TMBU में 3 लाख के लेन-देन का आरोप, वायरल ऑडियो से खुला मामला, चार घंटे चली जांच, 3 दिन में मांगी रिपोर्ट
भागलपुर विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन.
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) सेवांत लाभ के लिए कथित 3 लाख रुपये के लेन-देन के मामले में फंस गया है. वायरल ऑडियो के बाद विश्वविद्यालय ने जांच कमेटी गठित कर दी है. चार घंटे चली बैठक में मामले के विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया गया.
TMBU Bhagalpur News: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय यानी टीएमबीयू में सेवांत लाभ देने के एवज में तीन लाख रुपये के कथित लेन-देन का मामला अब जांच के घेरे में आ गया है. सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो के बाद उठे इस मामले में बुधवार को विश्वविद्यालय की जांच कमेटी ने करीब चार घंटे तक अलग-अलग बिंदुओं पर मंथन किया. कमेटी ने वायरल ऑडियो में बातचीत करने वाले दो पूर्व प्रशाखा पदाधिकारियों में से एक से पूछताछ कर उसका पक्ष जाना.
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मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि आरोप सेवांत लाभ और पेंशन जैसे कर्मचारियों के जरूरी वित्तीय अधिकारों से जुड़ा है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है और तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है. अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वायरल ऑडियो में लगाये गये आरोपों की वास्तविकता क्या है और सेवांत लाभ से जुड़े मामले में किसी तरह के पैसे के लेन-देन की बात सामने आती है या नहीं.
वायरल ऑडियो में तीन लाख रुपये के आरोप का जिक्र
मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए एक ऑडियो से हुई. बताया गया कि ऑडियो में टीएमबीयू के दो पूर्व एसओ के बीच बातचीत है. बातचीत के दौरान वर्तमान में विश्वविद्यालय में कार्यरत एक एसओ और एक अधिकारी पर सेवांत लाभ जारी करने के एवज में तीन लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया.
ऑडियो सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच की प्रक्रिया शुरू की. मंगलवार को प्रभारी कुलपति के आदेश पर एक अधिकारी, एक वर्तमान कर्मी और दो पूर्व एसओ को शोकॉज भी किया गया था. सभी से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया था.
बताया जा रहा है कि संबंधित सभी लोगों ने विश्वविद्यालय को अपना जवाब भेज दिया है. अब इन जवाबों को भी जांच कमेटी के समक्ष रखा जायेगा.
चार घंटे तक कमेटी ने खंगाले ऑडियो से जुड़े बिंदु
बुधवार को प्रभारी एफए चतुर किस्कू के कार्यालय में जांच कमेटी की बैठक हुई. इसमें प्रभारी एफए के अलावा कमेटी के सदस्य डॉ कमल प्रसाद और डॉ मुस्फिक आलम मौजूद रहे.
कमेटी ने करीब चार घंटे तक मामले के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की. खास तौर पर वायरल ऑडियो में कही गयी बातों और उससे जुड़े तथ्यों को समझने की कोशिश की गयी.
ऑडियो में जिन दो पूर्व प्रशाखा पदाधिकारियों के बीच बातचीत बतायी गयी है, उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था. इनमें से एक पूर्व एसओ कमेटी के सामने उपस्थित हुए और उन्होंने पूरे मामले में अपना पक्ष रखा.
पूर्व एसओ ने कहा- पेंशन जारी नहीं होने से थे परेशान
विश्वविद्यालय के अंदरखाने के अनुसार, पूछताछ के दौरान एक पूर्व एसओ ने कमेटी को बताया कि उन्होंने अपनी ओर से जो जवाब देना था, वह दे दिया है. उनका कहना था कि उनकी पेंशन अभी तक जारी नहीं हुई थी और इसी वजह से वह परेशान थे.
इसी परेशानी के बीच उन्होंने दूसरे पूर्व एसओ से बातचीत की थी. बातचीत के दौरान उन्हें कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि पेंशन जारी करने के लिए कर्मी और अधिकारी के बीच पैसे के लेन-देन की बात होती है.
हालांकि, यह बात फिलहाल आरोप और जांच का हिस्सा है. विश्वविद्यालय की कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल ऑडियो में लगाये गये आरोपों में कितनी सच्चाई है.
दूसरा पूर्व एसओ रिश्तेदार के इलाज के कारण नहीं पहुंचे
जांच के लिए बुलाये गये दूसरे पूर्व एसओ बुधवार को कमेटी के सामने उपस्थित नहीं हो सके. बताया गया कि वह अपने एक रिश्तेदार के उपचार के लिए बाहर हैं.
ऐसे में जांच कमेटी ने फिलहाल उपस्थित हुए पूर्व एसओ का पक्ष सुना. दूसरे पूर्व एसओ से आगे पूछताछ होगी या नहीं, यह जांच की अगली प्रक्रिया में स्पष्ट होगा.
शोकॉज के जवाब भी जांच का हिस्सा बनेंगे
मंगलवार को मामले में चार लोगों से शोकॉज किया गया था. इनमें एक अधिकारी, एक वर्तमान कर्मी और दो पूर्व प्रशाखा पदाधिकारी शामिल हैं. प्रभारी कुलपति के निर्देश पर सभी को 24 घंटे के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया था.
विश्वविद्यालय के अंदरखाने के अनुसार, सभी संबंधित लोगों ने अपना जवाब भेज दिया है. अब जांच कमेटी इन जवाबों को भी अपने सामने रखकर पूरे मामले का परीक्षण करेगी.
इससे जांच केवल वायरल ऑडियो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संबंधित लोगों के लिखित जवाब और उपलब्ध तथ्यों को भी इसमें शामिल किया जायेगा.
TMBU Bhagalpur News: तीन दिनों में रिपोर्ट, अब जांच के निष्कर्ष पर नजर
टीएमबीयू प्रशासन ने जांच कमेटी से तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है. ऐसे में अब सबसे अहम सवाल यही है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष देती है.
सेवांत लाभ और पेंशन किसी भी सेवानिवृत्त कर्मचारी के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा होते हैं. इसलिए इनसे जुड़े किसी भी कथित लेन-देन का आरोप विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों के भरोसे से सीधे जुड़ता है.
फिलहाल विश्वविद्यालय की जांच जारी है. वायरल ऑडियो में लगाये गये आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही मानी जा सकेगी. रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मामले में आरोपों का आधार क्या है और विश्वविद्यालय प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है.
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