बिहार में भूजल संरक्षण की नई पहल, इंजेक्शन वेल परियोजना की तैयारी; हरित आवरण 15.5 प्रतिशत तक पहुंचा

हरित आवरण भी 15.5 फीसदी पहुंचा
Patna News: राज्य में भूजल स्तर सुधारने के लिए ‘इंजेक्शन वेल’ परियोजना की तैयारी की जा रही है. जल-जीवन-हरियाली अभियान से जल संरक्षण और हरित आवरण में सुधार हुआ है. किसानों की आय में वृद्धि और जल संकट में कमी के संकेत मिले हैं.
Bihar News: (हिमांशु देव की रिपोर्ट)
बिहार राज्य में लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है. लघु जल संसाधन विभाग पायलट आधार पर ‘इंजेक्शन वेल’ परियोजना शुरू करने जा रहा है, जिससे वर्षा जल को सीधे गहरे भूजल भंडार तक पहुंचाया जाएगा.
इंजेक्शन वेल से बढ़ेगा भूजल स्तर
इस तकनीक के माध्यम से बारिश के पानी को सीधे एक्वीफर तक पहुंचाया जाएगा, जिससे भूजल स्तर (Groundwater Level) में सुधार होगा और लंबे समय तक जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी. इसके साथ ही भूजल उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नया नियामक प्रारूप भी तैयार किया जा रहा है.
जल-जीवन-हरियाली अभियान के सकारात्मक परिणाम
हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार जल-जीवन-हरियाली अभियान के अच्छे परिणाम सामने आए हैं. वर्ष 2017 में जहां 102 प्रखंड अर्ध-गंभीर, गंभीर और अतिदोहित श्रेणी में थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 64 रह गई है.
जल संरक्षण के लिए कई कार्य

अभियान के तहत तालाब, आहर, पोखर और पुराने कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है. साथ ही वर्षा जल संचयन, चेकडैम निर्माण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है.
हरित आवरण में बढ़ोतरी
राज्य का हरित आवरण 9 प्रतिशत से बढ़कर 15.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इसे 17 प्रतिशत तक ले जाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है.
किसानों को मिला लाभ
जल संरक्षण के साथ जैविक खेती और टपक सिंचाई को बढ़ावा मिलने से किसानों की सिंचाई व्यवस्था बेहतर हुई है और उनकी आय में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है.
विशेषज्ञों की राय
जानकारों का मानना है कि जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के प्रयासों से आने वाले समय में जल संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
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