कहलगांव: दुर्लभ 'त्रिवेणी योग' में मनेगी पुत्रदा एकादशी, झूले पर विराजेंगे राधा-कृष्ण; 4 सितंबर को जन्माष्टमी
कहलगांव श्री कृष्णा दुर्गा ठाकुर बाड़ी में विराजमान राधा कृष्ण की प्रतिमा | Prabhat Khabar Network
भागलपुर के कहलगांव में सावन-भाद्रपद के आगमन के साथ भक्तिमय माहौल है. इस वर्ष पुत्रदा एकादशी पर सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का दुर्लभ त्रिवेणी संयोग बन रहा है. इस पावन अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान होंगे, इसके बाद झूलनोत्सव और रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाई जाएगी.
भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल में सावन और भाद्रपद के आगमन को लेकर भक्ति व उल्लास का माहौल बना हुआ है. इस वर्ष सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी पर सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का एक अत्यंत दुर्लभ 'त्रिवेणी संयोग' बन रहा है. इस पावन अवसर पर अनुमंडल क्षेत्र के शिवालयों, ठाकुरबाड़ियों और मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. एकादशी के साथ ही 24 से 28 अगस्त तक मंदिरों में भव्य झूलनोत्सव का आयोजन होगा, जबकि 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र के महासंयोग में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी.
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सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का त्रिवेणी महासंयोग
धार्मिक विद्वान साहित्यवाचस्पति डॉ. रामजी मिश्र रंजन ने इस पावन तिथि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुत्रदा एकादशी पर तीन प्रमुख शुभ योगों का एक साथ मिलना अत्यंत फलदायी है. डॉ. रंजन के अनुसार, सिद्धि योग में की गई साधना व पूजा का फल तत्काल प्राप्त होता है, सर्वार्थ सिद्धि योग भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करता है और रवि योग में भगवान सूर्यदेव का प्रत्यक्ष आशीर्वाद मिलता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से निःसंतान दंपतियों को योग्य एवं दीर्घायु संतान का सुख प्राप्त होता है. यह तिथि रात 3:56 बजे तक प्रभावी रहेगी, जबकि पूजा के लिए सबसे उत्तम अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:26 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा. इस शुभ समय में लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक कर माखन-मिश्री का भोग लगाना विशेष फलदायी माना गया है.
24 से 28 अगस्त तक सजेगा झूलनोत्सव
पुत्रदा एकादशी के उपरांत 24 अगस्त से 28 अगस्त तक कहलगांव और पीरपैंती अनुमंडल की प्रमुख ठाकुरबाड़ियों व मंदिरों में पांच दिवसीय झूलनोत्सव धूमधाम से आयोजित किया जाएगा. इस दौरान भगवान श्री राधा-कृष्ण की मनमोहक प्रतिमाओं को आकर्षक फूलों और वस्त्रों से सजाकर झूले पर विराजमान कराया जाएगा तथा पांच दिनों तक अनवरत भजन-कीर्तन का दौर चलेगा. पीरपैंती के शेरमारी बाजार स्थित ठाकुरबाड़ी के पुजारी पंडित रतन पाठक ने बताया कि झूलनोत्सव केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जो समाज में आपसी प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा देता है.
4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र में मनेगी जन्माष्टमी
कहलगांव स्थित ऐतिहासिक राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी के महंत बालकृष्ण पाण्डेय ने बताया कि इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोग में मनाया जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में ही हुआ था. रोहिणी नक्षत्र से युक्त होने के कारण इस वर्ष की जन्माष्टमी का व्रत और पूजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से सिद्धिदायक, कल्याणकारी और महाफलदायी सिद्ध होगा.
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