जिसे कुर्सी से हटाया, उसी से फिर बढ़ी नजदीकी : नवगछिया जदयू की राजनीति में क्या हुआ?

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गोपालपुर सांसद प्रतिनिधि का फाइल फोटो | Prabhat Khabar Network

नवगछिया जदयू की राजनीति में रिश्तों के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. जो नेता पहले हटाए गए थे, अब उन्हें नई जिम्मेदारियां मिली हैं. जानिए क्या है इसके पीछे की वजह.

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गोपालपुर : गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में जदयू की राजनीति में इन दिनों समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. नवगछिया जदयू की सियासत में एक बार फिर रिश्तों और राजनीतिक भूमिकाओं को लेकर चर्चा तेज है. राजनीति में कहा जाता है कि यहां न कोई स्थायी दोस्त होता है और न स्थायी दुश्मन. बदलते चुनावी और राजनीतिक समीकरणों के साथ रिश्ते भी बदलते रहते हैं. नवगछिया में सामने आया घटनाक्रम इसकी ताजा मिसाल माना जा रहा है.

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पहले सांसद की शिकायत पर गयी थी कुर्सी

लोकसभा चुनाव से पहले नवगछिया जदयू के तत्कालीन जिलाध्यक्ष त्रिपुरारी भारती को लेकर राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा हुई थी. तत्कालीन गोपालपुर जदयू विधायक गोपाल मंडल से उनकी नजदीकी को लेकर सांसद अजय मंडल की ओर से शिकायत किये जाने के बाद प्रदेश नेतृत्व ने भारती को जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया था. इसके बाद वीरेंद्र सिंह कुशवाहा को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी.

उस समय माना जा रहा था कि दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक दूरी लंबे समय तक बनी रहेगी. लेकिन चुनावी राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और नवगछिया में भी ऐसा ही देखने को मिला.

चुनाव के बाद फिर बढ़ी नजदीकी

विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर फिर बदल गयी. कभी जिलाध्यक्ष पद से हटाये गये त्रिपुरारी भारती की सांसद अजय मंडल के साथ नजदीकी दोबारा बढ़ी. इसके बाद उन्हें नवगछिया अनुमंडल सांसद प्रतिनिधि के साथ जेडआरयूसीसी सदस्य की जिम्मेदारी भी मिल गयी.

इसे लेकर जदयू के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आखिर ऐसा क्या बदला कि जिस रिश्ते में कभी दूरी नजर आ रही थी, वही अब फिर नजदीकी में बदल गया.

राजनीति में परिस्थितियां बदलते ही बदलते हैं समीकरण

नवगछिया की इस राजनीतिक कहानी को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले और चुनाव के बाद परिस्थितियां अलग होती हैं. सत्ता, संगठन और क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से नेताओं की भूमिकाएं और आपसी समीकरण भी बदल सकते हैं.

त्रिपुरारी भारती का दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में आना इसी बदलते राजनीतिक समीकरण का संकेत माना जा रहा है.

कुर्सी गयी तो दूरी, जिम्मेदारी मिली तो सम्मान?

त्रिपुरारी भारती के राजनीतिक सफर में हालिया बदलाव अपने आप में चर्चा का विषय है. एक समय उन्हें संगठन की जिम्मेदारी से हटाया गया, लेकिन बाद में वही व्यक्ति सांसद प्रतिनिधि और जेडआरयूसीसी सदस्य की भूमिका में नजर आये.

इस पूरे घटनाक्रम ने नवगछिया की सियासत में यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीति में रिश्ते स्थायी होते हैं या परिस्थितियां ही तय करती हैं कि कौन किसके करीब रहेगा?

फिलहाल इतना साफ है कि नवगछिया जदयू में राजनीतिक समीकरण स्थिर नहीं हैं. जो चेहरा कल दूरी की वजह से चर्चा में था, आज वही नजदीकी और नयी जिम्मेदारियों के कारण सुर्खियों में है.

यही राजनीति है—यहां दोस्ती और दूरी से ज्यादा मायने बदलते हुए समीकरण रखते हैं.

चुनाव से पहले दूरी, बाद में नजदीकी क्यों? पढ़िए नवगछिया जदयू के बदले समीकरण की पूरी कहानी

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