था. ऐसे में करीब एक सदी पुराने 1920 के कैडस्ट्रल खतियान को ही अब तक कानूनी आधार माना जाता रहा है.
नए शहरी भूमि सर्वे से जमीन का नया और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा. इससे पुराने रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी. जमीन की सीमा और मालिकाना हक को भी नए सिरे से दर्ज किया जाएगा.
ग्रामीण और शहरी सर्वे में क्या होगा अंतर?
ग्रामीण और शहरी भूमि सर्वे की प्रक्रिया पूरी तरह एक जैसी नहीं होगी. ग्रामीण क्षेत्रों में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, कानूनगो और अमीन की टीम सर्वे करती है. शहरी क्षेत्रों में राजस्व विभाग के साथ नगर निकाय के अधिकारी और कर्मचारी भी सर्वे टीम का हिस्सा होंगे.
शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिली इमारतों और फ्लैटों को देखते हुए अलग व्यवस्था रखी गई है. यहां जमीन के साथ फ्लैट का समानुपातिक स्वामित्व भी रिकॉर्ड में दर्ज होगा.
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शहरों के लिए होंगे अलग प्रपत्र
शहरी भूमि सर्वे में सामान्य प्रपत्रों के बजाय विशेष प्रपत्रों का इस्तेमाल होगा. इनमें प्रपत्र 1'क', 2'क', 3'क', 7'क', 12'क' और 20'क' शामिल हैं.
अंतिम रूप से प्रकाशित खतियान की चार प्रतियां तैयार की जाएंगी. इनमें एक प्रति अंचल कार्यालय और एक संबंधित नगरपालिका कार्यालय को दी जाएगी. शहरों के लिए अलग नगरपालिका लगान दर तालिका भी तैयार होगी. इसके लिए प्रपत्र-18 ग का इस्तेमाल किया जाएगा.
वार्ड कार्यालय और वेबसाइट पर मिलेगी जानकारी
शहरी क्षेत्रों में सर्वे से जुड़ी सूचनाएं लोगों तक पहुंचाने के लिए वार्ड कार्यालयों और नगर निकायों की वेबसाइट का इस्तेमाल किया जाएगा. यहां जरूरी नोटिस और सूचनाएं प्रदर्शित की जाएंगी.
ग्रामीण इलाकों में ऐसी सूचनाएं पंचायत स्तर पर प्रकाशित की जाती हैं. शहरी क्षेत्रों में व्यवस्था को नगर निकायों के हिसाब से तैयार किया गया है.
फ्लैट और जमीन के विवादों में मिलेगी राहत
इस सर्वे को शहरी जमीन के रिकॉर्ड के लिहाज से अहम माना जा रहा है. जमीन और फ्लैट का स्वामित्व स्पष्ट होने से भविष्य में विवाद कम हो सकते हैं. फ्लैट खरीदारों को अपने हिस्से की जमीन का वैधानिक और समानुपातिक अधिकार रिकॉर्ड में मिलने से सुरक्षा भी बढ़ेगी.
ड्रोन और जीपीएस से तैयार डिजिटल मैप जमीन की सीमाओं का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार करेगा. इससे जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता आने की उम्मीद है.
ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वे पूरा होने के बाद अब शहरी सर्वे शुरू होने से बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जाएगा.
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